उन्नाव-लखनऊ रेल लाइन की उम्मीद जगी:राज्यसभा में सांसद संजय सेठ ने उठाया मुद्दा, 2012-13 में हुआ था परियोजना का सर्वेक्षण

उन्नाव-लखनऊ रेल लाइन की उम्मीद जगी:राज्यसभा में सांसद संजय सेठ ने उठाया मुद्दा, 2012-13 में हुआ था परियोजना का सर्वेक्षण

उन्नाव से पुरवा और मौरावां होते हुए लखनऊ तक रेल कनेक्टिविटी की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। मंगलवार को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद क्षेत्र के लोगों में परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है। मौरावां नगर पंचायत अध्यक्ष कुंवर विवेक सेठ ने बताया कि राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने प्रश्नकाल के दौरान इस रेल परियोजना से जुड़ा सवाल उठाया है। कुंवर विवेक सेठ के अनुसार, उन्नाव-पुरवा-मौरावां-लखनऊ रेल लाइन क्षेत्र की पुरानी और महत्वपूर्ण मांग है। परियोजना का सर्वेक्षण करीब 2012-13 में कराया गया था। सर्वेक्षण पूरा होने और बजट प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद योजना लंबे समय से लंबित है। उन्होंने बताया कि परियोजना की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने राज्यसभा सांसद संजय सेठ को पत्र लिखकर मामले को सदन में उठाने और रेल परियोजना को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके बाद सांसद ने प्रश्नकाल में इस मुद्दे को उठाया। कुंवर विवेक सेठ ने उम्मीद जताई कि अब संबंधित विभाग स्तर पर परियोजना को लेकर आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद संभव है कि यह मांग बाद में आने वाले जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में प्रमुखता से नहीं रही हो। जानकारी मिलने के बाद इसे दोबारा उठाने का प्रयास किया गया है। किसानों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को मिलेगा लाभ कुंवर विवेक सेठ ने कहा कि रेल लाइन बनने से मौरावां और पुरवा क्षेत्र के किसानों, छात्रों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्नाव और लखनऊ के बीच आवागमन आसान होने के साथ सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी। इससे लोगों के समय और यात्रा खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है।
रजबहा नहर और डाक बंगले का मुद्दा भी उठाया नगर पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि रेल लाइन के अलावा क्षेत्र की रजबहा नहर को दोबारा चालू कराने की मांग भी उठाई गई है। यह नहर हरदोई से होकर रायबरेली की ओर जाती है और लंबे समय से बंद बताई जा रही है। नहर का संचालन शुरू होने से किसानों को सिंचाई में लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही क्षेत्र के जर्जर डाक बंगले की मरम्मत या पुनर्निर्माण की मांग भी रखी गई है। उनका कहना है कि डाक बंगला लंबे समय से खराब स्थिति में है और इसकी मरम्मत की आवश्यकता है। ट्रेनों की संख्या पर बोले- वायबिलिटी देखकर तय होता है संचालन प्रेस कॉन्फ्रेंस में लखनऊ-कानपुर रेल मार्ग पर लोकल ट्रेनों की संख्या कम होने और भविष्य में नई रेल लाइन पर भी ऐसी स्थिति बनने को लेकर सवाल किया गया। इस पर कुंवर विवेक सेठ ने कहा कि ट्रेनों के संचालन में यात्रियों की संख्या और वायबिलिटी को ध्यान में रखा जाता है। सरकार को विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च करना होता है, इसलिए जरूरत और यात्रियों की संख्या के आधार पर ट्रेनों का संचालन तय किया जाता है। उन्होंने कहा कि सुबह और शाम ट्रेन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को काफी सुविधा मिल सकती है। सुबह लोग अपने शिक्षण संस्थान और कार्यस्थल जाते हैं और शाम को वापस लौटते हैं। हालांकि उन्होंने ट्रेन संचालन से जुड़े निर्णय को रेलवे विभाग का विषय बताया। राज्यसभा में रेल परियोजना का मुद्दा उठाए जाने के बाद कुंवर विवेक सेठ ने उम्मीद जताई कि संबंधित स्तर पर जल्द कार्रवाई आगे बढ़ेगी। अब क्षेत्रीय लोगों की निगाहें सरकार और रेल मंत्रालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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उन्नाव-लखनऊ रेल लाइन की उम्मीद जगी:राज्यसभा में सांसद संजय सेठ ने उठाया मुद्दा, 2012-13 में हुआ था परियोजना का सर्वेक्षण

