MP News: मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी और देश की प्रमुख नदियों में से एक नर्मदा नदी के किनारे एक वर्षों पुराना प्राचीन घाट मिला है। इस प्राचीन घाट की बनावट नर्मदापुरम के सेठानी घाट की तरह ऐतिहासिक व भव्य है। मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री प्रहलाद पटेल की नदी उद्गम यात्रा के तहत इस प्राचीन घाट का पता चला है और खुद मंत्री प्रहलाद पटेल ने इस घाट को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने संतों, नर्मदा परिक्रमावासियों व स्थानीय लोगों के साथ मिलकर घाट पर पहुंचकर श्रमदान भी किया।
नर्मदा किनारे मिला प्राचीन घाट
यह प्राचीन घाट सीहोर जिले की सीमा में बुदनी के निकट और नर्मदापुरम के सेठानी घाट के बिल्कुल सामने और गुंजारी व नर्मदा नदी के संगम पर है। मंत्री प्रहलाद पटेल की नदी उद्गम यात्रा के तहत यह घाट अस्तित्व में आया है, जिसे पुनर्जीवित करने का बीड़ा स्वयं मंत्री ने उठाया है। उन्होंने संतों, नागरिकों, नर्मदा परिक्रमावासियों के साथ शनिवार को उक्त घाट पर पहुंचकर श्रमदान भी किया। इस मौके पर दादा गुरु महाराज मौजूद रहे।

‘नदियों का संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं’
प्राचीन घाट पर श्रमदान करने पहुंचे मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल सरकार का दायित्व ही नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना भी जरूरी है। यदि समाज चाह ले कि उनके आसपास के जल स्रोत जीवित रहें, प्रदूषण मुक्त रहें तो शासन को भी अतिरिक्त ध्यान देना होगा। प्रहलाद पटेल ने खुद फावड़ा तगाड़ी उठाकर प्राचीन घाट पर श्रमदान भी किया।
सेठानी घाट का इतिहास
नर्मदापुरम जिले में नर्मदा नदी पर बना सेठानी घाट भारत के सबसे बड़े घाटों में से एक है। सेठानी घाट का निर्माण 19वीं शताब्दी कराया गया था। नर्मदा जयंती समारोह के दौरान, घाट जीवंत हो उठता है जब हजारों लोग यहां एकत्रित होते हैं और दीये (मिट्टी के पारंपरिक दीपक) नदी में बहाए जाते हैं। इस घाट का निर्माण नर्मदापुरम के शर्मा परिवार की जानकीबाई सेठानी के उदार योगदान से हुआ था, क्योंकि श्रद्धालुओं ने उनसे नदी तक पहुंचने में कठिनाई की शिकायत की थी। इसलिए घाट का नाम उनके नाम पर रखा गया है। यह भारत में निजी निधियों से निर्मित सार्वजनिक अवसंरचनाओं के कुछ उदाहरणों में से एक है।

अमरकंटक से निकलती है नर्मदा नदी
बता दें कि नर्मदा नदी मध्य भारत की एक प्रमुख पश्चिम-प्रवाही नदी है, जो अमरकंटक (मध्य प्रदेश) से निकलकर 1,312 किमी की यात्रा के बाद अरब सागर (खंभात की खाड़ी) में गिरती है। यह विंध्याचल और सतपुड़ा के बीच बहती है और मध्य प्रदेश-गुजरात की जीवनरेखा मानी जाती है।


