पटना के एक निजी होटल में सोमवार को ‘जलवायु अनुकूल बकरीपालन एवं प्रबंधन’ विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस कार्यक्रम में किसानों, पशुपालकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जहाँ बकरी पालन को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से अपनाने पर जोर दिया गया। राज्य सरकार ने बकरी पालकों को अनुदान देने की भी घोषणा की है। कार्यशाला के वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन को एक वैश्विक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़ और सूखे जैसी स्थितियाँ कृषि तथा पशुपालन दोनों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में जलवायु के अनुकूल बकरी पालन और बेहतर प्रबंधन तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। विशेषज्ञों ने इस कार्यशाला को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में, जहाँ बड़ी आबादी कृषि और पशुपालन पर निर्भर है, बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी माध्यम बन गया है। छोटे और सीमांत किसान, भूमिहीन परिवार तथा महिलाएँ बड़ी संख्या में इस व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। बकरी पालन को अक्सर ‘गरीब परिवारों का एटीएम’ कहा जाता है, क्योंकि आवश्यकता पड़ने पर किसान आसानी से बकरी बेचकर तत्काल आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। देश में बकरियों की कुल संख्या लगभग 12 करोड़ है, जो विश्व की कुल बकरियों का लगभग 20 प्रतिशत है। बिहार में बकरियों की संख्या लगभग 1.28 करोड़ है, जिससे यह राज्य संख्या के आधार पर देश में चौथे स्थान पर है। राज्य में बकरी पालन स्वरोजगार का एक प्रभावी माध्यम बन रहा है। सरकार दे रही अनुदान बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा समेकित बकरी एवं भेड़ विकास कार्यक्रम के तहत विभिन्न क्षमता के बकरी फार्म की स्थापना पर 50 से 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
इस योजना के तहत 20 बकरी + 1 बकरा, 40 बकरी + 2 बकरा, 100 बकरी + 5 बकरा तथा 500 बकरी + 25 बकरा क्षमता के फार्म स्थापित किए जा रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक कुल 3639 परिवारों को विभिन्न क्षमता के बकरी फार्म स्थापित करने में सहायता दी जा चुकी है। बीपीएल परिवारों को बकरियों का वितरण
बीपीएल परिवारों के बीच तीन प्रजनन योग्य बकरियों का वितरण भी अनुदानित दर पर किया जा रहा है। इस योजना में सामान्य वर्ग को 80 प्रतिशत और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के परिवारों को 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। अब तक 34,218 परिवारों को कुल 1,02,654 बकरियों का वितरण किया जा चुका है, जिससे उनकी आय में वृद्धि के साथ-साथ मांस की उपलब्धता भी बढ़ी है। राज्य में बढ़ा मांस उत्पादन
बिहार में वर्ष 2004-05 में जहां 176 हजार टन मांस का उत्पादन होता था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 404.30 हजार टन हो गया है। राज्य में प्रति व्यक्ति मांस की उपलब्धता भी बढ़कर 3.19 किलोग्राम हो चुकी है। गोट सिमेन बैंक की स्थापना होगी
बकरियों की नस्ल सुधार और उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य में गोट सिमेन बैंक की स्थापना की योजना को भी मंजूरी दी गई है। इसके माध्यम से बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नस्ल में सुधार, मेमनों की मृत्यु दर में कमी और उत्पादन में वृद्धि होगी।
वैज्ञानिक तरीके अपनाने पर जोर
कार्यशाला में किसानों से अपील की गई कि वे बकरी पालन को केवल पारंपरिक तरीके से नहीं बल्कि वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों के साथ अपनाएँ। सही प्रबंधन, बेहतर नस्ल और संतुलित पोषण के माध्यम से बकरी पालन ग्रामीण आजीविका का मजबूत स्तंभ बन सकता है। सरकार की आगे की योजना राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में बकरी पालन को एक सशक्त ग्रामीण उद्योग के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए—
* अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा
* आधुनिक बकरी फार्म स्थापित किए जाएंगे
* पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा
* कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दिया जाएगा
* बकरी उत्पादों के बेहतर बाजार और उचित मूल्य सुनिश्चित किए जाएंगे।
