World Obesity Atlas 2026: World Obesity Federation की नई रिपोर्ट ने भारत के लिए बड़ी चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर अभी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो साल 2040 तक भारत में करीब 2 करोड़ बच्चे मोटापे (ओबेसिटी) के शिकार हो सकते हैं। इतना ही नहीं, 5 से 19 साल के करोड़ों बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षण दिख सकते हैं।
अभी क्या है स्थिति?
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ही भारत में 5-9 साल के लगभग 1.49 करोड़ बच्चे और 10-19 साल के 2.64 करोड़ से ज्यादा किशोर ओवरवेट या मोटापे से जूझ रहे हैं। यानी समस्या अभी से काफी गंभीर है। भारत उन देशों में शामिल है जहां सबसे ज्यादा बच्चे मोटापे का शिकार हैं। चीन, भारत और अमेरिका तीनों देशों में 2025 तक 1 करोड़ से ज्यादा बच्चे मोटापे के साथ जी रहे थे।
2040 तक क्या हो सकता है?
अगर हालात ऐसे ही रहे, तो 2040 तक 2 करोड़ बच्चे मोटापे के शिकार होंगे। 5.6 करोड़ बच्चे ओवरवेट या ओबेसिटी के साथ जी रहे होंगे। करीब 12 करोड़ बच्चों में हाई बीपी और दिल की बीमारी के शुरुआती संकेत मिल सकते हैं। इसके अलावा, हाई ट्राइग्लिसराइड, हाई शुगर और फैटी लिवर (अब जिसे MASLD कहा जाता है) जैसे मामलों में भी तेज बढ़ोतरी की आशंका है।
क्यों बढ़ रहा है बच्चों में मोटापा?
रिपोर्ट बताती है कि कई वजहें इसके लिए जिम्मेदार हैं। 11-17 साल के 74% बच्चे रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करते है। सिर्फ 35% बच्चों को स्कूल में पौष्टिक भोजन मिलता है। छोटे बच्चों में सही तरीके से स्तनपान न होना और जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों का बढ़ता चलन। साथ ही मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनहेल्दी फूड का ज्यादा प्रचार और शहरी जीवनशैली और बाहर के खाने की आदतें भी इस समस्या को बढ़ा रही हैं।
क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट?
फेडरेशन की सीईओ जोहाना राल्स्टन का कहना है कि बचपन का मोटापा अब सिर्फ अमीर देशों की समस्या नहीं रहा। अब कम और मध्यम आय वाले देशों में इसकी रफ्तार ज्यादा है। उन्होंने सरकारों से अपील की है कि मीठे पेय पदार्थों पर टैक्स लगाया जाए। बच्चों को जंक फूड के विज्ञापनों से बचाया जाए। स्कूलों में हेल्दी फूड स्टैंडर्ड लागू हों। फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ावा दिया जाए। मोटापे की रोकथाम को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल किया जाए।
आगे क्या?
2030 तक के ग्लोबल लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब सिर्फ 4 साल बचे हैं। अगर अभी सख्त नीतियां नहीं बनाई गईं, तो आने वाली पीढ़ी को डायबिटीज, दिल की बीमारी और दूसरी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।


