उत्तराखंड MBBS फर्जीवाड़ा: भोपाल का एजेंट धीरज गिरफ्तार, 5.5 लाख रुपये नकद बरामद

उत्तराखंड MBBS फर्जीवाड़ा: भोपाल का एजेंट धीरज गिरफ्तार, 5.5 लाख रुपये नकद बरामद

उत्तराखंड में सामने आए एमबीबीएस प्रवेश फर्जीवाड़ा के संबंध में पुलिस ने बृहस्पतिवार को एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने कहा कि इसी के साथ मास्टरमाइंड सहित फर्जीवाड़े में संलिप्त तीन आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी हो चुकी है।

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने यहां संवाददाताओं को बताया कि फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाकर ‘नीट यूजी’ के जरिए प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने के प्रकरण की विवेचना कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने यहां धीरज कुमार श्रीवास्तव (37) को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि भोपाल के पिपलानी क्षेत्र के रहने वाले श्रीवास्तव का नाम तीन दिन पहले गिरफ्तार किए फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड रूपेश पंडित से पूछताछ में एक एजेंट के तौर पर सामने आया था। उन्होंने बताया कि श्रीवास्तव के वाहन की तलाशी के दौरान उसमें करीब साढ़े पांच लाख रुपए नकद भी बरामद किए गए हैं जो उसे पंडित से स्वतंत्रता सेनानी कोटे से विद्यार्थियों को एमबीबीएस में दाखिला कराने के एवज में मिले थे।

एसआईटी द्वारा गिरफ्तार किये गये एक व्यक्ति का नाम अरविंद कुमार है जो स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से प्रवेश पानी वाली परी नाम के अभ्यर्थी का पिता है। डोबाल ने बताया कि पूछताछ में श्रीवास्तव ने बताया कि उसका पिपलानी में एमबीबीएस वे नामक एक कार्यालय है जिसके माध्यम से वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए, बीकॉम आदि पाठ्यक्रमों में कमीशन पर दाखिला दिलाने का काम करता है। पुलिस के मुताबिक श्रीवास्तव की पंडित से दो साल पहले उत्तरकाशी में मुलाकात हुई थी जिसके बाद से ही दोनों आरोपी एक दूसरे के संपर्क में रहे।

एसएसपी ने बताया कि अपनी बेटी तथा अपने दो अन्य परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस में दाखिले के लिए कुमार द्वारा पंडित से संपर्क किए जाने के बाद उसने आगे श्रीवास्तव से इस संबंध में बात की। डोबाल के मुताबिक श्रीवास्तव ने इस बारे में एक अन्य व्यक्ति से बात की जिसने उन्हें उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी कोटे में दाखिले के बारे में जानकारी देते हुए अपने एक ऐसे परिचित से मिलने के लिए बुलाया जिनकी तहसील और कचहरी में अच्छी सेटिंग थी। डोबाल ने बताया कि इसके बाद श्रीवास्तव ने पंडित तथा अन्य साथियों के साथ मिलकर कथित तौर पर तीन अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनावाये जिनके आधार पर उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस में दाखिला प्राप्त किया।

उन्होंने कहा कि एसआईटी प्रकरण से जुडे सभी पहलुओं की गहनता से विवेचना कर रही है और इससे जुड़े सभी आरोपियों के विरूद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने बताया कि देहरादून के रायपुर और क्लेमेंटाउन थानों में 13 सितंबर को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा अपनी सरकार पोर्टल पर स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने तथा जांच के दौरान उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये दस्तावेज फर्जी पाये जाने के संबंध में मुकदमे दर्ज कराए गए थे। उन्होंने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए देहरादून की पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गयी जिसकी प्रारंभिक जांच में आरोपी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में अंकित पते गलत पाये गये।

इसके बाद एसआईटी ने संबधित शिक्षण संस्थानों में जाकर आरोपियों से जुड़े सभी दस्तावेजों को कब्जे में लेकर उनके मूल पतों की जानकारी जुटाई। एसएसपी ने बताया कि विवेचना के दौरान मिले सबूतों के आधार पर 21 सितंबर को पंडित और कुमार को गिरफ्तार किया गया। आरोपी रूपेश ने पूछताछ में बताया कि प्रत्येक अभ्यर्थी को एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के एवज में 45 लाख रुपए में सौदा तय हुआ था जिसमें से 20 लाख रुपए अग्रिम लिए गए थे।

उन्होंने बताया कि रूपेश की निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्थित उसके घर से फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के एवज में लिये गये आठ लाख रूपए बरामद किए गए।

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