INDIA Bloc Meeting: दिल्ली में बुधवार को INDIA गठबंधन की साढ़े तीन घंटे लंबी बैठक हुई। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि पूरा विपक्ष चुनावी निष्पक्षता बनाए रखने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट है। गठबंधन ने 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देशव्यापी सेव डेमोक्रेसी मार्च आयोजित करने का फैसला किया है। इस विरोध प्रदर्शन के तहत, विपक्षी गठबंधन के सभी सांसद 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक पैदल मार्च करेंगे।
पीएम मोदी और अमित शाह चोरी से जीत रहे चुनाव- खरगे
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि देश में चुनाव चुराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह चोरी करवा रहे हैं और इसी रास्ते से चुनाव जीत रहे हैं। चुनाव आयोग एक निष्पक्ष अंपायर की जगह सरकार का मददगार बनकर रह गया है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘हमने देश के युवाओं, आम जनता और गठबंधन के कार्यकर्ताओं को एक स्पष्ट रोडमैप दिया है। हम 2 से 8 अक्टूबर तक देश भर में सेव डेमोक्रेसी मार्च निकालेंगे और 6 अक्टूबर को विपक्षी दलों के सभी सांसद मिलकर चुनाव आयोग का घेराव करेंगे।”
INDIA गठबंधन की मुख्य मांगें
- आने वाले सभी चुनावों के लिए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) से पहले की मौजूदा वोटर लिस्ट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
- वोटर लिस्ट से किसी नागरिक का नाम हटाने से पहले, उन्हें असरदार अपील करने का ज़रूरी अधिकार दिया जाना चाहिए।
- प्रशासनिक चूक या मनमाने फैसलों की वजह से किसी भी योग्य नागरिक का नाम लिस्ट से नहीं हटाया जाना चाहिए।
- चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बहाल करने के लिए चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए।
- 18 साल की उम्र पूरी करने वाले नए वोटरों के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पारदर्शी, सुलभ और आसान बनाई जानी चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
खरगे ने कहा कि SIR के नाम पर देश भर में वोटर लिस्ट से 13.3 करोड़ वैध वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे उन्हें लोकतंत्र में हिस्सा लेने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है। अगर नाम हटाए गए हैं, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि किसके नाम हटाए गए और क्यों।
खरगे ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की पोल खुल गई है। उनके दो साथी चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार पत्र लिखकर सवाल उठाए हैं। अगर उनमें जरा भी संवैधानिक या नैतिक गरिमा बची है, तो उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और वोटर लिस्ट में हेरफेर के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सरकारी गवाह बन जाना चाहिए।

