सुपौल के छातापुर प्रखंड के युवा समाजसेवी सह सांसद पप्पू यादव समर्थक सुभाष कुमार यादव ने क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात कर एक मांगपत्र सौंपा। इस मांगपत्र की प्रतिलिपि बिहार सरकार के मुख्यमंत्री, परिवहन विभाग, सुपौल तथा त्रिवेणीगंज के अनुमंडल पदाधिकारी को भी भेजी गई है। मांगपत्र में छातापुर क्षेत्र की कई बुनियादी समस्याओं का जिक्र करते हुए उनके समाधान की मांग की गई है। छातापुर प्रखंड में कुल 23 पंचायतें मांगपत्र में बताया गया है कि छातापुर प्रखंड क्षेत्र में घनी आबादी अधिक होने के बावजूद यहां बड़ी अग्निशामक वाहन की व्यवस्था नहीं है। छातापुर प्रखंड में कुल 23 पंचायतें हैं और अधिकांश गांवों में घनी आबादी होने के कारण गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाएं आम हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में जब आग लगती है तो स्थानीय स्तर पर दमकल की सुविधा नहीं होने के कारण भीमपुर या त्रिवेणीगंज से दमकल मंगानी पड़ती है। दमकल वाहन के पहुंचने में देर होने के कारण कई बार तब तक लोगों की संपत्ति और घर जलकर राख हो जाते हैं। ऐसे में छातापुर में स्थायी रूप से दमकल वाहन उपलब्ध कराने की मांग की गई है ताकि आगजनी की घटनाओं में समय पर राहत मिल सके। अस्पताल में हड्डी मरीजों को होती परेशानी इसके अलावा छातापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डिजिटल एक्स-रे मशीन की व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। सुभाष कुमार यादव ने बताया कि अस्पताल में हड्डी से संबंधित मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रतिदिन लगभग 20 से 25 मरीजों को डिजिटल एक्स-रे के लिए निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है। अस्पताल में केवल मैनुअल एक्स-रे की व्यवस्था है, जिसमें स्पष्टता का अभाव रहता है। कई बार बिजली नहीं रहने के कारण मैनुअल एक्स-रे भी नहीं हो पाता। अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे मशीन की मांग इस कारण मरीजों को मजबूर होकर निजी सेंटरों पर जाना पड़ता है, जहां एक एक्स-रे के लिए 300 रुपये से अधिक का भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे मशीन की व्यवस्था कराने की मांग की गई है।
मांगपत्र में छातापुर बस पड़ाव की बदहाल स्थिति का भी जिक्र किया गया है। बताया गया कि लाखों रुपये का राजस्व देने वाला यह बस पड़ाव अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। 1990 के दशक में यहां से बसों का परिचालन शुरू हुआ था। इससे पहले बाजार के उत्तर स्थित डाक बंगला की जमीन को जिला परिषद द्वारा टैक्सी स्टैंड के रूप में अधिकृत कर डाक दिया जाता था और यह व्यवस्था आज भी जारी है। लेकिन वर्तमान में बस पड़ाव में यात्रियों के लिए कोई आधुनिक सुविधा तो दूर, मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। बस पड़ाव का शौचालय और पेयजल व्यवस्था नहीं बस पड़ाव का शौचालय कचरे और मलबे से पटा हुआ है तथा पेयजल की भी व्यवस्था नहीं है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
साथ ही बताया गया कि बस पड़ाव के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने के बावजूद अब तक बसों का संचालन व्यवस्थित रूप से वहां से शुरू नहीं किया गया है। वर्तमान में बसों की पार्किंग सड़क किनारे होती है, जिससे जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है। मांग की गई है कि जहां बस स्टैंड के लिए जमीन निर्धारित है, वहीं बसों की पार्किंग और संचालन सुनिश्चित किया जाए।
