अपनी 9 साल की पालतू डॉग एनी की आंखों की रोशनी बचाने के लिए अमेरिका की नागरिक बेथनी एन हॉपकिंस उसे लेकर श्रीलंका से इंदौर पहुंचीं। एनी को दोनों आंखों में मोतियाबिंद था। आंखों के लेंस में सफेदी आने के कारण उसकी दिखाई देने की क्षमता लगातार कम हो रही थी। श्रीलंका में करीब 5-6 महीने इलाज कराने के बाद भी जब उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो बेथनी ने विशेषज्ञ की तलाश शुरू की। ऑनलाइन कंसल्टेशन के जरिए उन्हें इंदौर में पेट्स की आंखों की सर्जरी करने वाले विशेषज्ञ के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने एनी का इलाज भारत में कराने का फैसला किया। एनी की कैटरैक्ट सर्जरी हो चुकी है। सर्जरी के बाद उसकी आंखों की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है। एनी को ऑपरेशन के बाद करीब 10-15 दिन इंदौर में रखा जाएगा, ताकि रिकवरी और विजन में सुधार की नियमित जांच की जा सके। श्रीलंका में 5-6 महीने इलाज, फिर इंदौर का रास्ता वेटरनरी सर्जन एवं प्रैक्टिसिंग ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट डॉ. नरेंद्र चौहान के मुताबिक, एनी का श्रीलंका में पिछले 5-6 महीनों से इलाज चल रहा था। इलाज के बावजूद जब उसकी आंखों की समस्या दूर नहीं हुई तो उसके मालिकों ने ऑनलाइन कंसल्टेशन लिया। जांच और परामर्श के बाद उन्हें बताया गया कि मोतियाबिंद का समाधान सर्जरी से ही संभव है। इसके बाद बेथनी एनी को लेकर इंदौर पहुंचीं। एनी का मामला इसलिए खास है, क्योंकि वह दूसरे देश से विशेष रूप से कैटरैक्ट सर्जरी के लिए भारत आई है। इसे पेट्स के इलाज में बढ़ते मेडिकल टूरिज्म के उदाहरण के तौर पर भी देखा जा रहा है। अमेरिका के मुकाबले करीब 6 गुना तक कम खर्च भारत में पेट्स की कैटरैक्ट सर्जरी करीब 1 लाख रुपए में हो सकती है, जबकि अमेरिका में इसी तरह की सर्जरी का खर्च करीब 6 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। भारत में इस्तेमाल होने वाली सर्जिकल तकनीक और मशीनें अमेरिका और यूरोप के क्लिनिक्स में इस्तेमाल होने वाली तकनीक के समान हैं। कम खर्च के साथ आधुनिक तकनीक की उपलब्धता भारत को विदेशी पेट ओनर्स के लिए किफायती विकल्प बनाती है। बेथनी के लिए भारत चुनने का एक और कारण श्रीलंका से इसकी कम दूरी रही। श्रीलंका से अमेरिका पहुंचने में करीब 24 घंटे तक का सफर हो सकता है, जबकि भारत की फ्लाइट करीब 3-4 घंटे की है। 9 साल की डॉग के लिए लंबी हवाई यात्रा से बचना भी एक महत्वपूर्ण वजह रही। इंदौर में 2014 से हो रही पेट्स की आंखों की सर्जरी डॉ. चौहान के सेंटर पर वर्ष 2014 से मैनुअल कैटरैक्ट सर्जरी और 2016 से फेको तकनीक के जरिए बिना टांके वाली कैटरैक्ट सर्जरी की जा रही है। पेट्स की आंखों की सर्जरी के लिए देश में विशेषज्ञ और सेंटर अभी भी सीमित हैं। इसी वजह से कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, पुणे, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से लोग अपने पेट्स को इलाज के लिए इंदौर लेकर आ चुके हैं। 13 से ज्यादा देशों के वेट्स ले चुके हैं ट्रेनिंग डॉ. चौहान के मुताबिक, उनके सेंटर पर अब तक 13-14 देशों के वेटरिनेरियंस ट्रेनिंग ले चुके हैं। इनमें श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, यूएई, फिलीपींस, मॉरीशस, मालदीव और बहरीन जैसे देश शामिल हैं। विदेशों से आने वाले वेट्स को पेट्स की आंखों की सर्जरी की तकनीक और उपचार से जुड़ी ट्रेनिंग भी दी जाती है। श्रीलंका के वेटरिनेरियंस के साथ बने इन्हीं प्रोफेशनल संपर्कों के जरिए एनी के इलाज का रेफरल इंदौर तक पहुंचा। इस तरह विदेशी वेट्स की ट्रेनिंग से बने संपर्क का फायदा अब श्रीलंका से इलाज के लिए आई एनी को मिला। सर्जरी के बाद 10-15 दिन इंदौर में रहेगी एनी सर्जरी से पहले एनी की आंखों और संपूर्ण स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जांच की गई। रिपोर्ट अनुकूल आने के बाद कैटरैक्ट लेंस को हटाकर इंट्राऑक्युलर लेंस लगाया गया। ऑपरेशन के बाद नए लेंस के साथ एडजस्ट होने में कुछ दिन लग सकते हैं। ज्यादातर डॉग्स में 4-5 दिन में विजन में सुधार शुरू हो जाता है और करीब 8-10 दिन में रिकवरी बेहतर होने लगती है। एनी को सर्जरी के बाद करीब 10-15 दिन इंदौर में रखा जाएगा। इस दौरान उसकी आंखों की स्थिति और विजन की नियमित निगरानी होगी। रिकवरी संतोषजनक रहने के बाद बेथनी उसे वापस श्रीलंका ले जाएंगी। विदेश से पेट लाने के लिए अनुमति जरूरी किसी पालतू जानवर को इलाज के लिए विदेश से भारत लाने के लिए निर्धारित सरकारी अनुमति और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसमें पेट की बीमारी, प्रस्तावित मेडिकल ट्रीटमेंट और इलाज करने वाले डॉक्टर व सेंटर से संबंधित दस्तावेज शामिल होते हैं। अनुमति मिलने के बाद ही पेट को भारत लाया जा सकता है। एनी के मामले में भी बेथनी ने जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे श्रीलंका से इंदौर लाया।

