Women’s Day Special: पहली पत्नी के रहते पति ने रचा ली दूसरी शादी? तो घबराएं नहीं, जानें अपने ये कानूनी अधिकार

Women’s Day Special: पहली पत्नी के रहते पति ने रचा ली दूसरी शादी? तो घबराएं नहीं, जानें अपने ये कानूनी अधिकार

Women’s Day Special: शादी को भारत में भरोसे, सम्मान और जिम्मेदारी पर आधारित एक पवित्र रिश्ता माना जाता है। लेकिन कई बार कुछ लोग इस भरोसे का गलत फायदा उठा लेते हैं। आए दिन खबरों में ऐसे कई मामले सामने आते हैं जहां कोई आदमी अपनी पहली शादी की बात छुपाकर दूसरी महिला से शादी कर लेता है। या फिर कई बार ऐसा भी होता है कि कोई आदमी अपनी पसंद से शादी करने के बाद भी घरवालों के दबाव में आकर किसी दूसरी लड़की से शादी कर लेता है। लेकिन जब बाद में सच्चाई सामने आती है, तो वह आदमी यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करता है कि दूसरी शादी कानून के हिसाब से मान्य नहीं है, इसलिए वह उस महिला को खर्चा (maintenance) नहीं देगा। ऐसी स्थिति में महिला को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं को क्या करना चाहिए आइए एडवोकेट बुशरा अमन खान से जानते हैं, जो इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं।

क्या था मामला (Facts of the Case)

एडवोकेट बुशरा अमन खान इस केस से जुड़े एक मामले के बारे में बताते हुए Badshah v. Urmila Badshah Godse केस का जिक्र करती हैं कि एक आदमी पहले से शादीशुदा था, लेकिन उसने अपनी पहली शादी की बात छुपाकर दूसरी महिला से शादी कर ली। उस महिला को यह नहीं पता था कि वह आदमी पहले से शादीशुदा है। कुछ समय बाद दोनों के बीच विवाद हुआ और आदमी ने उस महिला को छोड़ दिया। जब महिला ने खर्चा मांगा, तो आदमी ने यह कहकर मना कर दिया कि दूसरी शादी कानून के अनुसार वैध नहीं है, इसलिए वह उसे खर्चा देने के लिए जिम्मेदार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Judgment)

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण और इंसानी नजरिया अपनाया। अदालत ने कहा कि अगर किसी महिला ने पूरी ईमानदारी और अच्छे भरोसे के साथ शादी की है और उसे यह पता नहीं था कि आदमी पहले से शादीशुदा है, तो उसे उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून का मकसद केवल तकनीकी आधार पर फैसला देना नहीं है, बल्कि न्याय दिलाना भी है। अगर किसी आदमी को यह छूट दे दी जाए कि वह अपनी पहली शादी छुपाकर दूसरी शादी करे और बाद में उसी आधार पर जिम्मेदारी से बच जाए, तो यह कानून की भावना के खिलाफ होगा।

कानूनी सिद्धांत (Legal Principle)

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह साफ किया कि कोई भी आदमी अपने ही गलत काम का फायदा नहीं उठा सकता। अगर किसी आदमी ने अपनी पहली शादी छुपाकर दूसरी शादी की है, तो वह बाद में यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि शादी वैध नहीं है। कानून का मकसद यह है कि जो व्यक्ति निर्दोष है और जिसके साथ धोखा हुआ है, उसकी रक्षा की जाए।

खर्चा पाने का अधिकार (Right to Maintenance)

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि ऐसी महिला दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 (Section 125 CrPC) के तहत खर्चा मांग सकती है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी महिला ने बिना सच्चाई जाने और अच्छे भरोसे में शादी की है और बाद में पता चलता है कि उसका पति पहले से शादीशुदा था, तो वह महिला अपने गुजारे के लिए अदालत से खर्चा पाने का अधिकार रखती है।
इस फैसले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ संदेश दिया कि कोई भी आदमी अपने ही गलत काम का फायदा नहीं उठा सकता। अगर किसी महिला के साथ धोखा करके शादी की गई है, तो कानून उसे असहाय नहीं छोड़ेगा।

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