US Global Energy Dependence: ‘ग्लोबल एनर्जी’ की चिंता बढ़ने लगी है। ईरान से तनाव के कारण सप्लाई चैन में बाधा आई है। यही कारण है कि तेल और गैस के दामों में भारी उछाल देखने को मिला। भारत भी इसकी चपेट में आया। अमेरिका पर भी चिंता की लकीरें दिखने लगी है। अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर अहम बात कही है।
एथेंस में ग्रीस के विदेश मंत्री जियोर्जोस गेरापेट्राइटिस के साथ प्रेस ब्रीफिंग में रुबियो ने कहा कि दुनिया किसी एक क्षेत्र से आने वाली ऊर्जा पर ज्यादा निर्भर नहीं रह सकती। उनके मुताबिक, अगर किसी एक इलाके से एनर्जी फ्लो रुकता है, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। रुबियो ने साफ कहा कि एनर्जी सिक्योरिटी सीधे नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी है। इसलिए देशों को सप्लाई के वैकल्पिक रास्ते तैयार करने होंगे।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई चिंता
रुबियो की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि हाल की घटनाओं ने तेल और प्राकृतिक गैस के लिए अलग-अलग सप्लाई रूट की जरूरत को सामने ला दिया है। उनका कहना है कि किसी एक ट्रेड रूट पर ज्यादा निर्भरता देशों की रणनीतिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से अमेरिका वैकल्पिक एनर्जी कॉरिडोर और ट्रांजिट नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
ग्रीस बनेगा अमेरिका का अहम एनर्जी पार्टनर
रुबियो ने ग्रीस को इस रणनीति में महत्वपूर्ण साझेदार बताया। अमेरिका मेडिटेरेनियन क्षेत्र से यूरोप तक ऊर्जा पहुंचाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दे रहा है। वहीं ग्रीस के विदेश मंत्री ने भी दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को नई ऊंचाई पर पहुंचने की बात कही। उन्होंने वर्टिकल कॉरिडोर का जिक्र किया। यह नेटवर्क अमेरिकी LNG को सेंट्रल और ईस्टर्न यूरोप तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।
अमेरिका ग्रीस की LNG इंपोर्ट क्षमता बढ़ाने के साथ नए गैस और इलेक्ट्रिकल इंटरकनेक्टर्स को भी समर्थन दे रहा है। ग्रीस में अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। इनमें समुद्र के अंदर हाइड्रोकार्बन भंडार की खोज से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं।
LNG से लेकर समुद्री सुरक्षा तक, बढ़ा सहयोग
दोनों देशों की बातचीत सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं रही। इसमें समुद्री सुरक्षा, नेविगेशन की आजादी और ग्लोबल सप्लाई चेन पर भी चर्चा हुई। ग्रीस ने होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक मदद की संभावना का मूल्यांकन करने की बात कही है। हालांकि, यह कदम हालात और किसी भरोसेमंद शांति पहल पर निर्भर करेगा।
रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि कुछ संवेदनशील मुद्दों का समाधान सार्वजनिक मंच के बजाय बातचीत की मेज पर बेहतर तरीके से किया जा सकता है। कुल मिलाकर, अमेरिका और ग्रीस ऊर्जा सप्लाई के नए रास्ते बनाने पर जोर दे रहे हैं। मकसद साफ है। किसी एक क्षेत्र या समुद्री रास्ते पर अत्यधिक निर्भरता कम हो। साथ ही, वैश्विक ऊर्जा बाजार को भू-राजनीतिक तनाव से होने वाले जोखिम से बचाया जा सके।

