भागलपुर के योग फाउंडेशन को वर्ल्ड समिट के लिए आमंत्रण:गुरु धीरज सम्मेलन के स्पीकर होंगे, भारत दर्शन-संस्कृति की महत्ता की देंगे जानकारी

भागलपुर के योग फाउंडेशन को वर्ल्ड समिट के लिए आमंत्रण:गुरु धीरज सम्मेलन के स्पीकर होंगे, भारत दर्शन-संस्कृति की महत्ता की देंगे जानकारी

भागलपुर से रजिस्टर्ड वशिष्ठ योग फाउंडेशन को दिल्ली में आयोजित हो रहे वर्ल्ड पब्लिक समिट में शामिल होने को आमंत्रित किया गया है। भागलपुर बिहार के मूल निवासी योग गुरु धीरज सम्मेलन के इंटरनेशनल राउंड टेबल में बतौर स्पीकर अंतर्राष्ट्रीय शांति में भारत दर्शन और संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डालेंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज मिरांडा हाउस के दर्शनशास्त्र विभाग में कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। वर्ल्ड पब्लिक समिट, इंडिया के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय राउंड टेबल में भारत की आध्यात्मिक परंपरा और योग दर्शन की गूंज सुनाई देगी। इस महत्वपूर्ण मंच पर योग गुरु धीरज विशेष वक्ता के रूप में भाग लेंगे। यह अंतरराष्ट्रीय चर्चा “Spiritual Unity: from traditional values to a culture of peace” विषय पर केंद्रित होगी। जिसमें अलग-अलग देशों के विद्वान, आध्यात्मिक नेता और नीति-निर्माता भाग लेकर वैश्विक शांति और सहयोग के नए आयामों पर विचार करेंगे। योग के माध्यम से संतुलित हो सकता तनाव योग गुरु धीरज, जो वशिष्ठ योग फाउंडेशन के संस्थापक हैं, अपने विचारों में विशेष रूप से योग को ‘मानव चेतना को जोड़ने वाला विज्ञान’ बताते हुए, आधुनिक समय की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करेंगे। उनका मानना है कि आज की दुनिया में बढ़ते तनाव, मानसिक अस्थिरता और सामाजिक टकराव का मूल कारण ‘आंतरिक असंतुलन’ है, जिसे योग के माध्यम से संतुलित किया जा सकता है। अपने संबोधन में योग गुरु धीरज भगवान कृष्ण के शांति दूत स्वरूप, भगवद गीता के ‘समत्व योग’ और उपनिषदों के ‘एकत्व’ सिद्धांत का उल्लेख किया है। इसमें उन्होंने यह संदेश देंगे कि “बिना आंतरिक शांति के वैश्विक शांति संभव नहीं है।” कार्यक्रम में यह भी चर्चा होगी कि किस प्रकार भारत की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत- जैसे वसुधैव कुटुम्बकम् और अहिंसा- आज के वैश्विक संकटों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह अंतरराष्ट्रीय राउंड टेबल 24 मार्च को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक, मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग, कक्ष संख्या 321 में आयोजित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मंच न केवल संवाद को बढ़ावा देते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक सहयोग और शांति की संस्कृति को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भागलपुर से रजिस्टर्ड वशिष्ठ योग फाउंडेशन को दिल्ली में आयोजित हो रहे वर्ल्ड पब्लिक समिट में शामिल होने को आमंत्रित किया गया है। भागलपुर बिहार के मूल निवासी योग गुरु धीरज सम्मेलन के इंटरनेशनल राउंड टेबल में बतौर स्पीकर अंतर्राष्ट्रीय शांति में भारत दर्शन और संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डालेंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज मिरांडा हाउस के दर्शनशास्त्र विभाग में कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। वर्ल्ड पब्लिक समिट, इंडिया के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय राउंड टेबल में भारत की आध्यात्मिक परंपरा और योग दर्शन की गूंज सुनाई देगी। इस महत्वपूर्ण मंच पर योग गुरु धीरज विशेष वक्ता के रूप में भाग लेंगे। यह अंतरराष्ट्रीय चर्चा “Spiritual Unity: from traditional values to a culture of peace” विषय पर केंद्रित होगी। जिसमें अलग-अलग देशों के विद्वान, आध्यात्मिक नेता और नीति-निर्माता भाग लेकर वैश्विक शांति और सहयोग के नए आयामों पर विचार करेंगे। योग के माध्यम से संतुलित हो सकता तनाव योग गुरु धीरज, जो वशिष्ठ योग फाउंडेशन के संस्थापक हैं, अपने विचारों में विशेष रूप से योग को ‘मानव चेतना को जोड़ने वाला विज्ञान’ बताते हुए, आधुनिक समय की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करेंगे। उनका मानना है कि आज की दुनिया में बढ़ते तनाव, मानसिक अस्थिरता और सामाजिक टकराव का मूल कारण ‘आंतरिक असंतुलन’ है, जिसे योग के माध्यम से संतुलित किया जा सकता है। अपने संबोधन में योग गुरु धीरज भगवान कृष्ण के शांति दूत स्वरूप, भगवद गीता के ‘समत्व योग’ और उपनिषदों के ‘एकत्व’ सिद्धांत का उल्लेख किया है। इसमें उन्होंने यह संदेश देंगे कि “बिना आंतरिक शांति के वैश्विक शांति संभव नहीं है।” कार्यक्रम में यह भी चर्चा होगी कि किस प्रकार भारत की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत- जैसे वसुधैव कुटुम्बकम् और अहिंसा- आज के वैश्विक संकटों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह अंतरराष्ट्रीय राउंड टेबल 24 मार्च को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक, मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग, कक्ष संख्या 321 में आयोजित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मंच न केवल संवाद को बढ़ावा देते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक सहयोग और शांति की संस्कृति को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

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