‘कम वेतन वाले विदेशियों से अमेरिकी कर्मचारियों को रिप्लेस करने के लिए नहीं है वीजा’, H-1B पर JD Vance का बयान

‘कम वेतन वाले विदेशियों से अमेरिकी कर्मचारियों को रिप्लेस करने के लिए नहीं है वीजा’, H-1B पर JD Vance का बयान

JD Vance: अमेरिका में H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर बहस के बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि H-1B वीजा का इस्तेमाल कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों से अमेरिकी कामगारों को रिप्लेस करने के लिए नहीं होना चाहिए। वेंस ने उन कंपनियों पर भी सवाल उठाया, जो पहले बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करती हैं और बाद में H-1B वीजा के जरिए विदेशी कर्मचारियों की मांग करती हैं।

H-1B वीजा को लेकर सरकार का क्या है प्लान?

बिजनेस और टेक्नोलॉजी शो ‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ में वेंस ने बताया कि सरकार H-1B व्यवस्था में बदलाव के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम क्यों उठा रही है। उन्होंने कहा कि सिस्टम में धोखाधड़ी सामने आने के बाद इस पर कार्रवाई की जरूरत महसूस हुई। वेंस ने कहा कि कांग्रेस में इस व्यवस्था को बदलने वाला कानून पास करने की राजनीतिक इच्छा नहीं है। ऐसे में सरकार प्रशासनिक स्तर पर यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि टेक कंपनियां H-1B वीजा का इस्तेमाल सही मायने में बड़ी प्रतिभाओं को अमेरिका लाने के लिए करें।

60 हजार डॉलर की नौकरी की जगह 45 हजार डॉलर वाला विदेशी नहीं

वेंस ने H-1B वीजा के मकसद को समझाते हुए कहा कि इसके जरिए ऐसे लोगों को अमेरिका लाया जाना चाहिए, जो टेक सेक्टर या अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा पहुंचा सकें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 60,000 डॉलर सालाना कमाने वाले किसी अकाउंटेंट की जगह 45,000 डॉलर सालाना वेतन वाले विदेशी अकाउंटेंट को रखना H-1B कार्यक्रम का मकसद नहीं है। उनका कहना है कि इस वीजा का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों को इस तरह से बदलने के लिए नहीं होना चाहिए।

H-1B के लिए 1 लाख डॉलर फीस लगाने की तैयारी

वेंस ने H-1B व्यवस्था में किए जा रहे वित्तीय बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि H-1B वीजा के लिए 1,00,000 डॉलर की फीस लगाने का विचार सामने आया है। इसके साथ ही प्रशासन उन कंपनियों को लेकर भी अलग-अलग तरीके तलाश रहा है, जो H-1B वीजा का इस्तेमाल करने के साथ बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालती हैं।

5 हजार लोगों को निकालने के बाद भी कंपनियां कहती हैं- कर्मचारी नहीं मिल रहे

जेडी वेंस ने कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियां H-1B वीजा के लिए आवेदन करते समय दावा करती हैं कि उन्हें कर्मचारियों की बहुत जरूरत है और उन्हें कामगार नहीं मिल रहे हैं।लेकिन जब ऐसी कंपनियों का पुराना रिकॉर्ड देखा जाता है तो पता चलता है कि उन्होंने पहले ही करीब 5,000 लोगों को नौकरी से निकाल दिया है। वेंस ने इस स्थिति को हास्यास्पद बताया।

अमेरिकियों को निकालकर विदेशी कर्मचारियों की भर्ती क्यों?

वेंस ने कहा कि अगर कोई कंपनी अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही है, तो उसे उनकी जगह लेने के लिए विदेशी कर्मचारियों की तलाश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन कानून के तहत मिली सीमाओं के भीतर इस दिशा में कई कदम उठा रहा है। वेंस ने यह भी बताया कि इन प्रयासों में से कुछ को लेकर सरकार के खिलाफ मुकदमे भी हुए हैं। हालांकि, उनका कहना है कि कानून और नीति दोनों के स्तर पर प्रशासन अपने रुख को सही मानता है।

‘अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाना है मकसद’

वेंस ने आखिर में H-1B कार्यक्रम के उद्देश्य को दोहराते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों के जरिए अमेरिकी कामगारों को बदलने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि H-1B का मकसद अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाना और उसे मजबूत करना होना चाहिए। वेंस के मुताबिक, प्रशासन इसी बात को सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि H-1B वीजा कार्यक्रम अपने इसी उद्देश्य के अनुसार काम करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *