नाबालिग के अपहरण-रेप में युवक को 12 साल की सजा:जहानाबाद में पॉक्सो कोर्ट का फैसला, पीड़िता को 4 लाख मुआवजे का आदेश

नाबालिग के अपहरण-रेप में युवक को 12 साल की सजा:जहानाबाद में पॉक्सो कोर्ट का फैसला, पीड़िता को 4 लाख मुआवजे का आदेश

जहानाबाद में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के दोषी दीपू कुमार उर्फ अमन कुमार को पॉक्सो न्यायालय ने 12 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश सुनील कुमार सिंह की अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए ₹4 लाख की सहायता राशि देने का भी निर्देश दिया है। न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत दोषी दीपू कुमार को 12 साल के कठोर कारावास के साथ ₹20,000 का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अतिरिक्त, भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 366 के तहत उसे 7 साल का कठोर कारावास और ₹5,000 का अर्थदंड भुगतना होगा। अर्थदंड का भुगतान न करने पर क्रमशः 6 और 3 महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास होगा। गलत काम करने की नीयत से अपहरण
विशेष अदालत के न्यायाधीश ने पीड़ित प्रतिकर अधिनियम के तहत पीड़िता को राहत और पुनर्वास के लिए ₹4 लाख की सहायता राशि प्रदान करने का निर्देश दिया है। इस राशि का भुगतान प्राधिकार द्वारा किया जाएगा। विशेष लोक अभियोजक मुकेश नंदन वर्मा ने बताया कि इस मामले में पीड़िता के पिता ने काको थाना में दीपू कुमार सहित कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग बेटी 10 नवंबर 2022 को सुबह 4:30 बजे शौच के लिए घर से बाहर गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। खोजबीन के दौरान उन्हें पता चला कि दीपू कुमार ने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर शादी करने या गलत काम करने की नीयत से अपहरण कर लिया है। जब पीड़िता के पिता दीपू कुमार के घर पूछताछ करने गए, तो दीपू कुमार के माता-पिता, भाई-बहन और दो अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने ही लड़की का अपहरण किया है और उसकी शादी दीपू से करेंगे। जहानाबाद में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के दोषी दीपू कुमार उर्फ अमन कुमार को पॉक्सो न्यायालय ने 12 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश सुनील कुमार सिंह की अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए ₹4 लाख की सहायता राशि देने का भी निर्देश दिया है। न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत दोषी दीपू कुमार को 12 साल के कठोर कारावास के साथ ₹20,000 का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अतिरिक्त, भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 366 के तहत उसे 7 साल का कठोर कारावास और ₹5,000 का अर्थदंड भुगतना होगा। अर्थदंड का भुगतान न करने पर क्रमशः 6 और 3 महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास होगा। गलत काम करने की नीयत से अपहरण
विशेष अदालत के न्यायाधीश ने पीड़ित प्रतिकर अधिनियम के तहत पीड़िता को राहत और पुनर्वास के लिए ₹4 लाख की सहायता राशि प्रदान करने का निर्देश दिया है। इस राशि का भुगतान प्राधिकार द्वारा किया जाएगा। विशेष लोक अभियोजक मुकेश नंदन वर्मा ने बताया कि इस मामले में पीड़िता के पिता ने काको थाना में दीपू कुमार सहित कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग बेटी 10 नवंबर 2022 को सुबह 4:30 बजे शौच के लिए घर से बाहर गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। खोजबीन के दौरान उन्हें पता चला कि दीपू कुमार ने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर शादी करने या गलत काम करने की नीयत से अपहरण कर लिया है। जब पीड़िता के पिता दीपू कुमार के घर पूछताछ करने गए, तो दीपू कुमार के माता-पिता, भाई-बहन और दो अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने ही लड़की का अपहरण किया है और उसकी शादी दीपू से करेंगे।  

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