आवारा कुत्तों की नसबंदी और इलाज के लिए सेंटर बनेगा:डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से निर्माण; 100 कुत्तों को रखने की व्यवस्था, ऑपरेशन थिएटर होगा

आवारा कुत्तों की नसबंदी और इलाज के लिए सेंटर बनेगा:डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से निर्माण; 100 कुत्तों को रखने की व्यवस्था, ऑपरेशन थिएटर होगा

मुंगेर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ रहा है। गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक लोगों को कुत्तों के झुंड से बचकर निकलना पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर बनाने की पहल की है। वार्ड संख्या 40 में प्रस्तावित इस सेंटर में आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और इलाज की सुविधा मिलेगी।

यहां 100 कुत्तों को रखने की व्यवस्था होगी। नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले एक महीने में संबंधित कार्य पूरा होने की संभावना है। सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा तो वर्ष 2026 के अंत तक शहर में यह सुविधा शुरू हो सकती है। ऑपरेशन थिएटर और प्रशिक्षित सर्जन रहेंगे नगर आयुक्त ने बताया कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और विभागीय स्तर पर चल रही प्रक्रिया के तहत एबीसी सेंटर की योजना तैयार की गई है। सेंटर में ऑपरेशन थिएटर बनाया जाएगा, जहां जरूरत पड़ने पर कुत्तों की नसबंदी और बीमार या घायल पशुओं का इलाज किया जा सकेगा। इसके लिए प्रशिक्षित सर्जन और अन्य कर्मियों की तैनाती होगी। सेंटर के संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। नगर निगम के अनुसार, सेंटर के निर्माण के साथ एजेंसी का चयन और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की स्वीकृति मिलने के बाद योजना शुरू करने की तैयारी है। यह सुविधा पूरे नगर निगम क्षेत्र के लोगों के लिए उपयोगी होगी। जरूरत पड़ने पर पालतू कुत्तों के इलाज की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। असरगंज में एक कुत्ते ने 28 लोगों को काटा आवारा कुत्तों का आतंक सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी लोग इनके हमले का शिकार हो रहे हैं। मंगलवार को असरगंज प्रखंड में एक कुत्ते ने 28 लोगों को काटकर घायल कर दिया। सभी घायलों का असरगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज चल रहा है। मुंगेर शहर में कोतवाली थाना के समीप आवारा कुत्तों का जमावड़ा रहता है। इसके अलावा नगर निगम के सभी 45 वार्डों में भी लोग इस समस्या से परेशान हैं। खासकर देर शाम दुकान, रेलवे स्टेशन या अस्पताल से घर लौटने वाले लोगों को रास्ते में कुत्तों के हमले का डर सताता है। कई बार कुत्तों से बचकर भागने के दौरान लोग सड़क पर गिरकर भी घायल हो जाते हैं। 28 दिन में 685 लोगों ने सदर अस्पताल में ली रेबीज की सुई भास्कर की पड़ताल के मुताबिक, सदर अस्पताल में 1 से 28 अक्टूबर के बीच 685 लोगों ने रेबीज से बचाव की सुई ली। स्वास्थ्यकर्मी दयानंद से मिले आंकड़ों के अनुसार, इनमें अधिकांश मरीज कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे। इस हिसाब से सदर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 24 से अधिक लोगों ने रेबीज का टीका लिया। वहीं, जिले के मुंगेर सदर, जमालपुर, धरहरा, बरियारपुर, हवेली खड़गपुर, टेटिया बंबर, संग्रामपुर, तारापुर और असरगंज सहित विभिन्न प्रखंडों के अस्पतालों में भी कुत्ते के काटने के मरीज पहुंच रहे हैं। इन केंद्रों पर प्रतिदिन पांच से अधिक मरीजों के पहुंचने की जानकारी दी गई है। मुंगेर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ रहा है। गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक लोगों को कुत्तों के झुंड से बचकर निकलना पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर बनाने की पहल की है। वार्ड संख्या 40 में प्रस्तावित इस सेंटर में आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और इलाज की सुविधा मिलेगी।

यहां 100 कुत्तों को रखने की व्यवस्था होगी। नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले एक महीने में संबंधित कार्य पूरा होने की संभावना है। सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा तो वर्ष 2026 के अंत तक शहर में यह सुविधा शुरू हो सकती है। ऑपरेशन थिएटर और प्रशिक्षित सर्जन रहेंगे नगर आयुक्त ने बताया कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और विभागीय स्तर पर चल रही प्रक्रिया के तहत एबीसी सेंटर की योजना तैयार की गई है। सेंटर में ऑपरेशन थिएटर बनाया जाएगा, जहां जरूरत पड़ने पर कुत्तों की नसबंदी और बीमार या घायल पशुओं का इलाज किया जा सकेगा। इसके लिए प्रशिक्षित सर्जन और अन्य कर्मियों की तैनाती होगी। सेंटर के संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। नगर निगम के अनुसार, सेंटर के निर्माण के साथ एजेंसी का चयन और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की स्वीकृति मिलने के बाद योजना शुरू करने की तैयारी है। यह सुविधा पूरे नगर निगम क्षेत्र के लोगों के लिए उपयोगी होगी। जरूरत पड़ने पर पालतू कुत्तों के इलाज की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। असरगंज में एक कुत्ते ने 28 लोगों को काटा आवारा कुत्तों का आतंक सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी लोग इनके हमले का शिकार हो रहे हैं। मंगलवार को असरगंज प्रखंड में एक कुत्ते ने 28 लोगों को काटकर घायल कर दिया। सभी घायलों का असरगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज चल रहा है। मुंगेर शहर में कोतवाली थाना के समीप आवारा कुत्तों का जमावड़ा रहता है। इसके अलावा नगर निगम के सभी 45 वार्डों में भी लोग इस समस्या से परेशान हैं। खासकर देर शाम दुकान, रेलवे स्टेशन या अस्पताल से घर लौटने वाले लोगों को रास्ते में कुत्तों के हमले का डर सताता है। कई बार कुत्तों से बचकर भागने के दौरान लोग सड़क पर गिरकर भी घायल हो जाते हैं। 28 दिन में 685 लोगों ने सदर अस्पताल में ली रेबीज की सुई भास्कर की पड़ताल के मुताबिक, सदर अस्पताल में 1 से 28 अक्टूबर के बीच 685 लोगों ने रेबीज से बचाव की सुई ली। स्वास्थ्यकर्मी दयानंद से मिले आंकड़ों के अनुसार, इनमें अधिकांश मरीज कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे। इस हिसाब से सदर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 24 से अधिक लोगों ने रेबीज का टीका लिया। वहीं, जिले के मुंगेर सदर, जमालपुर, धरहरा, बरियारपुर, हवेली खड़गपुर, टेटिया बंबर, संग्रामपुर, तारापुर और असरगंज सहित विभिन्न प्रखंडों के अस्पतालों में भी कुत्ते के काटने के मरीज पहुंच रहे हैं। इन केंद्रों पर प्रतिदिन पांच से अधिक मरीजों के पहुंचने की जानकारी दी गई है।  

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