महिला ने खेतों की सेहत सुधारने शुरू की ऑर्गेनिक खेती:मुरैना की 8वीं पास लता देवी ने खेती को बनाया रसायन मुक्त, लागत 75% कम हुई, मुनाफा दोगुना

महिला ने खेतों की सेहत सुधारने शुरू की ऑर्गेनिक खेती:मुरैना की 8वीं पास लता देवी ने खेती को बनाया रसायन मुक्त, लागत 75% कम हुई, मुनाफा दोगुना

मुरैना जिले के ग्राम बमूर का पुरा पोरसा निवासी 8वीं पास लता देवी तोमर आज जिले ही नहीं, प्रदेश में वैज्ञानिक महिला किसान के रूप में पहचानी जाती हैं। रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से बंजर होती जमीन को बचाने के लिए उन्होंने वर्ष 2016 में पति की प्रेरणा से ऑर्गेनिक खेती की शुरुआत की थी। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दस वर्षों की मेहनत से 18 बीघा जमीन पर रसायन-रहित खेती शुरू कर दी। आज उनका ऑर्गेनिक फार्म हाउस फल-सब्जी, धान, गेहूं, चना, सरसों और दूध-सब कुछ जैविक उत्पादन के लिए जाना जाता है। उनके उत्पाद न सिर्फ खेतों की सेहत सुधार रहे हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को भी स्वास्थ्यप्रद विकल्प दे रहे हैं। लागत घटी, मुनाफा बढ़ा
लता देवी बताती हैं कि रासायनिक खेती के दौरान महंगे खाद-दवाइयों के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही थी, जिससे खेती घाटे का सौदा बन गई थी। लेकिन जैसे ही उन्होंने जैविक पद्धति अपनाई, प्रति बीघा लागत चार गुना कम हो गई। उनकी ऑर्गेनिक उपज बाजार में दोगुने दाम पर बिकती है, जिससे मुनाफा तीन गुना तक बढ़ गया। रासायनिक खेती जितना ही उत्पादन उन्हें जैविक खेती में भी मिल रहा है एक बीघा में लगभग आठ क्विंटल तक। घर में ही तैयार करती हैं जैविक खाद, दवाइयां
लता देवी ने जैविक खाद व जीवामृत बनाने के लिए घर में देशी गाय पाल रखी है। गाय के गोबर और गौमूत्र से वह घर पर ही आवश्यक जैविक खाद और स्प्रे दवाइयां तैयार कर लेती हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता। साथ ही गायों से मिलने वाला शुद्ध दूध उनके परिवार के लिए अतिरिक्त लाभ है। उनका कहना है कि एक किलो गोबर से वह 20 किलो तक उत्तम जैविक खाद तैयार कर लेती हैं, जिससे खेती की लागत तीन से चार गुना तक घट गई है। हजारों किसानों को दे चुकी हैं प्रशिक्षण
लता देवी ने जैविक खेती के गुर कृषि विज्ञान केंद्र मुरैना के वैज्ञानिकों से सीखे थे। वर्षों की मेहनत और प्रयोगों से उन्होंने अपना अलग मॉडल विकसित किया। उनकी सफलता को देखते हुए अब उनकी गिनती वैज्ञानिक महिला किसानों में की जाती है। बीते पांच वर्षों में वे प्रदेश और देशभर से आए 5 हजार से अधिक किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। कई किसान उनके फार्म पर आकर खाद बनाने की तकनीक सीखते हैं। ऐसे तैयार होता है जैविक खाद
लता देवी बताती हैं कि जैविक खाद बनाना बेहद आसान और पूरी तरह कम लागत वाला तरीका है। 10 किलो देशी गाय का गोबर,इतनी ही मात्रा में गौमूत्र,200 लीटर पानी,1 किलो गुड़,1 किलो बेसन व एक किलो पीपल व बरगद के पेड़ के नीचे की शुद्ध मिटी। इन सभी सामग्री को एक ही चरही (ड्रम/टंकी) में मिलाकर 7 से 10 दिन तक छोड़ दिया जाता है। निर्धारित समय के बाद यह मिश्रण लगभग 220 किलो तक उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद में बदल जाता है।

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