Heart Attack High Risk Dil ka Sach Part 7: दिल का सच सीरीज के पिछले पार्ट्स में हमने जाना कि दिल की बीमारियां कभी भी एक दिन या अचानक नहीं होती हैं। बल्कि इनकी शुरुआत से अचानक सामने आना एक लंबी प्रक्रिया का नतीजा होती है। इसकी शुरुआत बचपन या किशोर अवस्था से ही हो जाती है। लेकिन जब आंकड़ों और मेडिकल ऑब्जर्वेशन को देखा जाता है, तो एक दिलचस्प फर्क सामने आता है और वह यह है कि पुरुषों और महिलाओं में हार्ट अटैक का पैटर्न या ब्लॉकेज का पैटर्न अलग-अगल होता है। पुरुषों में जहां दिल में प्लाक या ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया जल्दी शुरू हो जाती है। वहीं महिलाओं में यह प्रक्रिया कई साल बाद दिखाई देती है।
प्लाक या ब्लॉकेज के इस अलग-अलग पैटर्न पर हमने बात की भोपाल एम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विक्रम वाटी और निजी क्लिनिक के डॉ. विनोद कोठारी से… जाने क्या कहते हैं ये हार्ट एक्सपर्ट्स
कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि यह अंतर सिर्फ एक संयोग नहीं है, बल्कि शरीर के अंदर काम करने वाले कई जैविक और सामाजिक कारणों का नतीजा है।
हार्मोनल ढाल है ‘एस्ट्रोजन’, जाने कैसे करता है काम
भोपाल के इन कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक महिलाओं के शरीर में पाया जाने वाला एक खास हार्मोन है एस्ट्रोजन। दिल की सेहत में यह अहम भूमिका निभाता है। यह हार्मोन कई स्तर पर सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। खून की नसों को लचीला बनाने में मदद करता है। खराब कॉलेस्ट्रॉल का असर कम करता है। वहीं शरीर या नसों में बनी रहने वाली सूजन को नियंत्रित करता है। इसीलिए महिलाओं में नसों के अंदर चिपचिपा पदार्थ यानी प्लाक या ब्लॉकेज बनने की गति बेहद धीमी होती है। यही कारण है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को दिल की बीमारी (Heart Attack High Risk) का खतरा औसतन 10-20 साल बाद महसूस होता है।
लाइफस्टाइल का अंतर भी बड़ा कारण
भारत जैसे देश में जहां समाज में एक और बड़ा महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है, जीवनशैली का अंतर। पुरुषों में धूम्रपान और शराब सेवन की लत ज्यादा देखने में आती है। महिलाओं में ऐसे मामलों का प्रतिशत काफी कम है। तंबाकू और शराब दोनों ही नसों में सूजन को बढ़ाते हैं। जिससे प्लाक या ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया तेज रहती है। लाइफस्टाइल के रूप में ये बड़ा अंतर महिलाओं और पुरुषों के दिल की सेहत (Heart Attack High Risk) का भविष्य बताता है। महिलाएं ऐसी लाइफस्टाइल के कारण दिल को ज्यादा सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।

उम्र और जिम्मेदारियों के साथ शादी की उम्र का अंतर भी जिम्मेदार
समाज में लंबे समय से एक पैटर्न देखने को मिलता रहा है। पति की उम्र पत्नी से अधिक होना। यह अंतर अक्सर 4-6 साल का रहता है। इसका सीधा असर दिल की बीमारियों के समय पड़ता है। पुरुष पहले उस पड़ाव पर पहुंच जाते हैं, जहां दिल की बीमारी का खतरा (Heart Attack High Risk) ज्यादा है। महिलाएं उसी समय अपेक्षाकृत उनसे उम्र में छोटी होती हैं। यही कारण है कि एक ही पारिवारिक परिस्थिति में भी महिलाओं की शारीरिक सहनशक्ति ज्यादा समय तक बनी रहती है।
पीरियड्स सिर्फ एक जैविक प्रक्रिया नहीं, शरीर का अतिरिक्त संतुलन
महिलाओं के शरीर में हर महीने होने वाली मासिक प्रक्रिया या पीरियड्स को आमतौर पर सिर्फ प्रजनन से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन इसके कुछ ऐसे अप्रत्यक्ष फायदे भी हैं। इन फायदों के लंबे समय तक शरीर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। आयरन का स्तर नियंत्रित करते हैं। खून का नियमित रिन्यूअल होता है। कुछ अपशिष्ट तत्व बाहर निकलते रहते हैं। हालांकि मेडिकल साइंस के रूप में देखें तो ‘टॉक्सिन रिमूवल’ का मुख्य काम लिवर किडनी करते हैं। लेकिन महिलाओं में होने वाली यह प्रक्रिया शरीर के संतुलन को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पुरुषों में कहां रह जाती है कमी?
पुरुषों के शरीर में लिवर और किडनी पूरी क्षमता से काम करते हैं, लेकिन उनके पास ऐसा कोई अतिरिक्त प्राकृतिक चक्र नहीं होता जो नियमित रूप से खून के घटकों में बदलाव लाए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पुरुषों का शरीर कमजोर है, बल्कि, यह महिलाओं को एक अतिरिक्त जैविक लाभ मिलता है, जो लंबे समय में असर दिखाता है।
मेनोपॉज के बाद बढ़ता है खतरा
महिलाओं में पीरियड्स की यह प्राकृतिक सुरक्षा हमेशा नहीं रहती। एक समय के बाद महिलाओं की यह अवस्था मेनोपॉज में आ जाती है। यानी पीरियड्स बंद हो जाते हैं और उनकी यह अतिरिक्त सुरक्षा ढाल गिर जाती है। यह अवस्था ऐसी है, जब एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से गिरता जाता है। बस यहीं से महिलाओं में प्लाक या ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया गति बढ़ सकती है। नसों में लचक कम होने लगती है। हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ता है। यही कारण है कि 50 साल की उम्र के बाद महिलाओं में दिल की बीमारियां तेजी बढ़ती नजर आती है।

धीमा खतरा लेकिन गंभीर परिणाम, महिलाओं में हार्ट अटैक का पैटर्न अलग
महिलाओं में दिल की बीमारियां देर से शुरू होती हैं। लेकिन इसके लक्षण अक्सर अलग और कम स्पष्ट होते हैं। सीने में तेज दर्द हमेशा नहीं होता, थकान, सांस फूलना, बेचैनी जैसे संकेत पाए जाते हैं। कई बार बीमारी पहचानने में ही देर हो जाती है। इस वजह से महिलाओं में हार्ट अटैक का पता अक्सर देर से चलता है, जो जोखिम को और बढ़ा देता है।

यहां समझना जरूरी है कि महिलाओं की प्राकृतिक सुरक्षा ढाल चूंकि हमेशा नहीं रहती, इसलिए उनका खानपान खराब नहीं होना चाहिए, शारीरिक गतिविधि को हमेशा बनाए रखें। ज्यादा स्ट्रेस न हो, तो यह बीमारी गति नहीं पकड़ेगी। लेकिन आपकी जरा सी लापरवाही का परिणाम उतना ही गंभीर भी हो सकता है।
Healthy Heart Dil ka Sach series part 7 की यह रोचक जानकारी आपको कैसी लगी। हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। सीरीज के अगले पार्ट 8 में हम आपको बताएंगे दिल के नये राज… तो रहें तैयार.. और जानने के लिए जुड़े रहिए patrika.com के साथ


