नए साल में बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलने जा रहे हैं। राज्य सरकार ने विदेशों में ड्राइविंग के क्षेत्र में नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं के लिए एक विशेष और महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत अब बिहार में ही बाएं हाथ की स्टीयरिंग (Left-Hand Drive) वाली गाड़ियों को चलाने का पेशेवर और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे खासकर खाड़ी देशों और यूरोप जाने की तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। विदेशी सड़कों की चुनौती होगी आसान अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने जानकारी देते हुए बताया कि खाड़ी देशों, यूरोप और कई अन्य देशों में वाहन सड़क के दाईं ओर चलते हैं और स्टीयरिंग बाईं ओर होता है। भारत में इससे ठीक उलट व्यवस्था होने के कारण यहां के अनुभवी ड्राइवरों को भी विदेश जाकर शुरुआत में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ड्राइविंग प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है, ताकि बिहार के युवा विदेश में भी आत्मविश्वास के साथ वाहन चला सकें। पाँच जिलों में खुलेंगे मॉडर्न प्रशिक्षण केंद्र इस योजना को केवल राजधानी पटना तक सीमित नहीं रखा गया है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि पटना के अलावा मोतिहारी, सुपौल, नालंदा और बांका में भी अत्याधुनिक आवासीय प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। इन केंद्रों में युवाओं को न सिर्फ लेफ्ट हैंड ड्राइव वाहनों का अभ्यास कराया जाएगा, बल्कि उन्हें विदेशी यातायात नियम, सड़क सुरक्षा मानक और आधुनिक ड्राइविंग तकनीकों की भी जानकारी दी जाएगी। आवासीय सुविधा के साथ संपूर्ण प्रशिक्षण प्रशिक्षण केंद्रों को पूरी तरह आवासीय बनाया जाएगा, ताकि दूर-दराज के जिलों से आने वाले युवाओं को किसी तरह की परेशानी न हो। यहां रहने, खाने और प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था होगी।विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के माध्यम से युवाओं को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही विदेशी ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया, ट्रैफिक साइन, बीमा नियम और वाहन रखरखाव से जुड़ी जानकारी भी शामिल होगी। रोजगार और बेहतर वेतन की उम्मीद इस योजना का मुख्य उद्देश्य बिहार के हुनरमंद युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवा विदेशों में ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने में सक्षम होंगे, जिससे उन्हें वहां आसानी से नौकरी मिल सकेगी।खाड़ी देशों और यूरोप में ड्राइवरों को मिलने वाला वेतन भारत की तुलना में कहीं अधिक होता है, ऐसे में यह योजना युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। बिहार के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल युवाओं को रोजगार देगी, बल्कि बिहार के लिए भी आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होगी। विदेशों में काम करने वाले कुशल ड्राइवरों के माध्यम से राज्य में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा।साथ ही, यह योजना बिहार की पहचान एक कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाले राज्य के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी। युवाओं में दिख रहा उत्साह इस घोषणा के बाद से ही युवाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। ड्राइविंग को पेशे के रूप में अपनाने वाले कई युवाओं का कहना है कि अब उन्हें विदेश जाने के लिए दूसरे राज्यों या निजी संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।राज्य में ही विश्वस्तरीय प्रशिक्षण मिलने से उनका समय और खर्च दोनों बचेगा। कुल मिलाकर, बिहार सरकार की यह पहल युवाओं के लिए नए साल का बड़ा तोहफा साबित हो सकती है। लेफ्ट हैंड ड्राइव प्रशिक्षण योजना न सिर्फ रोजगार के नए द्वार खोलेगी, बल्कि बिहार के युवाओं को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। नए साल में बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलने जा रहे हैं। राज्य सरकार ने विदेशों में ड्राइविंग के क्षेत्र में नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं के लिए एक विशेष और महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत अब बिहार में ही बाएं हाथ की स्टीयरिंग (Left-Hand Drive) वाली गाड़ियों को चलाने का पेशेवर और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे खासकर खाड़ी देशों और यूरोप जाने की तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। विदेशी सड़कों की चुनौती होगी आसान अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान ने जानकारी देते हुए बताया कि खाड़ी देशों, यूरोप और कई अन्य देशों में वाहन सड़क के दाईं ओर चलते हैं और स्टीयरिंग बाईं ओर होता है। भारत में इससे ठीक उलट व्यवस्था होने के कारण यहां के अनुभवी ड्राइवरों को भी विदेश जाकर शुरुआत में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ड्राइविंग प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है, ताकि बिहार के युवा विदेश में भी आत्मविश्वास के साथ वाहन चला सकें। पाँच जिलों में खुलेंगे मॉडर्न प्रशिक्षण केंद्र इस योजना को केवल राजधानी पटना तक सीमित नहीं रखा गया है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि पटना के अलावा मोतिहारी, सुपौल, नालंदा और बांका में भी अत्याधुनिक आवासीय प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। इन केंद्रों में युवाओं को न सिर्फ लेफ्ट हैंड ड्राइव वाहनों का अभ्यास कराया जाएगा, बल्कि उन्हें विदेशी यातायात नियम, सड़क सुरक्षा मानक और आधुनिक ड्राइविंग तकनीकों की भी जानकारी दी जाएगी। आवासीय सुविधा के साथ संपूर्ण प्रशिक्षण प्रशिक्षण केंद्रों को पूरी तरह आवासीय बनाया जाएगा, ताकि दूर-दराज के जिलों से आने वाले युवाओं को किसी तरह की परेशानी न हो। यहां रहने, खाने और प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था होगी।विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के माध्यम से युवाओं को सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही विदेशी ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया, ट्रैफिक साइन, बीमा नियम और वाहन रखरखाव से जुड़ी जानकारी भी शामिल होगी। रोजगार और बेहतर वेतन की उम्मीद इस योजना का मुख्य उद्देश्य बिहार के हुनरमंद युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवा विदेशों में ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने में सक्षम होंगे, जिससे उन्हें वहां आसानी से नौकरी मिल सकेगी।खाड़ी देशों और यूरोप में ड्राइवरों को मिलने वाला वेतन भारत की तुलना में कहीं अधिक होता है, ऐसे में यह योजना युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। बिहार के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल युवाओं को रोजगार देगी, बल्कि बिहार के लिए भी आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होगी। विदेशों में काम करने वाले कुशल ड्राइवरों के माध्यम से राज्य में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा।साथ ही, यह योजना बिहार की पहचान एक कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाले राज्य के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी। युवाओं में दिख रहा उत्साह इस घोषणा के बाद से ही युवाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। ड्राइविंग को पेशे के रूप में अपनाने वाले कई युवाओं का कहना है कि अब उन्हें विदेश जाने के लिए दूसरे राज्यों या निजी संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।राज्य में ही विश्वस्तरीय प्रशिक्षण मिलने से उनका समय और खर्च दोनों बचेगा। कुल मिलाकर, बिहार सरकार की यह पहल युवाओं के लिए नए साल का बड़ा तोहफा साबित हो सकती है। लेफ्ट हैंड ड्राइव प्रशिक्षण योजना न सिर्फ रोजगार के नए द्वार खोलेगी, बल्कि बिहार के युवाओं को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।