कार्यशाला के अंत में किसानों से आह्वान किया गया कि वे जलवायु अनुकूल बकरी पालन को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएँ, महिलाओं को सशक्त बनाएँ और बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई उंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दें। इस अवसर पर उद्घाटनकर्ता एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री डेयरी, मत्स्य एवं पशुपालन संसाधन विभाग सुरेंद्र मेहता, विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक एवं डेयरी मत्स्य एवं पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक राकेश बिहारी अंबस्ता मौजूद रहे। पटना के एक निजी होटल में सोमवार को ‘जलवायु अनुकूल बकरीपालन एवं प्रबंधन’ विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस कार्यक्रम में किसानों, पशुपालकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जहाँ बकरी पालन को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से अपनाने पर जोर दिया गया। राज्य सरकार ने बकरी पालकों को अनुदान देने की भी घोषणा की है। कार्यशाला के वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन को एक वैश्विक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़ और सूखे जैसी स्थितियाँ कृषि तथा पशुपालन दोनों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में जलवायु के अनुकूल बकरी पालन और बेहतर प्रबंधन तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। विशेषज्ञों ने इस कार्यशाला को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में, जहाँ बड़ी आबादी कृषि और पशुपालन पर निर्भर है, बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक प्रभावी माध्यम बन गया है। छोटे और सीमांत किसान, भूमिहीन परिवार तथा महिलाएँ बड़ी संख्या में इस व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। बकरी पालन को अक्सर ‘गरीब परिवारों का एटीएम’ कहा जाता है, क्योंकि आवश्यकता पड़ने पर किसान आसानी से बकरी बेचकर तत्काल आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। देश में बकरियों की कुल संख्या लगभग 12 करोड़ है, जो विश्व की कुल बकरियों का लगभग 20 प्रतिशत है। बिहार में बकरियों की संख्या लगभग 1.28 करोड़ है, जिससे यह राज्य संख्या के आधार पर देश में चौथे स्थान पर है। राज्य में बकरी पालन स्वरोजगार का एक प्रभावी माध्यम बन रहा है। सरकार दे रही अनुदान बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा समेकित बकरी एवं भेड़ विकास कार्यक्रम के तहत विभिन्न क्षमता के बकरी फार्म की स्थापना पर 50 से 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
इस योजना के तहत 20 बकरी + 1 बकरा, 40 बकरी + 2 बकरा, 100 बकरी + 5 बकरा तथा 500 बकरी + 25 बकरा क्षमता के फार्म स्थापित किए जा रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक कुल 3639 परिवारों को विभिन्न क्षमता के बकरी फार्म स्थापित करने में सहायता दी जा चुकी है। बीपीएल परिवारों को बकरियों का वितरण
बीपीएल परिवारों के बीच तीन प्रजनन योग्य बकरियों का वितरण भी अनुदानित दर पर किया जा रहा है। इस योजना में सामान्य वर्ग को 80 प्रतिशत और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के परिवारों को 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। अब तक 34,218 परिवारों को कुल 1,02,654 बकरियों का वितरण किया जा चुका है, जिससे उनकी आय में वृद्धि के साथ-साथ मांस की उपलब्धता भी बढ़ी है। राज्य में बढ़ा मांस उत्पादन
बिहार में वर्ष 2004-05 में जहां 176 हजार टन मांस का उत्पादन होता था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 404.30 हजार टन हो गया है। राज्य में प्रति व्यक्ति मांस की उपलब्धता भी बढ़कर 3.19 किलोग्राम हो चुकी है। गोट सिमेन बैंक की स्थापना होगी
बकरियों की नस्ल सुधार और उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य में गोट सिमेन बैंक की स्थापना की योजना को भी मंजूरी दी गई है। इसके माध्यम से बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नस्ल में सुधार, मेमनों की मृत्यु दर में कमी और उत्पादन में वृद्धि होगी।
वैज्ञानिक तरीके अपनाने पर जोर
कार्यशाला में किसानों से अपील की गई कि वे बकरी पालन को केवल पारंपरिक तरीके से नहीं बल्कि वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों के साथ अपनाएँ। सही प्रबंधन, बेहतर नस्ल और संतुलित पोषण के माध्यम से बकरी पालन ग्रामीण आजीविका का मजबूत स्तंभ बन सकता है। सरकार की आगे की योजना राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में बकरी पालन को एक सशक्त ग्रामीण उद्योग के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए—
* अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा
* आधुनिक बकरी फार्म स्थापित किए जाएंगे
* पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा
* कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दिया जाएगा
* बकरी उत्पादों के बेहतर बाजार और उचित मूल्य सुनिश्चित किए जाएंगे।
कार्यशाला के अंत में किसानों से आह्वान किया गया कि वे जलवायु अनुकूल बकरी पालन को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएँ, महिलाओं को सशक्त बनाएँ और बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई उंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दें। इस अवसर पर उद्घाटनकर्ता एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मंत्री डेयरी, मत्स्य एवं पशुपालन संसाधन विभाग सुरेंद्र मेहता, विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक एवं डेयरी मत्स्य एवं पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक राकेश बिहारी अंबस्ता मौजूद रहे।


