इक्वाडोर के मछुआरे अब दो आग के बीच फंसे हैं। एक तरफ ड्रग गिरोह धमकियां दे रहे हैं, दूसरी तरफ अमेरिकी हमले उनकी जान ले रहे हैं। मार्च में मछुआरे सिमोन विलाक्रेस अपनी नाव नेग्रा फ्रांसिस्का दुआर्ते II पर काम कर रहे थे। अचानक ऊपर से ड्रोन की आवाज आई और गैली के पास धमाका हो गया। नाव में आग लग गई। कुछ लोग समुद्र में कूद पड़े, बाकी छोटी नावों में भाग निकले।
वे पास की ट्यूना नाव समझकर पहुंचे तो अंग्रेजी बोलने वाले सशस्त्र लोग मिल गए। उन्होंने बंदूकें तान दीं, सिर पर टोपी डाल दी और हाथ बांध दिए। बाद में साल्वाडोर की नौसेना ने उन्हें बचाया और घर पहुंचाया। सिमोन अभी तक समुद्र में वापस नहीं गए।
मछुआरे ने क्या कहा?
मछुआरे ने कहा- शायद मैंने मछली पकड़ना हमेशा के लिए छोड़ दिया। ऐसे ही एक और हमला डॉन माका नाव पर हुआ। एक तीसरी नाव फियोरेला के कई मछुआरे जनवरी से लापता हैं।
स्थानीय मानवाधिकार समूह और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ये हमले अमेरिकी अभियान का हिस्सा लगते हैं। अमेरिका ने अब तक 67 नावें नष्ट की हैं और 220 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा किया है।
क्यों मजबूर हुए मछुआरे?
उधर, मनाबी प्रांत के छोटे बंदरगाहों में लॉस चोनेरोस और लॉस लोबोस जैसे गिरोह हावी हो गए हैं। ये मेक्सिकन कार्टेल से जुड़े हैं। मछुआरों से जबरन 1200 डॉलर फीस वसूली जाती है, जो उनके महीने की कमाई से कई गुना ज्यादा है। नहीं दिया तो परिवार पर हमला होता है।
वहीं, नाव से अगर ड्रग ले जाएं तो एक ट्रिप में 40 हजार डॉलर तक मिल सकता है। कई लोग रात को निकलते हैं या रास्ता बदलते हैं। एक मछुआरे ने चार बार फीस दी। गिरोह ने रास्ता बताया और लाइट जलाने को कहा ताकि दोबारा न रोका जाए।
सरकारों का अभियान और असर
अमेरिका, इक्वाडोर और साल्वाडोर मिलकर समुद्र में नशीले पदार्थों के खिलाफ काम कर रहे हैं। बड़े जब्ती के दावे हो रहे हैं लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे तस्करी नहीं रुकेगी। ज्यादातर कोकीन अभी भी बड़े बंदरगाहों से जाती है।
गरीब मछुआरों को इस्तेमाल करना आसान है क्योंकि गिरोह के लिए हर कोई बदला जा सकता है। स्थानीय लोग कहते हैं कि अब मछुआरे समुद्र में जाने से डरते हैं।



INVESTIGACIÓN VINCULA A LA CIA CON ATAQUES CONTRA PESQUEROS ECUATORIANOS CERCA DE GALÁPAGOS