करूर हादसे के एक साल पूरे, अभी तक नहीं आई रिपोर्ट, स्टालिन की पार्टी DMK ने पूछा- आखिर देरी की वजह क्या है?

करूर हादसे के एक साल पूरे, अभी तक नहीं आई रिपोर्ट, स्टालिन की पार्टी DMK ने पूछा- आखिर देरी की वजह क्या है?

Karur stampede: तमिलनाडु के करुर में टीवीके प्रमुख विजय की रैली में भगदड़ हादसे को एक साल पूरे हो गए हैं। करुर भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले के लेकर CBI जांच के आदेश दिए गए थे। जिस पर तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी दल DMK ने सवाल खड़े कर दिए हैं। DMK के प्रवक्ता टीकेएस इलांगोवन ने कहा कि रैली स्थल पर विजय के देर से पहुंचने से यह हादसा हुआ था। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) प्रमुख विजय खुद को बीजेपी के हवाले कर चुके हैं। इसलिए हादसे के एक साल बाद भी कुछ नहीं हुआ है।

CBI इसमें तेजी नहीं दिखाएगी

DMK प्रवक्ता ने कहा कि मामला अभी CBI के पास है। CBI इसमें तेजी नहीं दिखाएगी, क्योंकि उन्होंने विजय को अपने नियंत्रण में ले लिया है। उन्हें पता है कि रैली स्थल पर विजय का देर से पहुंचना ही उन 41 लोगों की मौत की इकलौती वजह थी। टीकेएस इलांगोवन ने कहा कि हादसे को एक साल बीत जाने के बावजूद जांच में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।

सीबीआई पर निशाना साधते हुए डीएमके नेता ने कहा कि जांच एजेंसी ने केस को अपने हाथ में ले लिया है, लेकिन विजय के साथ सिर्फ खेल खेलना चाहते हैं। विजय बीजेपी के गुलाम बन चुके हैं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि आगे कोई कार्रवाई होगी। हां, अगर वे बीजेपी के आदेशों को नहीं मानेंगे, तो शायद तब कार्रवाई हो जाए।

27 सितंबर 2025 को हुआ था दर्दनाक हादसा

यह हादसा 27 सितंबर 2025 को टीवीके की सभा के दौरान हुआ था। विजय इस रैली को खुद संबोधित कर रहे थे। इस दर्दनाक हादसे में 41 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। हादसे की पहली बरसी पर विजय ने भी मृतकों को श्रद्धांजलि दी। एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए उन्होंने इस घटना को “एक ऐसा घाव जो कभी नहीं भरता” और “एक ऐसा दर्द जो कभी कम नहीं होता” बताया। साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना भी व्यक्त की।

सुप्रीम कोर्ट में भी चल रही कानूनी लड़ाई

इस भगदड़ मामले की जांच CBI को सौंपी गई है, वहीं पीड़ित परिवारों को राहत देने से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी लगातार जारी है।
अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें तमिलनाडु सरकार के उस फैसले को खारिज कर दिया गया था, जिसके तहत हादसे में मारे गए लोगों के परिवार के पात्र सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि आखिर राज्य सरकार को राहत उपाय के तौर पर रोजगार देने से क्यों रोका जाए, खासकर उन मामलों में जहां मृतक परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य रहा हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *