बिना ब्लड टेस्ट, बिना हॉस्पिटल गए… सिर्फ आपके खर्राटे और सांसों से पता चल जाएगी भविष्य की हर बीमारी, पढ़िए यह जादुई रिसर्च

बिना ब्लड टेस्ट, बिना हॉस्पिटल गए… सिर्फ आपके खर्राटे और सांसों से पता चल जाएगी भविष्य की हर बीमारी, पढ़िए यह जादुई रिसर्च

SleepFM AI Model: हम अक्सर कहते हैं कि रात गई, बात गई, लेकिन विज्ञान अब कह रहा है कि रात की नींद सिर्फ थकान ही नहीं मिटाती, बल्कि आपके आने वाले कल की सेहत की कुंडली भी लिखती है। सोचिए, कैसा हो अगर आप मजे से सो रहे हों और आपका बिस्तर ही डॉक्टर बन जाए? आपको कोई ब्लड टेस्ट न कराना पड़े, शरीर में कोई सुई न चुभोनी पड़े, और सुबह उठते ही पता चल जाए कि 5 साल बाद आपको कौन सी बीमारी हो सकती है।

सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, है न? लेकिन अमेरिका की स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) के वैज्ञानिकों ने इसे सच कर दिखाया है। उन्होंने एक ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई है जो सिर्फ आपके सोने के तरीके, सांसों की रफ्तार और खर्राटों की आवाज सुनकर बता सकती है कि आप भविष्य में बीमार पड़ेंगे या नहीं।

आइए समझते हैं कि यह रिसर्च क्या है और यह हम सबके लिए क्यों जरूरी है।

SleepFM: वो AI डॉक्टर जो आपके सोते ही जाग जाता है?

स्टैनफॉर्ड के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एक बेहद स्मार्ट मॉडल तैयार किया है, जिसे उन्होंने SleepFM नाम दिया है। यह मॉडल इंसान की नींद की हर छोटी से छोटी हरकत पर नजर रखता है।

यह रिसर्च मशहूर मेडिकल जर्नल नेचर मेडिसिन में छपी है। वैज्ञानिकों का दावा है कि जब हम सोते हैं, तो हमारा शरीर कई तरह के सिग्नल देता है। हमारी सांसें कैसे चल रही हैं, दिल की धड़कन की रफ्तार क्या है, और हम नींद में कितनी बार करवट बदलते हैं ये सब बातें हमारी अंदरूनी सेहत का राज खोल देती हैं। यह नया AI मॉडल इन्हीं संकेतों को डिकोड करता है और 130 तरह की बीमारियों का पहले ही अनुमान लगा लेता है।

हार्ट अटैक से लेकर कैंसर तक… क्या-क्या पता चलता है?

इस रिसर्च के नतीजे वाकई हैरान करने वाले हैं। वैज्ञानिकों ने करीब 65 हजार लोगों की नींद का डेटा इकट्ठा किया। इसमें लगभग 5 लाख 85 हजार घंटों की रिकॉर्डिंग शामिल थी। जब इस डेटा को SleepFM मॉडल में डाला गया, तो उसने गजब की सटीकता दिखाई।

हार्ट अटैक: इस मॉडल ने 10 में से 8 मामलों में बिल्कुल सही बताया कि किसे हार्ट अटैक का खतरा है।

डिमेंशिया (भूलने की बीमारी): दिमागी बीमारियों को पकड़ने में तो यह और भी उस्ताद निकला। इसने 10 में से 8.5 मामलों में सही भविष्यवाणी की।

किडनी और कैंसर: किडनी फेल होने के खतरे को इसने 80% तक सही पहचाना, वहीं ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को बताने में इसका अनुमान 10 में से 9 बार सही साबित हुआ।

कुल मिलाकर, 75% मामलों में इस AI डॉक्टर की भविष्यवाणी बिल्कुल सटीक बैठी।

नींद में आखिर ऐसा क्या होता है?

अब आप सोच रहे होंगे कि सोते समय बीमारी का पता कैसे चलता है? दरअसल, जब हम गहरी नींद में होते हैं, तब भी हमारा दिमाग, दिल और फेफड़े काम कर रहे होते हैं।

वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों की नींद बार-बार टूटती है या जो ठीक से गहरी नींद (Deep Sleep) में नहीं जा पाते, उनके दिमाग में भविष्य में गड़बड़ी होने के चांस ज्यादा होते हैं। ऐसे लोगों को आगे चलकर अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारियां घेर सकती हैं। वहीं, अगर नींद में आपकी सांस उखड़ रही है या ऑक्सीजन कम हो रही है, तो यह दिल और फेफड़ों की बीमारी का साफ सिग्नल है।

डॉक्टरों के लिए क्यों बड़ी है यह खोज?

अक्सर गंभीर बीमारियों के लक्षण शरीर में बहुत पहले से पनपने लगते हैं, लेकिन हम उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। हम डॉक्टर के पास तब जाते हैं जब बीमारी बढ़ जाती है। लेकिन स्लीप एफएम (SleepFM) जैसे टूल्स की मदद से बीमारी को तब पकड़ा जा सकेगा जब वह शुरू ही हुई हो।

यानी, भविष्य में हो सकता है कि आपकी स्मार्टवॉच या आपके गद्दे में लगा सेंसर ही आपको बता दे ”मालिक, आपकी नींद ठीक नहीं है, हार्ट चेकअप करा लीजिए।” यह रिसर्च मेडिकल दुनिया में एक नई क्रांति की शुरुआत है।

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