कटिहार के ललियाही मंदिर में चैत्र नवरात्रि:दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, असम के गुवाहाटी से आचार्य पंडित आए

कटिहार के ललियाही मंदिर में चैत्र नवरात्रि:दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, असम के गुवाहाटी से आचार्य पंडित आए

कटिहार सहित देश भर में चैत्र नवरात्रि का महापर्व मनाया जा रहा है। हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ यह नौ दिवसीय उत्सव मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। कटिहार के विभिन्न मंदिरों में चैती नवरात्रि को लेकर विशेष पूजा-अर्चना हो रही है। नवरात्रि के दूसरे दिन मंगलवार को मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की आराधना की जा रही है। यह स्वरूप पवित्रता, शांति और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी साधना और संयम की प्रेरणा देती हैं। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल होता है। विशेष सजावट और पूजा का आयोजन कटिहार के ललियाही स्थित सार्वजनिक चैती दुर्गा मंदिर चैत्र नवरात्रि के दौरान आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। यह मंदिर अपनी विशेष पूजा-अर्चना और सजावट के लिए जाना जाता है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष शेखर सिंह ने बताया कि कटिहार-मनिहारी मुख्य मार्ग पर स्थित इस मंदिर में पिछले 51 वर्षों से स्थानीय निवासियों के सहयोग से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर सार्वजनिक पूजा की जा रही है। वासंतिक नवरात्रि के दौरान यहां विशेष सजावट और पूजा का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। असम के गुवाहाटी से आए आचार्य पंडित हृदय कुमार झा माता की विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से चैत्र नवरात्रि में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल के रायगंज जिले से आए 12 कारीगरों द्वारा पूजा पंडाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसे अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस पंडाल का निर्माण लगभग 6 लाख रुपये की लागत से हो रहा है। कटिहार सहित देश भर में चैत्र नवरात्रि का महापर्व मनाया जा रहा है। हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ यह नौ दिवसीय उत्सव मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। कटिहार के विभिन्न मंदिरों में चैती नवरात्रि को लेकर विशेष पूजा-अर्चना हो रही है। नवरात्रि के दूसरे दिन मंगलवार को मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की आराधना की जा रही है। यह स्वरूप पवित्रता, शांति और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी साधना और संयम की प्रेरणा देती हैं। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल होता है। विशेष सजावट और पूजा का आयोजन कटिहार के ललियाही स्थित सार्वजनिक चैती दुर्गा मंदिर चैत्र नवरात्रि के दौरान आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। यह मंदिर अपनी विशेष पूजा-अर्चना और सजावट के लिए जाना जाता है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष शेखर सिंह ने बताया कि कटिहार-मनिहारी मुख्य मार्ग पर स्थित इस मंदिर में पिछले 51 वर्षों से स्थानीय निवासियों के सहयोग से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर सार्वजनिक पूजा की जा रही है। वासंतिक नवरात्रि के दौरान यहां विशेष सजावट और पूजा का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। असम के गुवाहाटी से आए आचार्य पंडित हृदय कुमार झा माता की विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से चैत्र नवरात्रि में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल के रायगंज जिले से आए 12 कारीगरों द्वारा पूजा पंडाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसे अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस पंडाल का निर्माण लगभग 6 लाख रुपये की लागत से हो रहा है।  

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