हजारीबाग के कटकमसांडी की महिलाएं खेती कर बनी आत्मनिर्भरता:मिश्रित फसल पद्धति से खेत का किया बेहतर उपयोग, बढ़ी किसानों की आमदनी‎

हजारीबाग के कटकमसांडी की महिलाएं खेती कर बनी आत्मनिर्भरता:मिश्रित फसल पद्धति से खेत का किया बेहतर उपयोग, बढ़ी किसानों की आमदनी‎

कटकमसांडी प्रखंड के डांड़ पंचायत अंतर्गत गोसी गांव की महिलाएं‎ अब कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार की नई मिसाल पेश कर रही हैं। यहां परी सखी महिला मंडल की 11‎ सदस्याएं इंटर क्रॉपिंग (मिश्रित फसल पद्धति) के माध्यम से बहुफसली खेती का सफल मॉडल विकसित कर रही‎ हैं। इससे न केवल आय के स्रोत बढ़े हैं, बल्कि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। समूह की सदस्य ममता‎ देवी, साबो देवी, चिंता देवी, धनेश्वरी देवी और खगिया देवी सहित अन्य महिलाएं 5 एकड़ से अधिक भूमि में‎ केला, अनानास, अमरूद, आम, पपीता जैसी फलदार फसलों के साथ-साथ पत्ता गोभी, आलू, शिमला मिर्च,‎ प्याज, चना, मटर, फुलगोभी और पालक की खेती कर रही हैं। इंटर क्रॉपिंग से जमीन‎ का बेहतर उपयोग महिलाओं का कहना है कि इंटर क्रॉपिंग से जमीन‎ का बेहतर उपयोग होता है और एक ही खेत से अलग-अलग समय पर कई फसलों की पैदावार मिलती है। इससे‎ जोखिम घटता है और आय में स्थिरता बनी रहती है। फलदार पौधे धीरे-धीरे पेड़ का रूप ले रहे हैं, जो भविष्य में‎ दीर्घकालिक आमदनी का मजबूत आधार बनेंगे। साथ ही खेतों में हरियाली बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को भी‎ बढ़ावा मिल रहा है। महिला किसानों का कहना है कि अब मिश्रित एवं वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से नियमित आय‎ प्राप्त हो रही है। प्याज की खेती बना वरदान मिश्रित खेती के तहत प्याज की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो‎ रही है।इससे प्रतिवर्ष किसानों में 50 हजार से एक लाख रुपए तक कि आमदनी हो रही है जिससे महिला किसान‎ आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन रही और अपने जीवन स्तर को बेहतर बना रही है। परी महिला मंडल की अध्यक्ष‎ ममता देवी ने महिलाओं को मिश्रित कृषि के लाभों से जागरूक किया और उन्हें समूह से जोड़कर आधुनिक व‎ वैकल्पिक खेती की दिशा में अग्रसर किया। इससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।‎ तकनीक की जानकारी देते हैं एक्सपर्ट‎ इंटर क्रॉपिंग मॉडल को सफल बनाने में एचसीएल फाउंडेशन तथा लीड्स संस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।‎ संस्था की ओर से समय-समय पर प्रशिक्षण, खेत भ्रमण एवं उन्नत कृषि तकनीक की जानकारी उपलब्ध कराई जा‎ रही है। इस मॉडल में फलदार पौधों के साथ सब्जी एवं नगदी फसलों का संयोजन किया गया है, जिससे हर मौसम‎ में उत्पादन और आय का प्रवाह बना रहता है। जैविक खाद, प्राकृतिक नमी संरक्षण और फसल विविधता के कारण‎ मिट्टी की उर्वरता भी सुरक्षित है।‎ जानिए… कौन हैं आलोक वर्मा‎ आलोक वर्मा लीड्स परियोजना कटकमसांडी के समन्वयक हैं। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसानों,‎ विशेषकर महिला किसानों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है। इंटर क्रॉपिंग से उनकी आय में वृद्धि हो रही है। वे वैज्ञानिक कृषि पद्धति सीखकर अपने निर्णय स्वयं लेने लगी हैं। इससे उनके आत्मविश्वास में भी अभूतपूर्व‎ बढ़ोतरी हुई है। वे बराबर गांव के किसानों से संपर्क में रहकर उन्हें खेती की उन्नत तकनीक से अवगत कराते रहते‎ हैं। उनका मानना है कि छोटे-छोटे किसानों की आय बढ़ाना मुख्य उद्देश्य है।