जमीन पर गिरती गईं महिलाएं, नालंदा भगदड़ का VIDEO:कुछ बांस की बैरिकेडिंग पकड़े दिखीं, खींचकर निकालने रहे परिजन; अब तक 9 मौतें

जमीन पर गिरती गईं महिलाएं, नालंदा भगदड़ का VIDEO:कुछ बांस की बैरिकेडिंग पकड़े दिखीं, खींचकर निकालने रहे परिजन; अब तक 9 मौतें

नालंदा में मंगलवार को शीतला माता मंदिर में भगदड़ के बाद 9 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में 8 महिलाएं है। इनमें ज्यादातर नालंदा के ही रहने वाले हैं। वहीं एक व्यक्ति की भी जान गई है, उनकी पहचान नहीं हो पाई है। घटना दीपनगर थाना क्षेत्र के मघड़ा गांव की है। चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचे थे, लेकिन भीड़ को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा मौजूद नहीं था। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, मंदिर परिसर छोटा था। इसी बीच लोगों में पहले दर्शन करने की होड़ लग गई। लोग कतार में लगने की बजाए धक्का-मुक्की करके आगे बढ़ने लगे। अफरा-तफरी के बीच भीड़ बढ़ती चली गई। इसके बाद भगदड़ की स्थिति बन गई। कई लोग भीड़ के नीचे दब गए। चश्मदीदों के मुताबिक, 6-7 मिनट में जमीन पर लाशें बिछ गईं। किसी की बेटी के सामने मां ने दम तोड़ दिया तो किसी की सहेली को भीड़ कुचलते हुए निकल गई। हादसा कैसे हुआ, मौके पर मौजूद लोगों ने क्या बताया, बिहार DGP का क्या कहना है, सिलसिलेबार पढ़िए भगदड़ की पूरी कहानी… राष्ट्रपति की सुरक्षा में 2500 जवान, 25 हजार की भीड़ से प्रशासन गायब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को नालंदा दौरे पर थीं। वे नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति शामिल हुईं। उनकी सुरक्षा में 8 जिलों के 2500 जवानों को लगाया गया था, जबकि मंदिर में जुटी 25 हजार की भीड़ के लिए एक भी पुलिस वाले की तैनाती नहीं थी। मंदिर में भीड़ ज्यादा थी। जबकि मंदिर का गर्भ गृह काफी छोटा है, जहां एक साथ 20 भक्तों से ज्यादा लोगों के खड़े होने की जगह नहीं है। भीड़ बढ़ने के कारण गर्भ गृह में क्षमता से बहुत ज्यादा लोग थे। मंदिर के बाहर मेला लगा था। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के 40 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची हादसे के बाद पटना कमिश्नर को बिहार शरीफ भेजा गया। सीएम ने मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। दीपनगर थाने के SHO राजमणि को सस्पेंड कर दिया गया। सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 6 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। वहीं केंद्र सरकार ने 2 लाख के मुआवजे की घोषणा की है। हादसे के समय और बाद की कुछ तस्वीरें देखिए… जानिए चश्मदीदों ने क्या कहा चश्मदीद बोले- दर्शन की जल्दबाजी में मची भगदड़ महिला श्रद्धालू ने बताया कि चैत्र महीने का ये आखिरी मंगलवार है। यहां मेला लगा था। भीड़ ज्यादा हो गई। मंदिर का गर्भगृह भी छोटा है। लोग जल्दी-जल्दी दर्शन करने के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में थे। कोई लाइन में लगकर पूजा नहीं करना चाह रहा था। दूसरे श्रद्धालु ने बताया, “सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया था। मंदिर के अंदर भारी भीड़ थी। पुलिस का जवान अंदर तैनात नहीं था। भीड़ को डायवर्ट करने या दो लाइनों में बांटने की कोई व्यवस्था नहीं थी। मंदिर के पुजारी ही जल्दी-जल्दी दर्शन कर निकलने को कह रहे थे। इस बीच एक महिला को चक्कर आ गया, जिससे वो वहीं गिर पड़ी। कुछ लोग उसे संभालने लगे, और भीड़ को पीछे करने की कोशिश की। इस दौरान भगदड़ मच गई।” 