अररिया व्यवहार न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर मामले में सख्त फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम ने अभियुक्त दिलखुश यादव को दोषी करार देते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला अररिया जिले के नरपतगंज थाना कांड संख्या 377/24 से संबंधित है। अदालत ने अभियुक्त पर 50,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि अर्थदंड की राशि जमा नहीं की जाती है, तो उसे अतिरिक्त 3 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा। उम्रकैद तक की सजाएं सुनाई जा चुकी
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, जिसके आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों में पीड़ित बच्चे की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना सर्वोपरि है। पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों पर लगातार सख्त कार्रवाई हो रही है। यह फैसला बाल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिला प्रशासन और पुलिस ऐसे मामलों में तेजी से जांच और ट्रायल पर जोर दे रहे हैं, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। यह सजा बिहार में पॉक्सो मामलों में जारी सख्ती का उदाहरण है, जहां हाल के वर्षों में कई मामलों में उम्रकैद तक की सजाएं सुनाई जा चुकी हैं। पीड़ित परिवार को न्याय मिलने से क्षेत्र में राहत की भावना है, लेकिन ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और सतर्कता की आवश्यकता बनी हुई है। अररिया व्यवहार न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर मामले में सख्त फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम ने अभियुक्त दिलखुश यादव को दोषी करार देते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला अररिया जिले के नरपतगंज थाना कांड संख्या 377/24 से संबंधित है। अदालत ने अभियुक्त पर 50,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि अर्थदंड की राशि जमा नहीं की जाती है, तो उसे अतिरिक्त 3 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा। उम्रकैद तक की सजाएं सुनाई जा चुकी
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, जिसके आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों में पीड़ित बच्चे की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना सर्वोपरि है। पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों पर लगातार सख्त कार्रवाई हो रही है। यह फैसला बाल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिला प्रशासन और पुलिस ऐसे मामलों में तेजी से जांच और ट्रायल पर जोर दे रहे हैं, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। यह सजा बिहार में पॉक्सो मामलों में जारी सख्ती का उदाहरण है, जहां हाल के वर्षों में कई मामलों में उम्रकैद तक की सजाएं सुनाई जा चुकी हैं। पीड़ित परिवार को न्याय मिलने से क्षेत्र में राहत की भावना है, लेकिन ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और सतर्कता की आवश्यकता बनी हुई है।


