अररिया में SIR के विरोध में निकला ‘जिंदा लाश’ मार्च:CEC के इस्तीफे की मांग, सड़क पर उतरे नौजवान; बोले-‘वोट चोर, गद्दी छोड़’

अररिया में SIR के विरोध में निकला ‘जिंदा लाश’ मार्च:CEC के इस्तीफे की मांग, सड़क पर उतरे नौजवान; बोले-‘वोट चोर, गद्दी छोड़’

अररिया में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के विरोध में अररिया शहर में सैकड़ों छात्र-नौजवानों, किसानों, मजदूरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ‘जिंदा लाश’ मार्च निकाला। ‘लोकतंत्र पर हमला नहीं सहेंगे’ और ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारों के बीच प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंका को लेकर विरोध जताया। कुछ युवाओं ने कॉकरोच जैसे मुखौटे पहनकर भी प्रदर्शन किया। कार्यक्रम ‘यूथ की बात’ के बैनर तले आयोजित हुआ, जिसे जन जागरण शक्ति संगठन और एक वामपंथी पार्टी का समर्थन मिला। ‘जिंदा नागरिकों को कागजों में मृत घोषित करने’ का आरोप प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर जीवित नागरिकों को कागजों में मृत घोषित किया जा रहा है। उनका कहना था कि इस प्रक्रिया से योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा है। उन्होंने चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा की मांग की। ये आरोप प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए; इनके संबंध में प्रशासनिक पक्ष सामने नहीं आया है। चांदनी चौक से कचहरी तक निकाला मार्च मार्च चांदनी चौक से शुरू होकर सुभाष चौक होते हुए कचहरी परिसर स्थित धरना स्थल तक पहुंचा। यहां आयोजित सभा में प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। मार्च के दौरान लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा से जुड़े नारे लगाए गए। ‘लोकतंत्र पर हमला बर्दाश्त नहीं होगा’ सभा का नेतृत्व ‘यूथ की बात’ के सब्यसाची सेन, नवाज हसन और सुनील कुमार ने किया। जन जागरण शक्ति संगठन की मांडवी देवी ने कहा कि लोकतंत्र पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, नवाज हसन ने कहा कि लोकतंत्र को राजतंत्र में बदलने की कोशिश सफल नहीं होगी। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा को लेकर अपना विरोध जारी रखने की बात कही। अररिया में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के विरोध में अररिया शहर में सैकड़ों छात्र-नौजवानों, किसानों, मजदूरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ‘जिंदा लाश’ मार्च निकाला। ‘लोकतंत्र पर हमला नहीं सहेंगे’ और ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारों के बीच प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंका को लेकर विरोध जताया। कुछ युवाओं ने कॉकरोच जैसे मुखौटे पहनकर भी प्रदर्शन किया। कार्यक्रम ‘यूथ की बात’ के बैनर तले आयोजित हुआ, जिसे जन जागरण शक्ति संगठन और एक वामपंथी पार्टी का समर्थन मिला। ‘जिंदा नागरिकों को कागजों में मृत घोषित करने’ का आरोप प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर जीवित नागरिकों को कागजों में मृत घोषित किया जा रहा है। उनका कहना था कि इस प्रक्रिया से योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा है। उन्होंने चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा की मांग की। ये आरोप प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए; इनके संबंध में प्रशासनिक पक्ष सामने नहीं आया है। चांदनी चौक से कचहरी तक निकाला मार्च मार्च चांदनी चौक से शुरू होकर सुभाष चौक होते हुए कचहरी परिसर स्थित धरना स्थल तक पहुंचा। यहां आयोजित सभा में प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। मार्च के दौरान लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा से जुड़े नारे लगाए गए। ‘लोकतंत्र पर हमला बर्दाश्त नहीं होगा’ सभा का नेतृत्व ‘यूथ की बात’ के सब्यसाची सेन, नवाज हसन और सुनील कुमार ने किया। जन जागरण शक्ति संगठन की मांडवी देवी ने कहा कि लोकतंत्र पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, नवाज हसन ने कहा कि लोकतंत्र को राजतंत्र में बदलने की कोशिश सफल नहीं होगी। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा को लेकर अपना विरोध जारी रखने की बात कही।  

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