रास्ते के विवाद में घायल युवक की मौत:नेपाल अस्पताल ने 2 दिन तक नहीं दिया शव, हिन्दू-मुस्लिम मिलकर 5 लाख जमाकर लाए बॉडी

रास्ते के विवाद में घायल युवक की मौत:नेपाल अस्पताल ने 2 दिन तक नहीं दिया शव, हिन्दू-मुस्लिम मिलकर 5 लाख जमाकर लाए बॉडी

सुपौल में रास्ते के विवाद में घायल युवक की सोमवार को नेपाल के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं अस्पताल प्रशासन ने बिल भुगतान के बिना शव देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण दो दिनों तक शव वहीं रखा रहा। आखिरकार ग्रामीणों ने हिन्दू-मुस्लिम से चंदा इकट्ठा कर करीब पांच लाख रुपए जुटाए और मंगलवार को शव गांव लाया जा सका। घटना जदिया थाना क्षेत्र के मानगंज पश्चिम पंचायत, वार्ड संख्या 5 की है। मृतक की पहचान मो. इजराइल के रूप में हुई है। वे अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। इजराइल मजदूरी कर हर महीने लगभग 10 से 15 हजार रुपए कमाता था और पूरे परिवार का भरण-पोषण करता था। उसकी मौत के बाद परिवार पर गहरा संकट आ गया है। अब घर में कोई स्थायी आय का स्रोत नहीं बचा है, जिससे जीवन यापन मुश्किल हो गया है। दृष्टिहीन होने की वजह से काम नहीं कर पाता बेटा मृतक अपने पीछे पांच बच्चों को छोड़ गया है, जिनमें एक बेटा और चार बेटियां शामिल हैं। बेटा दृष्टिहीन है और काम करने में असमर्थ है। एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि तीन बेटियां अभी नाबालिग और अविवाहित हैं। पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति अब और बदतर हो गई है। घटना की शुरुआत 27 मार्च को रास्ते को लेकर हुए विवाद से हुई थी, जिसे ग्रामीणों ने शांत करा दिया था। लेकिन 28 मार्च की शाम को एक पक्ष के लोग हथियार और लाठी-डंडे लेकर पहुंचे और हमला कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल हुए, जिनमें मृतक को सिर पर गंभीर चोट लगी थी। जदिया थानाध्यक्ष का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान पर अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। वहीं एक आरोपी को गिरफ्तार कर अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। सुपौल में रास्ते के विवाद में घायल युवक की सोमवार को नेपाल के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं अस्पताल प्रशासन ने बिल भुगतान के बिना शव देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण दो दिनों तक शव वहीं रखा रहा। आखिरकार ग्रामीणों ने हिन्दू-मुस्लिम से चंदा इकट्ठा कर करीब पांच लाख रुपए जुटाए और मंगलवार को शव गांव लाया जा सका। घटना जदिया थाना क्षेत्र के मानगंज पश्चिम पंचायत, वार्ड संख्या 5 की है। मृतक की पहचान मो. इजराइल के रूप में हुई है। वे अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। इजराइल मजदूरी कर हर महीने लगभग 10 से 15 हजार रुपए कमाता था और पूरे परिवार का भरण-पोषण करता था। उसकी मौत के बाद परिवार पर गहरा संकट आ गया है। अब घर में कोई स्थायी आय का स्रोत नहीं बचा है, जिससे जीवन यापन मुश्किल हो गया है। दृष्टिहीन होने की वजह से काम नहीं कर पाता बेटा मृतक अपने पीछे पांच बच्चों को छोड़ गया है, जिनमें एक बेटा और चार बेटियां शामिल हैं। बेटा दृष्टिहीन है और काम करने में असमर्थ है। एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि तीन बेटियां अभी नाबालिग और अविवाहित हैं। पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति अब और बदतर हो गई है। घटना की शुरुआत 27 मार्च को रास्ते को लेकर हुए विवाद से हुई थी, जिसे ग्रामीणों ने शांत करा दिया था। लेकिन 28 मार्च की शाम को एक पक्ष के लोग हथियार और लाठी-डंडे लेकर पहुंचे और हमला कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल हुए, जिनमें मृतक को सिर पर गंभीर चोट लगी थी। जदिया थानाध्यक्ष का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान पर अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। वहीं एक आरोपी को गिरफ्तार कर अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।  

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