युवा समाजसेवी सुभाष कुमार यादव ने बताया कि जिलाधिकारी ने उनकी सभी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए समाधान की दिशा में आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया है। साथ ही उन्होंने संबंधित विभागों को आगे की कार्रवाई के लिए पत्र लिखने की भी बात कही है। सुपौल के छातापुर प्रखंड के युवा समाजसेवी सह सांसद पप्पू यादव समर्थक सुभाष कुमार यादव ने क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात कर एक मांगपत्र सौंपा। इस मांगपत्र की प्रतिलिपि बिहार सरकार के मुख्यमंत्री, परिवहन विभाग, सुपौल तथा त्रिवेणीगंज के अनुमंडल पदाधिकारी को भी भेजी गई है। मांगपत्र में छातापुर क्षेत्र की कई बुनियादी समस्याओं का जिक्र करते हुए उनके समाधान की मांग की गई है। छातापुर प्रखंड में कुल 23 पंचायतें मांगपत्र में बताया गया है कि छातापुर प्रखंड क्षेत्र में घनी आबादी अधिक होने के बावजूद यहां बड़ी अग्निशामक वाहन की व्यवस्था नहीं है। छातापुर प्रखंड में कुल 23 पंचायतें हैं और अधिकांश गांवों में घनी आबादी होने के कारण गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाएं आम हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में जब आग लगती है तो स्थानीय स्तर पर दमकल की सुविधा नहीं होने के कारण भीमपुर या त्रिवेणीगंज से दमकल मंगानी पड़ती है। दमकल वाहन के पहुंचने में देर होने के कारण कई बार तब तक लोगों की संपत्ति और घर जलकर राख हो जाते हैं। ऐसे में छातापुर में स्थायी रूप से दमकल वाहन उपलब्ध कराने की मांग की गई है ताकि आगजनी की घटनाओं में समय पर राहत मिल सके। अस्पताल में हड्डी मरीजों को होती परेशानी इसके अलावा छातापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डिजिटल एक्स-रे मशीन की व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। सुभाष कुमार यादव ने बताया कि अस्पताल में हड्डी से संबंधित मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रतिदिन लगभग 20 से 25 मरीजों को डिजिटल एक्स-रे के लिए निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है। अस्पताल में केवल मैनुअल एक्स-रे की व्यवस्था है, जिसमें स्पष्टता का अभाव रहता है। कई बार बिजली नहीं रहने के कारण मैनुअल एक्स-रे भी नहीं हो पाता। अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे मशीन की मांग इस कारण मरीजों को मजबूर होकर निजी सेंटरों पर जाना पड़ता है, जहां एक एक्स-रे के लिए 300 रुपये से अधिक का भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे मशीन की व्यवस्था कराने की मांग की गई है।
मांगपत्र में छातापुर बस पड़ाव की बदहाल स्थिति का भी जिक्र किया गया है। बताया गया कि लाखों रुपये का राजस्व देने वाला यह बस पड़ाव अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। 1990 के दशक में यहां से बसों का परिचालन शुरू हुआ था। इससे पहले बाजार के उत्तर स्थित डाक बंगला की जमीन को जिला परिषद द्वारा टैक्सी स्टैंड के रूप में अधिकृत कर डाक दिया जाता था और यह व्यवस्था आज भी जारी है। लेकिन वर्तमान में बस पड़ाव में यात्रियों के लिए कोई आधुनिक सुविधा तो दूर, मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। बस पड़ाव का शौचालय और पेयजल व्यवस्था नहीं बस पड़ाव का शौचालय कचरे और मलबे से पटा हुआ है तथा पेयजल की भी व्यवस्था नहीं है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
साथ ही बताया गया कि बस पड़ाव के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने के बावजूद अब तक बसों का संचालन व्यवस्थित रूप से वहां से शुरू नहीं किया गया है। वर्तमान में बसों की पार्किंग सड़क किनारे होती है, जिससे जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है। मांग की गई है कि जहां बस स्टैंड के लिए जमीन निर्धारित है, वहीं बसों की पार्किंग और संचालन सुनिश्चित किया जाए।
युवा समाजसेवी सुभाष कुमार यादव ने बताया कि जिलाधिकारी ने उनकी सभी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए समाधान की दिशा में आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया है। साथ ही उन्होंने संबंधित विभागों को आगे की कार्रवाई के लिए पत्र लिखने की भी बात कही है।


