सहरसा न्यायालय ने अवैध हथियार रखने के एक मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। मंगलवार को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी अभिनव कुमार ने त्वरित विचारण के तहत चयनित एक मामले में आरोपी को दोषी पाए जाने पर कुल छह वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। यह मामला सहरसा सदर थाना कांड संख्या 311/25 (CRI-1354/25) से संबंधित है। पुलिस अधीक्षक द्वारा चयनित कर टीएमएस पोर्टल पर अपलोड किए गए इस कांड में हरिओम कुमार, निवासी हरिपुर वार्ड संख्या-14, थाना सोनवर्षा कचहरी, जिला सहरसा को आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। न्यायालय के आदेशानुसार, दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी न्यायालय ने अभियुक्त को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी) के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, धारा 26 आर्म्स एक्ट के तहत भी तीन वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। न्यायालय के आदेशानुसार, दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष की ओर से व्यवहार न्यायालय सहरसा के अभियोजन पदाधिकारी रविशंकर सिंह ने मामले की सशक्त पैरवी की। अभियोजन ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपों को सफलतापूर्वक सिद्ध किया। साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया था इस मामले में सहरसा सदर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक मोजम्मील खां वादी थे, जबकि अनुसंधान का कार्य पुलिस अवर निरीक्षक अविनाश कुमार अमन ने किया। जांच के दौरान अवैध हथियार की बरामदगी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया था। न्यायालय के इस फैसले को जिले में अवैध हथियार रखने वालों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर भी इसे कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सहरसा न्यायालय ने अवैध हथियार रखने के एक मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। मंगलवार को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी अभिनव कुमार ने त्वरित विचारण के तहत चयनित एक मामले में आरोपी को दोषी पाए जाने पर कुल छह वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। यह मामला सहरसा सदर थाना कांड संख्या 311/25 (CRI-1354/25) से संबंधित है। पुलिस अधीक्षक द्वारा चयनित कर टीएमएस पोर्टल पर अपलोड किए गए इस कांड में हरिओम कुमार, निवासी हरिपुर वार्ड संख्या-14, थाना सोनवर्षा कचहरी, जिला सहरसा को आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। न्यायालय के आदेशानुसार, दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी न्यायालय ने अभियुक्त को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी) के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, धारा 26 आर्म्स एक्ट के तहत भी तीन वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। न्यायालय के आदेशानुसार, दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष की ओर से व्यवहार न्यायालय सहरसा के अभियोजन पदाधिकारी रविशंकर सिंह ने मामले की सशक्त पैरवी की। अभियोजन ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपों को सफलतापूर्वक सिद्ध किया। साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया था इस मामले में सहरसा सदर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक मोजम्मील खां वादी थे, जबकि अनुसंधान का कार्य पुलिस अवर निरीक्षक अविनाश कुमार अमन ने किया। जांच के दौरान अवैध हथियार की बरामदगी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया था। न्यायालय के इस फैसले को जिले में अवैध हथियार रखने वालों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर भी इसे कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


