बेंगलुरु की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) ने उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट’ की स्क्रीनिंग टाल दी है। यह डॉक्यूमेंट्री ललित वाचानी ने बनाई है। स्क्रीनिंग 14 सितंबर को यूनिवर्सिटी में होनी थी। NLSIU की एंड सोसाइटी कमेटी (LawSoc) ने स्क्रीनिंग टालने के पीछे ‘लॉजिस्टिक और सुरक्षा संबंधी कारणों’ का हवाला दिया। दरअसल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शनिवार को NLSIU मैनेजमेंट से स्क्रीनिंग रद्द करने की मांग की थी। दिल्ली दंगे का आरोपी उमर खालिद JNU का पूर्व छात्र है। वह सितंबर 2020 से तिहाड़ जेल में बंद है। दिल्ली में फरवरी, 2020 में हिंसा भड़की थी। इसमें 53 लोगों की मौत हुई थी। उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री से जुड़ा विवाद, 5 सवाल-जवाब में समझें… सवाल: उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग कौन आयोजित कर रहा था?
जवाब: NLSIU का छात्र संगठन लॉ एंड सोसाइटी कमेटी इस स्क्रीनिंग का आयोजन कर रही थी। यह यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था। सवाल: 14 सितंबर को ही स्क्रीनिंग क्यों होनी थी?
जवाब: 13 सितंबर को राजनितिक कैदी दिवस मनाया जाता है। यह भगत सिंह के साथी यतींद्र नाथ दास की पुण्यतिथि से जुड़ा है, जिनकी 1929 में भूख हड़ताल के दौरान मौत हुई थी। इस अवसर पर एक दिन बाद सोमवार को डॉक्यूमेंट्री दिखाई जानी थी क्योंकि रविवार को छुट्टी रहती है। सवाल: ABVP ने स्क्रीनिंग का विरोध क्यों किया?
जवाब: ABVP का आरोप है कि शैक्षणिक परिसरों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार या नागरिक अशांति के महिमामंडन के लिए नहीं होना चाहिए। सवाल: क्या NLSIU में यह डॉक्यूमेंट्री पहली बार दिखाई जा रही थी?
जवाब: यह डॉक्यूमेंट्री 2023 में बनी थी। कुछ छात्रों का दावा है कि पिछले साल भी इसे राजनीतिक कैदियों के दिवस के अवसर पर दिखाया गया था। हालांकि तब विवाद सामने नहीं आया था। सवाल: क्या इससे पहले भी उमर खालिद से जुड़ा कोई कार्यक्रम विवाद में रहा है?
जवाब: अप्रैल 2026 में BJP ने बेंगलुरु के बैंगलोर इंटरनेशनल सेंटर में होने वाले ‘उमर खालिद एंड हिज वर्ल्ड’ कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि कार्यक्रम रद्द नहीं हुआ था। कैंपस में फिल्म/डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग के नियम क्या हैं पूर्व अनुमति जरूरी: स्क्रीनिंग या किसी कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की लिखित अनुमति लेनी होती है। सुरक्षा और व्यवस्था: अनुमति देते समय कैंपस की सुरक्षा, शांति और कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है। कार्यक्रम रद्द या स्थगित: विवाद, तनाव या शैक्षणिक माहौल प्रभावित होने की आशंका पर प्रशासन स्क्रीनिंग रोक सकता है। कॉपीराइट नियम: फिल्म दिखाने के लिए आवश्यक कॉपीराइट या पब्लिक परफॉर्मेंस लाइसेंस का पालन करना होता है। शैक्षणिक उद्देश्य: फिल्म की स्क्रीनिंग को पाठ्यक्रम, कानूनी-सामाजिक मुद्दों या अकादमिक चर्चा से जुड़ा होना चाहिए। उमर खालिद पर दंगे के आरोप अभी साबित नहीं हुए उमर खालिद पर दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश, आपराधिक साजिश और UAPA के तहत आरोप हैं। ये अभियोजन पक्ष के आरोप हैं और अदालत में अभी साबित नहीं हुए हैं। उमर खालिद ने आरोपों से इनकार किया है। 6 साल पहले दिल्ली में CAA को लेकर तनाव बढ़ा, दंगा हुआ फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तनाव बढ़ा। 23–26 फरवरी के बीच कई इलाकों में दंगे, आगजनी और पथराव हुआ। हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए। घरों, दुकानों, वाहनों और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचा। दिल्ली पुलिस ने कुछ लोगों पर दंगों की कथित बड़ी साजिश रचने, प्रदर्शनकारियों को जुटाने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। —————————— ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- उमर खालिद को बेल मिल सकती थी: कहा- जमानत अधिकार है, जेल अपवाद कोर्ट ने कहा खालिद की जमानत याचिका खारिज करते समय कोर्ट ने इस फैसले पर ध्यान नहीं दिया था। 2019 से 2023 के बीच पूरे भारत में UAPA मामलों में सिर्फ 1.5%-4% लोगों को सजा हुई। यानी लगभग 94% मामलों में बरी होने की संभावना होती है। पूरी खबर पढ़ें…
उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग टली:बेंगलुरु में नेशनल लॉ स्कूल में कल दिखाई जानी थी, ABVP ने विरोध किया था

