आयरलैंड के डेटा प्रोटेक्शन कमीशन ने गूगल पर 403 मिलियन यूरो यानी करीब 4600 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगा दिया है। यह सजा कंपनी के लोकेशन डेटा प्रोसेसिंग के तरीके को लेकर आई है।
यूरोपीय नियमों के मुताबिक यह जीडीपीआर का चौथा सबसे बड़ा जुर्माना माना जा रहा है। यह फैसला सोमवार को जारी किया गया। आयरिश रेगुलेटर ने साफ कहा कि Google ने यूजर्स के लोकेशन डेटा को सही सहमति के बिना इस्तेमाल किया। कंपनी के पैरेंट अल्फाबेट को यह रकम चुकानी होगी।
नॉर्वे की पुरानी शिकायत से शुरू हुआ मामला
पूरा मामला 2018 से जुड़ा है। उस साल नॉर्वे के उपभोक्ता परिषद ने एक रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि गूगल Android फोन यूजर्स को धोखा देकर लोकेशन ट्रैकिंग की अनुमति लेता है।
यूजर्स को पूरा पता नहीं चलता कि उनका डेटा कितना और कैसे इकट्ठा हो रहा है। आठ साल बाद आयरलैंड के डेटा प्रोटेक्शन कमीशन ने जांच पूरी की और जुर्माना तय किया।
पहली बार आयरिश कमीशन ने लिया गूगल पर एक्शन
आयरलैंड में गूगल का यूरोपीय मुख्यालय होने के कारण यही संस्था पूरे यूरोप के लिए लीड रेगुलेटर है। यह पहली बार है जब आयरिश कमीशन ने गूगल पर जुर्माना लगाया है।
कमीशन के पास कंपनी से जुड़े तीन और बड़े मामले अभी भी चल रहे हैं। जुर्माना अभी फाइनल नहींआयरिश अधिकारी ने बताया कि यह फैसला अपील किया जा सकता है। इसलिए अभी यह पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।
गूगल ने अब तक नहीं दिया जवाब
इस मामले में गूगल से प्रतिक्रिया मांगी गई है, लेकिन कंपनी की तरफ से अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। नॉर्वे के उपभोक्ता परिषद की निदेशक मेट फोसम ने इस फैसले को डिजिटल अधिकारों की लड़ाई में बड़ी जीत बताया है।
उन्होंने कहा कि गूगल को अब समझना होगा कि यूजर्स को गुमराह करके डेटा इकट्ठा करना आसान नहीं रहेगा। लोगों को साफ-साफ पता होना चाहिए कि वे किस चीज के लिए हां कह रहे हैं।
टेक्नोलॉजी कंपनियों पर लगातार दबाव
इस साल गूगल और मेटा दोनों पर कई बड़े जुर्माने लगाए जा चुके हैं। प्राइवेसी नियमों का उल्लंघन करने पर यूरोपीय देश सख्त रुख अपना रहे हैं। यूजर्स के फोन लोकेशन, सर्च हिस्ट्री और अन्य निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल अब महंगा पड़ रहा है।

