पलवल में महिला आयोग चेयरपर्सन ने सुनी शिकायतें:12 शिकायतों का मौके पर निपटारा, रेनू भाटिया बोलीं- शिक्षकों को पहले खुद संस्कारवान बनना होगा

पलवल में महिला आयोग चेयरपर्सन ने सुनी शिकायतें:12 शिकायतों का मौके पर निपटारा, रेनू भाटिया बोलीं- शिक्षकों को पहले खुद संस्कारवान बनना होगा

हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने पलवल एसपी कार्यालय में विभिन्न शिकायतों की सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें पहले स्वयं संस्कारवान बनना होगा, तभी वे विद्यार्थियों को अच्छे संस्कार दे पाएंगे। चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने कहा कि, स्कूल-कॉलेज बच्चों का भविष्य होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने जाते हैं या आपस में लड़ने। उन्होंने जोर दिया कि जब शिक्षक स्वयं संस्कारवान नहीं होंगे, तो वे बच्चों को क्या संस्कार देंगे। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि आयोग को शिक्षकों और बच्चों से संबंधित मामलों की सुनवाई करनी पड़ रही है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को सख्त निर्देश दिए कि वे मामलों का पूरा विवरण रखें और विद्यालयों में चल रही गतिविधियों व मामलों की निगरानी करें। यह टिप्पणी उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों से जुड़े एक मामले पर चर्चा के दौरान की। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा को आयोग तत्पर : रेनू सुनवाई के दौरान महिलाओं ने घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, संपत्ति विवाद और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसी विभिन्न समस्याएं चेयरपर्सन के समक्ष रखीं। इस अवसर पर लगभग तीन दर्जन शिकायतों की सुनवाई करते हुए 12 शिकायतों का मौके पर निपटारा किया गया। चार शिकायतें कोर्ट को स्थानांतरित करने पर सहमति बनी, जबकि पांच शिकायतों की पुनः सुनवाई सहित कई मामलों में उचित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। महिलाओं से संबंधित मामलों की सुनवाई करते हुए रेनू भाटिया ने कहा कि आयोग महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ अन्याय किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए ताकि पीड़िताओं को न्याय मिल सके। उन्होंने पुलिस कर्मचारियों को तलाक या अन्य मामलों से संबंधित एफआईआर दर्ज करने से पूर्व काउंसलिंग करने का भी निर्देश दिया। गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है शादी- रेनू
चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने बेटियों और माता-पिता के केस की सुनवाई करते हुए निर्देश दिए कि बेटियां जब तक उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हो जाती तब तक पढ़ें। उन पर किसी की कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने बेटियों और माता-पिता से कहा कि आपसी झगड़ा घर में ही सुलझा लेते यहां आने की क्या जरूरत थी। उन्होंने कहा कि माता-पिता को भी चाहिए कि वे बेटों व बेटियों की अच्छी परवरिश करके उन्हें संस्कारवान बनाएं, शिक्षा पूरी करवाकर उन्हें स्वावलंबी बनाए। उन्होंने कहा कि शादी-विवाह गुड्डे-गुड़ियों का खेल या कोई मजाक नहीं है। दंपतियों को तलाक का केस दर्ज कराने से पहले थोड़ा सब्र रखना चाहिए और मिलकर आपसी सुलह से झगड़े का सुलझा लेना चाहिए। तलाक किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप कानून में बदलाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस अवसर पर केसों से संबंधित व्यक्ति, अधिवक्ता व पुलिस अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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