50 से ज्यादा महिलाएं जमीन पर गिरीं, कुछ बेहोश थीं चश्मदीद पंकज कुमार ने बताया, ” मैं पूरी ताकत लगाकर एक खंभे के पास पहुंचकर खुद को संभाला। वहां से जो मौत का मंजर देखा वो कभी भूल नहीं सकता। कम से कम 50 महिलाएं जमीन पर गिरी होंगी, कुछ बेहोश थीं, कुछ हिल भी नहीं रही थीं। उनको लोग कुचलते हुए गुजर रहे थे। कुछ लोग चिल्ला रहे थे- पीछे हटो-पीछे हटो, लेकिन भीड़ को पता ही नहीं था कि आगे क्या हो रहा है। करीब 20 मिनट तक यही हालत रही। इसके बाद लोग गिरी हुई महिलाओं को उठाने लगे। मैंने भी एक महिला को उठाने में मदद की। वो बेहोश थी। उसके हाथ ठंडे हो चुके थे। लोग चिल्लाने लगे कि जल्दी एंबुलेंस बुलाओ। बड़ी बात यह है कि अभी तक भी कोई पुलिस वाला यहां नहीं पहुंचा था। लोग फोन कर रहे थे, लेकिन एंबुलेंस आने में काफी देर लग गई। इस बीच कुछ लोग ई-रिक्शा से ही घायलों को अस्पताल ले जाने लगे। 40 मिनट बाद पहुंची एंबुलेंस मंदिर में मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया, “भगदड़ के बाद कई महिलाएं बेहोश पड़ीं थीं। कुछ दर्द से चिल्ला रहीं थीं। लोगों ने पुलिस को खबर की। पहले 2-3 पुलिस वाले पहुंचे। उनके साथ मिलकर श्रद्धालुओं ने घायल महिलाओं को किनारे लिटाया। कई बार एंबुलेंस के लिए फोन किया गया। घटना के करीबब 40 मिनट बाद पहली एंबुलेंस पहुंची और पुलिस के कुछ अफसर भी आए। इसके बाद घायलों को अस्पताल भिजवाया गया। महिलाओं को उठाते समय ही लग रहा था कि उनमें से कुछ की मौत हो गई है।” मां से कहा निकल जाते हैं, नहीं मानी, सीढ़ियों में गिरकर दब गई शीतला मंदिर में अपनी मां के साथ पूजा करने आई पूनम कुमारी ने बताया, “पुजारी भी किसी को नहीं हटा रहे थे। लोग एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे। मैंने मां से कहा कि यहां से निकल जाओ। मम्मी नहीं मानीं, बोली बस पहुंच ही गए हैं, पूजा करके जाएंगे। पीछे से लोग धकेलने लगे। मम्मी सीढ़ी के नीचे दब गई। मेरी आंखों के सामने मां की जान चली गई।” लापरवाही के तीन बड़़े कारण 1. मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्था नहीं की आज चैत्र का आखिरी मंगलवार है। मघड़ा शीतला मंदिर में इस दिन हर साल भीड़ होती है, मंदिर प्रबंधन को इस बात की जानकारी थी, इसके बाद भी भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए अलग से कोई इंतजाम नहीं किया गया था। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग तक नहीं की गई थी। सुबह 8 से 9 बजे के बीच भीड़ अव्यवस्थित हो गई। 2. चोर दरवाजे से दर्शन कराए जा रहे थे बढ़ती भीड़ को कंट्रोल करने की बजाए मंदिर प्रबंधन और वहां मौजूद पुजारी फायदा उठा रहे थे। वे लोगों से पैसा लेकर पीछे के दरवाजे से माता का दर्शन कराने लगे। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं था, ये अपनी मनमानी कर रहे थे। इसके कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती चली गई। 3. 