‎ कटकमसांडी प्रखंड के डांड़ पंचायत अंतर्गत गोसी गांव की महिलाएं‎ अब कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार की नई मिसाल पेश कर रही हैं। यहां परी सखी महिला मंडल की 11‎ सदस्याएं इंटर क्रॉपिंग (मिश्रित फसल पद्धति) के माध्यम से बहुफसली खेती का सफल मॉडल विकसित कर रही‎ हैं। इससे न केवल आय के स्रोत बढ़े हैं, बल्कि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। समूह की सदस्य ममता‎ देवी, साबो देवी, चिंता देवी, धनेश्वरी देवी और खगिया देवी सहित अन्य महिलाएं 5 एकड़ से अधिक भूमि में‎ केला, अनानास, अमरूद, आम, पपीता जैसी फलदार फसलों के साथ-साथ पत्ता गोभी, आलू, शिमला मिर्च,‎ प्याज, चना, मटर, फुलगोभी और पालक की खेती कर रही हैं। इंटर क्रॉपिंग से जमीन‎ का बेहतर उपयोग महिलाओं का कहना है कि इंटर क्रॉपिंग से जमीन‎ का बेहतर उपयोग होता है और एक ही खेत से अलग-अलग समय पर कई फसलों की पैदावार मिलती है। इससे‎ जोखिम घटता है और आय में स्थिरता बनी रहती है। फलदार पौधे धीरे-धीरे पेड़ का रूप ले रहे हैं, जो भविष्य में‎ दीर्घकालिक आमदनी का मजबूत आधार बनेंगे। साथ ही खेतों में हरियाली बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को भी‎ बढ़ावा मिल रहा है। महिला किसानों का कहना है कि अब मिश्रित एवं वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से नियमित आय‎ प्राप्त हो रही है। प्याज की खेती बना वरदान मिश्रित खेती के तहत प्याज की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो‎ रही है।इससे प्रतिवर्ष किसानों में 50 हजार से एक लाख रुपए तक कि आमदनी हो रही है जिससे महिला किसान‎ आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन रही और अपने जीवन स्तर को बेहतर बना रही है। परी महिला मंडल की अध्यक्ष‎ ममता देवी ने महिलाओं को मिश्रित कृषि के लाभों से जागरूक किया और उन्हें समूह से जोड़कर आधुनिक व‎ वैकल्पिक खेती की दिशा में अग्रसर किया। इससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।‎ तकनीक की जानकारी देते हैं एक्सपर्ट‎ इंटर क्रॉपिंग मॉडल को सफल बनाने में एचसीएल फाउंडेशन तथा लीड्स संस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।‎ संस्था की ओर से समय-समय पर प्रशिक्षण, खेत भ्रमण एवं उन्नत कृषि तकनीक की जानकारी उपलब्ध कराई जा‎ रही है। इस मॉडल में फलदार पौधों के साथ सब्जी एवं नगदी फसलों का संयोजन किया गया है, जिससे हर मौसम‎ में उत्पादन और आय का प्रवाह बना रहता है। जैविक खाद, प्राकृतिक नमी संरक्षण और फसल विविधता के कारण‎ मिट्टी की उर्वरता भी सुरक्षित है।‎ जानिए… कौन हैं आलोक वर्मा‎ आलोक वर्मा लीड्स परियोजना कटकमसांडी के समन्वयक हैं। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसानों,‎ विशेषकर महिला किसानों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है। इंटर क्रॉपिंग से उनकी आय में वृद्धि हो रही है। वे वैज्ञानिक कृषि पद्धति सीखकर अपने निर्णय स्वयं लेने लगी हैं। इससे उनके आत्मविश्वास में भी अभूतपूर्व‎ बढ़ोतरी हुई है। वे बराबर गांव के किसानों से संपर्क में रहकर उन्हें खेती की उन्नत तकनीक से अवगत कराते रहते‎ हैं। उनका मानना है कि छोटे-छोटे किसानों की आय बढ़ाना मुख्य उद्देश्य है।‎  

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