मेहसाणा : खाखरा-पापड़ की बिक्री से महिलाएं कर रहीं लाखों की कमाई

मेहसाणा : खाखरा-पापड़ की बिक्री से महिलाएं कर रहीं लाखों की कमाई

महिला दिवस पर विशेष : विजापुर तहसील के गवाडा गांव में गृह उद्योग से अर्जित कर रहीं सालाना 8 लाख का लाभ

मेहसाणा. जिले की विजापुर तहसील के गवाडा गांव की महिलाओं ने नारी शक्ति का सच्चा परिचय दिया है। पुरुषों के बराबर खड़ी होकर महिलाएं न केवल परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं।
गवाडा ग्राम सखी संघ से जुड़ी 22 महिलाएं मिशन मंगलम योजना के तहत सखी मंडल बनाकर खाखरा, पापड़ और अचार का गृह उद्योग चला रही हैं। ये महिलाएं आज अपने उद्योग से सालाना लगभग 15 से 17 लाख रुपए का कारोबार कर 7 से 8 लाख रुपए का शुद्ध लाभ कमा रही हैं।
गवाडा ग्राम सखी संघ की नीता रबारी ने बताया कि मिशन मंगलम कार्यालय के कर्मचारियों के मार्गदर्शन के बाद गांव की महिलाओं ने बचत मंडल बनाया। खाखरा और पापड़ बनाने का प्रशिक्षण लेने के बाद 2022 में गृह उद्योग की शुरुआत की गई। इस उद्योग को गति देने के लिए राज्य सरकार की मिशन मंगलम योजना के तहत रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआइएफ) से आर्थिक मदद मिली, जिसका उपयोग उपकरण और कच्चे माल की खरीद में किया गया।

ग्राहक और व्यापारी फोन करके देते हैं ऑर्डर

शुरुआत में महिलाओं को मार्केटिंग के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। पहले उन्हें रिक्शा लेकर आसपास के गांवों में मार्केटिंग करनी पड़ती थी। राज्य सरकार की ओर से पालनपुर, पाटण और मेमेहसाणा में आयोजित सरस मेले टर्निंग पॉइंट साबित हुए। इन मेलों में स्टॉल लगाने से मिली प्रसिद्धि के कारण आज उनके उत्पाद लोकप्रिय हुए हैं। ग्राहक और व्यापारी खुद फोन करके ऑर्डर देते हैं। अब उन्हें बाहर जाकर मार्केटिंग करने की जरूरत नहीं है और घर पर ही व्यवसाय का विस्तार हो रहा है।

1688 सखी मंडल कार्यरत

विजापुर के लाइवलीहुड मैनेजर केतनकुमार प्रजापति ने बताया कि तहसील में वर्तमान में 1688 सखी मंडल कार्यरत हैं। इन मंडलों को आर्थिक सहयोग देने के लिए सरकार ने लगभग 1.75 करोड़ रुपए का रिवॉल्विंग फंड आवंटित किया है। इसके अलावा तहसील के 57 विलेज ऑर्गेनाइजेशन को 2.78 करोड़ रुपए का सीआइएफ भी दिया गया है। इस बड़े सहयोग के कारण ग्रामीण महिलाएं केवल खाखरा-पापड़ ही नहीं बल्कि अगरबत्ती, साबुन, फिनाइल और अचार आदि विभिन्न गृह उद्योगों से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

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