जलशक्ति मंत्रालय भारत सरकार की देखरेख में भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से संचालित दस दिवसीय प्राकृतिक सौंदर्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। कुंभी में आयोजित इस विशेष शिविर के समापन पर चेरिया बरियारपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी निरंजन कुमार ने सभी प्रशिक्षुओं के बीच प्रमाणपत्रों का वितरण किया। प्रमाणपत्र वितरण समारोह को संबोधित करते हुए बीडीओ निरंजन कुमार ने कहा कि भारतीय वन्यजीव संस्थान का यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम भी है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी की निर्मलता बनाए रखना है। इसके साथ-साथ नदी किनारे बसे समुदायों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण हासिल करना केवल शुरुआत है। अब आप सभी 35 प्रशिक्षित महिलाएं इस कौशल को धरातल पर उतारें। अपने हुनर का उपयोग अपने जीवन स्तर को सुदृढ़ करने के लिए करें। आप आत्मनिर्भर बनेंगी और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहें। दस दिनों तक तकनीकी कौशल से अवगत कराएं तभी इस प्रशिक्षण की असली सार्थकता सिद्ध होगी। आप सबको इस प्रशिक्षण के दौरान प्रकृति आधारित सौंदर्य सामग्रियों और अन्य घरेलू उत्पादों के निर्माण की बारीकियां सिखाई गई है। संस्थान का लक्ष्य है कि लोग गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाए बिना स्थानीय संसाधनों से अपनी आजीविका चला सकें। इसके लिए कदम आगे बढ़ाएं। भारतीय वन्यजीव संस्थान के ट्रेनर विभा रावत ने कहा कि आप सभी को दस दिनों तक तकनीकी कौशल से अवगत कराया गया है। इससे न केवल स्वरोजगार अपनाएं, बल्कि गंगा प्रहरी के रूप में नदी की स्वच्छता के लिए ग्रामीणों को भी जागरूक करें। मौके पर असिस्टेंट को-ऑर्डिनेटर राहुल राज, गंगा प्रहरी रोजिदा खातून और लक्ष्मी कुमारी सहित अन्य उपस्थित थे। जलशक्ति मंत्रालय भारत सरकार की देखरेख में भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से संचालित दस दिवसीय प्राकृतिक सौंदर्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। कुंभी में आयोजित इस विशेष शिविर के समापन पर चेरिया बरियारपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी निरंजन कुमार ने सभी प्रशिक्षुओं के बीच प्रमाणपत्रों का वितरण किया। प्रमाणपत्र वितरण समारोह को संबोधित करते हुए बीडीओ निरंजन कुमार ने कहा कि भारतीय वन्यजीव संस्थान का यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम भी है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी की निर्मलता बनाए रखना है। इसके साथ-साथ नदी किनारे बसे समुदायों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण हासिल करना केवल शुरुआत है। अब आप सभी 35 प्रशिक्षित महिलाएं इस कौशल को धरातल पर उतारें। अपने हुनर का उपयोग अपने जीवन स्तर को सुदृढ़ करने के लिए करें। आप आत्मनिर्भर बनेंगी और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहें। दस दिनों तक तकनीकी कौशल से अवगत कराएं तभी इस प्रशिक्षण की असली सार्थकता सिद्ध होगी। आप सबको इस प्रशिक्षण के दौरान प्रकृति आधारित सौंदर्य सामग्रियों और अन्य घरेलू उत्पादों के निर्माण की बारीकियां सिखाई गई है। संस्थान का लक्ष्य है कि लोग गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाए बिना स्थानीय संसाधनों से अपनी आजीविका चला सकें। इसके लिए कदम आगे बढ़ाएं। भारतीय वन्यजीव संस्थान के ट्रेनर विभा रावत ने कहा कि आप सभी को दस दिनों तक तकनीकी कौशल से अवगत कराया गया है। इससे न केवल स्वरोजगार अपनाएं, बल्कि गंगा प्रहरी के रूप में नदी की स्वच्छता के लिए ग्रामीणों को भी जागरूक करें। मौके पर असिस्टेंट को-ऑर्डिनेटर राहुल राज, गंगा प्रहरी रोजिदा खातून और लक्ष्मी कुमारी सहित अन्य उपस्थित थे।