25 हजार की भीड़, पुलिस- प्रशासन की कोई व्यवस्था नहीं मंदिर परिसर में न तो सुरक्षा का कोई इंतजाम था और न ही भीड़ को कंट्रोल करने के लिए किसी पुलिसकर्मी को तैनात किया गया था। मेले की पहले से जानकारी होने के बाद भी प्रशासन की तरफ से यहां किसी मजिस्ट्रेट को तैनात नहीं किया गया था। घटना स्थल से 30KM की दूरी पर राष्ट्रपति आने वाली थीं, वहां 8 जिले के ढाई हजार जवान तैनात किए गए थे। अब जानिए हादसे के बाद जिम्मेदारों ने क्या कहा DGP ने माना- मंदिर में पुलिस की टीम होनी चाहिए थी मंदिर का निरीक्षण करने के बाद DGP विनय कुमार ने माना कि मंदिर में हजारों-लाखों की भीड़ होती है। यहां पुलिस की टीम होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “नालंदा डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है। मंदिर की व्यवस्था में कई कमियां सामने आई हैं। सीढ़ियों पर इतनी फिसलन है कि कोई भी गिर सकता है। आने-जाने के रास्तों में भी बदलाव की जरूरत है।” उन्होंने बताया कि न्यास परिसर के चेयरमैन रणवीर नंदन से भी बातचीत हुई है। यहां कभी-कभी लाखों की भीड़ होती है, जबकि आज करीब 25 हजार लोग मौजूद थे। ऐसी स्थिति में पुलिस बल की तैनाती जरूरी थी। लापरवाही के कारण SHO को सस्पेंड किया गया है। धक्का-मुक्की से कम, डिहाइड्रेशन से ज्यादा मौत हुई हैं- ADG कुंदन कृष्णन ADG कुंदन कृष्णन लॉ एंड आर्डर ने कहा, “दुखद घटना हुई है। कुव्यवस्था मंदिर परिसर में थी। लोग बेहोश होकर गिर गए थे। रास्ते में दुकान लगी थी। एंबुलेंस को आने में भी दिक्कत हुई है। मंदिर के पुजारी की लापरवाही है। प्रशासन को कोई जानकारी नहीं दी गई है। अंदर दुकानें लगाना गलत है। जो पुलिस की चूक है, उसके लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जांच के बाद नतीजे पर पहुंचेंगे।” हादसा कैसे हुआ, पता नहीं, हमारी तैनाती कहीं और थी- ADM आपदा प्रबंधन ADM(आपदा प्रबंधन) रंजन कुमार चौधरी ने कहा, “अभी तक हमने 5 लोगों को चेक दिया है। 6 लाख रुपए मृतक परिवारों को दिए जा रहे हैं। घटना कैसे हुई इसके विषय में जानकारी अभी नहीं मिली है क्योंकि हमारी तैनाती दूसरे स्थान पर थी। मृतकों के परिजनों को 6 लाख रुपए मुआवजा दी जा रही है।” नालंदा में मंगलवार को शीतला माता मंदिर में भगदड़ के बाद 9 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में 8 महिलाएं है। इनमें ज्यादातर नालंदा के ही रहने वाले हैं। वहीं एक व्यक्ति की भी जान गई है, उनकी पहचान नहीं हो पाई है। घटना दीपनगर थाना क्षेत्र के मघड़ा गांव की है। चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचे थे, लेकिन भीड़ को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा मौजूद नहीं था। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, मंदिर परिसर छोटा था। इसी बीच लोगों में पहले दर्शन करने की होड़ लग गई। लोग कतार में लगने की बजाए धक्का-मुक्की करके आगे बढ़ने लगे। अफरा-तफरी के बीच भीड़ बढ़ती चली गई। इसके बाद भगदड़ की स्थिति बन गई। कई लोग भीड़ के नीचे दब गए। चश्मदीदों के मुताबिक, 6-7 मिनट में जमीन पर लाशें बिछ गईं। किसी की बेटी के सामने मां ने दम तोड़ दिया तो किसी की सहेली को भीड़ कुचलते हुए निकल गई। हादसा कैसे हुआ, मौके पर मौजूद लोगों ने क्या बताया, बिहार DGP का क्या कहना है, सिलसिलेबार पढ़िए भगदड़ की पूरी कहानी… राष्ट्रपति की सुरक्षा में 2500 जवान, 25 हजार की भीड़ से प्रशासन गायब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को नालंदा दौरे पर थीं। वे नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति शामिल हुईं। उनकी सुरक्षा में 8 जिलों के 2500 जवानों को लगाया गया था, जबकि मंदिर में जुटी 25 हजार की भीड़ के लिए एक भी पुलिस वाले की तैनाती नहीं थी। मंदिर में भीड़ ज्यादा थी। जबकि मंदिर का गर्भ गृह काफी छोटा है, जहां एक साथ 20 भक्तों से ज्यादा लोगों के खड़े होने की जगह नहीं है। भीड़ बढ़ने के कारण गर्भ गृह में क्षमता से बहुत ज्यादा लोग थे। मंदिर के बाहर मेला लगा था। