आंखों का इशारा और ‘हरीश चौधरी जिंदाबाद’:AI वाले आलोक राज का ‘कटऑफ समोसा’; Gen-Z ने चेक कर दी यूनिवर्सिटी की कॉपियां

आंखों का इशारा और ‘हरीश चौधरी जिंदाबाद’:AI वाले आलोक राज का ‘कटऑफ समोसा’; Gen-Z ने चेक कर दी यूनिवर्सिटी की कॉपियां

नमस्कार बड़े नेताजी के नारे लग रहे थे। विधायक महोदय ने अपने समर्थकों को भी आंखों ही आंखों में इशारा किया और ‘जिंदाबाद’ हो गए। राजस्थान राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष सोशल मीडिया पर कैंडिडेट से सीधा और दिलचस्प संवाद करते हैं। चहेते क्रिएटिव कैंडिडेट AI का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। अजमेर की MDS यूनिवर्सिटी के छात्रों की कॉपियां Gen-Z के हवाले हैं। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. विधायकजी का इशारा, ‘जिंदाबाद’ के लगे नारे नेताओं के लिए कार्यकर्ता उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने राजनीति के लिए नेता। एक कार्यकर्ता तब संपूर्ण माना जाता है जब वह निम्नलिखित नियमों का पालन करे- 1. वह नेताजी के लिए तत्पर रहे। उसकी जेब में फूलमाला और साफा खरीदने लायक पैसे हमेशा रहें। 2. उसे नेताजी की हर गतिविधि के बारे में जानकारी हो। नेताजी कब आ रहे हैं, कहां आ रहे हैं, किसके साथ आ रहे हैं, यह सदैव मालूम हो। 3. वह नेताजी की आंखों और इशारों की भाषा को समझे। समझ के अनुसार तुरंत प्रत्युत्तर करे। विधायक जी के साथ कार में बड़े नेताजी बैठे थे। पायलट का ड्राइवर बनकर वे मुग्ध थे। ऐसे अवसर कम ही मिलते हैं। जिस तरफ बड़े नेताजी बैठे थे, उस खिड़की की तरफ उनके समर्थकों का जमावड़ा था। नारा गूंजा-सचिन पायलट जिंदाबाद। अब विधायक महोदय के मन में भी कुरकुरी हुई। उन्होंने अपनी विंडो के पास जमे अपने कार्यकर्ताओं की ओर आंखें नचाईं। कार्यकर्ताओं ने नियम नंबर 3 का पालन किया और जोश में नारा लगाया- हरीश चौधरी जिंदाबाद। विधायक महोदय धन्य हुए। 2. आलोक राज का AI अवतार उनका नाम आलोक राज है। वे राजस्थान राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे सोशल मीडिया पर कैंडिडेट्स के साथ सीधा और दिलचस्प संवाद करते हैं। कॉम्पिटिशन की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी सवाल पूछने में जितनी कलाकारी का इस्तेमाल करते हैं, उसी स्तर की कलात्मकता के साथ सर जवाब देते हैं। क्लास फोर्थ की कटऑफ लिस्ट का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों ने पोस्टर जारी किया। इसमें निवेदन किया- साहब देवता हैं। छोरा-छोरी जागरण दे रहे हैं। भगवान के आगे दीपक जलाकर बैठे हैं। घी खत्म होने वाला है। जल्दी से ज्योत में आ जाओ। क्या रूठ गए। कटऑफ का पन्ना फोटो खींच कर डाल दीजिए। पोस्टर से आगे बढ़कर एक रचनात्मक अभ्यर्थी ने जागरण का AI वीडियो बना डाला। लिखा-अध्यक्ष महोदय जागरण में आए थे, लेकिन कटऑफ का पन्ना नहीं निकला। विभाग की साइट ठीक करा दी, लेकिन पन्ना वहां भी नहीं। अब तो कटऑफ का पन्ना डाल दो सर। भैरूबाबा ने सारी अड़चनें दूर कर दी। अध्यक्ष जी ने जागरण के वीडियो पर ही उत्तर दिया- भजन कीर्तन दोपहर बाद तक चलने दो। एक क्रिएटर तो दो कदम आगे निकल गया। साहब का समोसे खाते AI वीडियो डालकर लिखा- साहब कटऑफ के पन्ने पर समोसा खा रहे हैं। 3. अजमेर में यूनिवर्सिटी एग्जाम बना मजाक पड़ोसी देशों में Gen-Z का इस्तेमाल सत्ता पलटने में किया जा रहा है। हमारे यहां हमने उन्हें यूनिवर्सिटी की कॉपियां चेक करने में लगा दिया है। अब एक कहानी सुनिए- राजा ने एक बंदर पाला। बंदर बड़ा होशियार। राजा की हर बात मानता। राजा को नींद आने लगी तो बंदर को हवा झालने के लिए हाथ-पंखा थमा दिया। बंदर हवा करने लगा। राजा को गहरी नींद आ गई। इस दौरान एक मक्खी राजा के नाक पर बैठ गई। बंदर ने पंखे को उल्टा किया और उसके हैंडल से जोरदार प्रहार कर मक्खी के परखच्चे उड़ा दिए। अजमेर में एमडीएस यूनिवर्सिटी की बीए फर्स्ट ईयर की कॉपियां चेक होने के लिए जिन ‘राजा साहब’ के पास पहुंची थीं, वे उन्होंने अपने ‘बंदर’ चेलों के हवाले कर दी। Gen-Z चेलों ने कॉपियां भले ढंग से चेक की। राइटिंग पर भी फोकस किया। लेकिन कॉपी चेक करने का वीडियो बना लिया। यह वीडियो लेकर ‘राजा साहब’ अब ‘नाक’ का इलाज कराते फिर रहे हैं। 4. चलते-चलते… रील का युग है। 15 सेकेंड में लोग अपनी बात लाखों लोगों तक पहुंचा देते हैं। 15-15 सेकेंड करके कई लोग घंटों रील ताड़ते हैं। कई रील कमल के फूल की तरह होती हैं। सब कुछ उजागर होता है। कोई छुपा हुआ पक्ष नहीं होता। कई रील प्याज की तरह होती हैं। परतों के नीचे परतें होती हैं। सत्य क्या है यह 15 सेकेंड की रील देखकर नहीं जाना जा सकता। बाड़मेर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहा है। दरवाजे पर नोटिस चस्पा है। ताले पर सरकारी मुहर जड़ी है। दरवाजे के सहारे सर्द रात में एक परिवार धरना दे रहा है। धरने में मासूम बच्चे भी हैं। इमोशनल सी धुन लगाकर वीडियो शेयर किया गया तो वायरल हो गया। इन हालात के लिए प्रशासन का दोष नहीं। मकान पर स्वामित्व के दावे को लेकर दो पक्ष सामने आए। दोनों के अपने-अपने दावे हैं। एक पक्ष का दावा है कि किराएदार ने कब्जा कर लिया है, झूठे कागज बनवा लिए हैं। दूसरे पक्ष का दावा है कि मकान ससुर ने बनाकर दिया है। हमारा ही मकान है। बात एसडीएम तक पहुंची तो मकान कुर्की का नोटिस लगाकर ताला मार दिया। सत्य क्या है वह तो प्याज के सभी छिलके उतरने के बाद ही सामने आएगा लेकिन सर्द रात में अगर छोटे-छोटे बच्चे खुले में बैठने को मजबूर हैं तो मानवीय नजरिए से इनका इंतजाम जरूरी है। (इनपुट सहयोग- भरत मूलचंदानी (अजमेर)।) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…

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