सिगरेट की तय एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने के मामले में अलीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश को चुनौती देने पहुंची आईटीसी लिमिटेड को राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, उत्तर प्रदेश से फिलहाल राहत नहीं मिली है। राज्य आयोग ने कंपनी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें जिला आयोग के आदेश के तहत जमा की जाने वाली राशि के 50 प्रतिशत वैधानिक पूर्व-जमा से छूट मांगी गई थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 41 के तहत जिला आयोग के आदेश में निर्धारित राशि का 50 प्रतिशत जमा किए बिना राज्य आयोग अपील पर विचार नहीं कर सकता। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी। उस दिन अपील की स्वीकार्यता और आगे की कार्रवाई पर आदेश किया जाएगा। क्या है पूरा मामला मामला अलीगढ़ के वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी देवेश गौतम की ओर से उठाए गए उपभोक्ता विवाद से जुड़ा है। आरोप था कि एक दुकानदार द्वारा सिगरेट की 20 रुपये एमआरपी वाली कीमत से अधिक रकम वसूली जा रही थी। इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग, अलीगढ़ ने संबंधित दुकानदार और सिगरेट कंपनी के खिलाफ आदेश पारित किया था। इसी आदेश को आईटीसी लिमिटेड ने राज्य उपभोक्ता आयोग, लखनऊ में चुनौती दी है। आईटीसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खेर ने आयोग के समक्ष दलील दी कि कंपनी ने संबंधित राशि में से 10 लाख रुपये जमा किए हैं, जबकि 5,050 रुपये की राशि जमा किए जाने का भी उल्लेख किया गया। कंपनी का तर्क था कि जिला आयोग के आदेश में उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा की जाने वाली रकम और धारा 41 के तहत अपील के लिए जरूरी वैधानिक पूर्व-जमा को अलग-अलग माना जाना चाहिए। इसी आधार पर 50 प्रतिशत पूर्व-जमा से छूट मांगी गई थी। आयोग ने कहा- कानून में ऐसा कोई अंतर नहीं राज्य आयोग की पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव और सदस्य सुधा उपाध्याय ने मामले की सुनवाई की। आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 41 का हवाला देते हुए कहा कि जिला आयोग के आदेश के तहत किसी व्यक्ति को कोई राशि जमा करनी है तो राज्य आयोग उस अपील पर तब तक विचार नहीं करेगा, जब तक निर्धारित राशि का 50 प्रतिशत जमा न कर दिया जाए। पीठ ने कहा कि धारा 41 में इस्तेमाल की गई भाषा के आधार पर वह कंपनी की ओर से बताए गए अंतर को स्वीकार करने का कोई ठोस आधार नहीं पाती। इसके बाद 50 प्रतिशत रकम जमा करने से छूट की अर्जी को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया गया। ‘यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं, उपभोक्ताओं के अधिकारों की है’ मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे देवेश गौतम ने कहा कि यह लड़ाई केवल उनके व्यक्तिगत मामले तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं से एमआरपी से अधिक कीमत वसूलना उनके अधिकारों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी। अब 23 सितंबर को यह तय होगा कि आईटीसी की अपील आगे किस तरह सुनी जाएगी। इससे पहले कंपनी की ओर से दिल्ली के अधिवक्ताओं ने भी आयोग के समक्ष पैरवी की थी।