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के 40 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची हादसे के बाद पटना कमिश्नर को बिहार शरीफ भेजा गया। सीएम ने मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। दीपनगर थाने के SHO राजमणि को सस्पेंड कर दिया गया। सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 6 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। वहीं केंद्र सरकार ने 2 लाख के मुआवजे की घोषणा की है। हादसे के समय और बाद की कुछ तस्वीरें देखिए… जानिए चश्मदीदों ने क्या कहा चश्मदीद बोले- दर्शन की जल्दबाजी में मची भगदड़ महिला श्रद्धालू ने बताया कि चैत्र महीने का ये आखिरी मंगलवार है। यहां मेला लगा था। भीड़ ज्यादा हो गई। मंदिर का गर्भगृह भी छोटा है। लोग जल्दी-जल्दी दर्शन करने के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में थे। कोई लाइन में लगकर पूजा नहीं करना चाह रहा था। दूसरे श्रद्धालु ने बताया, “सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया था। मंदिर के अंदर भारी भीड़ थी। पुलिस का जवान अंदर तैनात नहीं था। भीड़ को डायवर्ट करने या दो लाइनों में बांटने की कोई व्यवस्था नहीं थी। मंदिर के पुजारी ही जल्दी-जल्दी दर्शन कर निकलने को कह रहे थे। इस बीच एक महिला को चक्कर आ गया, जिससे वो वहीं गिर पड़ी। कुछ लोग उसे संभालने लगे, और भीड़ को पीछे करने की कोशिश की। इस दौरान भगदड़ मच गई।” 50 से ज्यादा महिलाएं जमीन पर गिरीं, कुछ बेहोश थीं चश्मदीद पंकज कुमार ने बताया, ” मैं पूरी ताकत लगाकर एक खंभे के पास पहुंचकर खुद को संभाला। वहां से जो मौत का मंजर देखा वो कभी भूल नहीं सकता। कम से कम 50 महिलाएं जमीन पर गिरी होंगी, कुछ बेहोश थीं, कुछ हिल भी नहीं रही थीं। उनको लोग कुचलते हुए गुजर रहे थे। कुछ लोग चिल्ला रहे थे- पीछे हटो-पीछे हटो, लेकिन भीड़ को पता ही नहीं था कि आगे क्या हो रहा है। करीब 20 मिनट तक यही हालत रही। इसके बाद लोग गिरी हुई महिलाओं को उठाने लगे। मैंने भी एक महिला को उठाने में मदद की। वो बेहोश थी। उसके हाथ ठंडे हो चुके थे। लोग चिल्लाने लगे कि जल्दी एंबुलेंस बुलाओ। बड़ी बात यह है कि अभी तक भी कोई पुलिस वाला यहां नहीं पहुंचा था। लोग फोन कर रहे थे, लेकिन एंबुलेंस आने में काफी देर लग गई। इस बीच कुछ लोग ई-रिक्शा से ही घायलों को अस्पताल ले जाने लगे। 40 मिनट बाद पहुंची एंबुलेंस मंदिर में मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया, “भगदड़ के बाद कई महिलाएं बेहोश पड़ीं थीं। कुछ दर्द से चिल्ला रहीं थीं। लोगों ने पुलिस को खबर की। पहले 2-3 पुलिस वाले पहुंचे। उनके साथ मिलकर श्रद्धालुओं ने घायल महिलाओं को किनारे लिटाया। कई बार एंबुलेंस के लिए फोन किया गया। घटना के करीबब 40 मिनट बाद पहली एंबुलेंस पहुंची और पुलिस के कुछ अफसर भी आए। इसके बाद घायलों को अस्पताल भिजवाया गया। महिलाओं को उठाते समय ही लग रहा था कि उनमें से कुछ की मौत हो गई है।” मां से कहा निकल जाते हैं, नहीं मानी, सीढ़ियों में गिरकर दब गई शीतला मंदिर में अपनी मां के साथ पूजा करने आई पूनम कुमारी ने बताया, “पुजारी भी किसी को नहीं हटा रहे थे। लोग एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे। मैंने