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उन्नाव से पुरवा और मौरावां होते हुए लखनऊ तक रेल कनेक्टिविटी की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। मंगलवार को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद क्षेत्र के लोगों में परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है। मौरावां नगर पंचायत अध्यक्ष कुंवर विवेक सेठ ने बताया कि राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने प्रश्नकाल के दौरान इस रेल परियोजना से जुड़ा सवाल उठाया है। कुंवर विवेक सेठ के अनुसार, उन्नाव-पुरवा-मौरावां-लखनऊ रेल लाइन क्षेत्र की पुरानी और महत्वपूर्ण मांग है। परियोजना का सर्वेक्षण करीब 2012-13 में कराया गया था। सर्वेक्षण पूरा होने और बजट प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद योजना लंबे समय से लंबित है। उन्होंने बताया कि परियोजना की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने राज्यसभा सांसद संजय सेठ को पत्र लिखकर मामले को सदन में उठाने और रेल परियोजना को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके बाद सांसद ने प्रश्नकाल में इस मुद्दे को उठाया। कुंवर विवेक सेठ ने उम्मीद जताई कि अब संबंधित विभाग स्तर पर परियोजना को लेकर आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद संभव है कि यह मांग बाद में आने वाले जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में प्रमुखता से नहीं रही हो। जानकारी मिलने के बाद इसे दोबारा उठाने का प्रयास किया गया है। किसानों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को मिलेगा लाभ कुंवर विवेक सेठ ने कहा कि रेल लाइन बनने से मौरावां और पुरवा क्षेत्र के किसानों, छात्रों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्नाव और लखनऊ के बीच आवागमन आसान होने के साथ सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी। इससे लोगों के समय और यात्रा खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है।
रजबहा नहर और डाक बंगले का मुद्दा भी उठाया नगर पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि रेल लाइन के अलावा क्षेत्र की रजबहा नहर को दोबारा चालू कराने की मांग भी उठाई गई है। यह नहर हरदोई से होकर रायबरेली की ओर जाती है और लंबे समय से बंद बताई जा रही है। नहर का संचालन शुरू होने से किसानों को सिंचाई में लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही क्षेत्र के जर्जर डाक बंगले की मरम्मत या पुनर्निर्माण की मांग भी रखी गई है। उनका कहना है कि डाक बंगला लंबे समय से खराब स्थिति में है और इसकी मरम्मत की आवश्यकता है। ट्रेनों की संख्या पर बोले- वायबिलिटी देखकर तय होता है संचालन प्रेस कॉन्फ्रेंस में लखनऊ-कानपुर रेल मार्ग पर लोकल ट्रेनों की संख्या कम होने और भविष्य में नई रेल लाइन पर भी ऐसी स्थिति बनने को लेकर सवाल किया गया। इस पर कुंवर विवेक सेठ ने कहा कि ट्रेनों के संचालन में यात्रियों की संख्या और वायबिलिटी को ध्यान में रखा जाता है। सरकार को विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च करना होता है, इसलिए जरूरत और यात्रियों की संख्या के आधार पर ट्रेनों का संचालन तय किया जाता है। उन्होंने कहा कि सुबह और शाम ट्रेन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को काफी सुविधा मिल सकती है। सुबह लोग अपने शिक्षण संस्थान और कार्यस्थल जाते हैं और शाम को वापस लौटते हैं। हालांकि उन्होंने ट्रेन संचालन से जुड़े निर्णय को रेलवे विभाग का विषय बताया। राज्यसभा में रेल परियोजना का मुद्दा उठाए जाने के बाद कुंवर विवेक सेठ ने उम्मीद जताई कि संबंधित स्तर पर जल्द कार्रवाई आगे बढ़ेगी। अब क्षेत्रीय लोगों की निगाहें सरकार और रेल मंत्रालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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