US-Iran War: ईरान के साथ जारी युद्ध से अमेरिका की सैन्य क्षमता और हथियारों के भंडार में काफी कमी आई है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में उसकी सैन्य एवं कूटनीतिक मौजूदगी पर भी गंभीर दवाब डाला है। इसको लेकर अमेरिकी सरकार के एक नए वॉचडॉग रिपोर्ट में युद्ध के प्रभाव का अब तक का सबसे विस्तृत आधिकारिक आकलन सामने आया है।
दरअसल, यह रिपोर्ट पेंटागन, अमेरिकी विदेश विभाग और यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) के इंस्पेक्टर जनरल कार्यालयों ने संयुक्त रूप से तैयार की है। इसमें 1 अप्रैल से 30 जून तक की स्थिति का आकलन किया गया है।
जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकानों, रणनीतिक हथियारों के भंडार, आपूर्ति श्रृंखला और राजनयिक परिसरों को हुए नुकसान का विवरण दिया गया है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि अमेरिका को मिसाइल और इंटरसेप्टर के स्टॉक को लड़ाई से पहले के लेवल पर लाने में तीन साल तक लग सकते हैं।
हथियारों के भंडार पर दबाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका के उन्नत हथियारों और मिसाइलों के भंडार पर दबाव पड़ा है। युद्ध के कारण रणनीतिक हथियारों के भंडार में कमी आई है और मिसाइलों की दोबारा आपूर्ति में अमेरिकी रक्षा उद्योग की क्षमता से जुड़ी कई अड़चनें सामने आई हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का पहले अनुमान रहा है कि अमेरिकी रक्षा कंपनियों को इन हथियारों और इंटरसेप्टर के भंडार को संघर्ष से पहले के स्तर तक पहुंचाने में करीब तीन साल तक लग सकते हैं।
हालांकि, पेंटागन का कहना है कि अमेरिकी सेना के पास क्षेत्र में अभियान जारी रखने के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता मौजूद है। इसके बावजूद वॉचडॉग रिपोर्ट ने अमेरिकी रक्षा औद्योगिक आधार पर पड़ रहे दबाव को उजागर किया है।
पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी हमलों से पश्चिम एशिया में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों इमारतें क्षतिग्रस्त और नष्ट हुई है।
ईरान ने बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक लॉजिस्टिक्स हब को भी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया था। हमलों के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड को कुछ आपूर्ति मार्गों को बदलना पड़ा।
दर्जनों विमान और ड्रोन प्रभावित
ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिकी सैन्य विमानों और ड्रोन को भी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक, दर्जनों अमेरिकी विमान और ड्रोन नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए। इनमें करीब 30 MQ-9 Reaper ड्रोन शामिल हो सकते हैं। प्रत्येक ड्रोन की अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़ डॉलर बताई गई है।
इसके अलावा कई KC-135 टैंकर विमानों को भी नुकसान पहुंचा। इनमें कुछ विमान सऊदी अरब में जमीन पर खड़े होने के दौरान हमलों की चपेट में आए। इन नुकसान ने अमेरिकी सैन्य उपकरणों के भंडार पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर दिया है।
अमेरिकी राजनयिक परिसरों को भी नुकसान
ईरान संघर्ष का असर अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों तक ही सीमित नहीं रहा। अमेरिकी राजनयिक परिसरों को भी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और UAE में अमेरिकी राजनयिक परिसरों को पहले सार्वजनिक नहीं किए गए नुकसान का सामना करना पड़ा। इन संपत्तियों को हुए नुकसान की कुल अनुमानित कीमत करीब 18.4 करोड़ डॉलर बताई गई है।


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US Department of War Inspector General: Cost of potential war with Iran reached approximately $33.4 billion by June 30; “Epic Fury” operations have created ammunition shortages and supply chain bottlenecks. (IRIB News)