मां से कहा कि यहां से निकल जाओ। मम्मी नहीं मानीं, बोली बस पहुंच ही गए हैं, पूजा करके जाएंगे। पीछे से लोग धकेलने लगे। मम्मी सीढ़ी के नीचे दब गई। मेरी आंखों के सामने मां की जान चली गई।” लापरवाही के तीन बड़़े कारण 1. मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्था नहीं की आज चैत्र का आखिरी मंगलवार है। मघड़ा शीतला मंदिर में इस दिन हर साल भीड़ होती है, मंदिर प्रबंधन को इस बात की जानकारी थी, इसके बाद भी भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए अलग से कोई इंतजाम नहीं किया गया था। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग तक नहीं की गई थी। सुबह 8 से 9 बजे के बीच भीड़ अव्यवस्थित हो गई। 2. चोर दरवाजे से दर्शन कराए जा रहे थे बढ़ती भीड़ को कंट्रोल करने की बजाए मंदिर प्रबंधन और वहां मौजूद पुजारी फायदा उठा रहे थे। वे लोगों से पैसा लेकर पीछे के दरवाजे से माता का दर्शन कराने लगे। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं था, ये अपनी मनमानी कर रहे थे। इसके कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती चली गई। 3. 25 हजार की भीड़, पुलिस- प्रशासन की कोई व्यवस्था नहीं मंदिर परिसर में न तो सुरक्षा का कोई इंतजाम था और न ही भीड़ को कंट्रोल करने के लिए किसी पुलिसकर्मी को तैनात किया गया था। मेले की पहले से जानकारी होने के बाद भी प्रशासन की तरफ से यहां किसी मजिस्ट्रेट को तैनात नहीं किया गया था। घटना स्थल से 30KM की दूरी पर राष्ट्रपति आने वाली थीं, वहां 8 जिले के ढाई हजार जवान तैनात किए गए थे। अब जानिए हादसे के बाद जिम्मेदारों ने क्या कहा DGP ने माना- मंदिर में पुलिस की टीम होनी चाहिए थी मंदिर का निरीक्षण करने के बाद DGP विनय कुमार ने माना कि मंदिर में हजारों-लाखों की भीड़ होती है। यहां पुलिस की टीम होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “नालंदा डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है। मंदिर की व्यवस्था में कई कमियां सामने आई हैं। सीढ़ियों पर इतनी फिसलन है कि कोई भी गिर सकता है। आने-जाने के रास्तों में भी बदलाव की जरूरत है।” उन्होंने बताया कि न्यास परिसर के चेयरमैन रणवीर नंदन से भी बातचीत हुई है। यहां कभी-कभी लाखों की भीड़ होती है, जबकि आज करीब 25 हजार लोग मौजूद थे। ऐसी स्थिति में पुलिस बल की तैनाती जरूरी थी। लापरवाही के कारण SHO को सस्पेंड किया गया है। धक्का-मुक्की से कम, डिहाइड्रेशन से ज्यादा मौत हुई हैं- ADG कुंदन कृष्णन ADG कुंदन कृष्णन लॉ एंड आर्डर ने कहा, “दुखद घटना हुई है। कुव्यवस्था मंदिर परिसर में थी। लोग बेहोश होकर गिर गए थे। रास्ते में दुकान लगी थी। एंबुलेंस को आने में भी दिक्कत हुई है। मंदिर के पुजारी की लापरवाही है। प्रशासन को कोई जानकारी नहीं दी गई है। अंदर दुकानें लगाना गलत है। जो पुलिस की चूक है, उसके लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। जांच के बाद नतीजे पर पहुंचेंगे।” हादसा कैसे हुआ, पता नहीं, हमारी तैनाती कहीं और थी- ADM आपदा प्रबंधन ADM(आपदा प्रबंधन) रंजन कुमार चौधरी ने कहा, “अभी तक हमने 5 लोगों को चेक दिया है। 6 लाख रुपए मृतक परिवारों को दिए जा रहे हैं। घटना कैसे हुई इसके विषय में जानकारी अभी नहीं मिली है क्योंकि हमारी तैनाती दूसरे स्थान पर थी। मृतकों के परिजनों को 6 लाख रुपए मुआवजा दी जा रही है।”  

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