गणगौर पर्व पर उमड़ी आस्था, परंपरा और संस्कृति की बही बयार

गणगौर पर्व पर उमड़ी आस्था, परंपरा और संस्कृति की बही बयार

पिनान. कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं माता गौरी और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रही हैं। हरी घास की रंग-बिरंगी झारियां सजाकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गणगौर उत्सव मनाया जा रहा है। महिलाएं सज-धज कर ईसर-गौरा की मूर्तियों को सजा रही हैं और व्रत रखकर भजन, गीत व लोकनृत्य में भाग ले रही हैं। यह पर्व सामाजिक समरसता और पारिवारिक मेलजोल को भी बढ़ावा देता है।

सीमा उपाध्याय, विद्या गर्ग, हेमा गुप्ता व वर्षा मीना ने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी पवित्र प्रेम और समर्पण की स्मृति में गणगौर पर्व मनाया जाता है। ‘गण’ भगवान शिव और ‘गौर’ माता पार्वती का प्रतीक है। अनिता गर्ग, तारा बंसल, लक्ष्मी, अंजली व दीपिका टेलर के अनुसार गणगौर का पर्व होली के दूसरे दिन से शुरू होकर करीब 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान महिलाएं प्रतिदिन पूजन कर ईसर-गौरा और गणेश की मूर्तियां स्थापित कर उन्हें फूलों और वस्त्रों से सजाती हैं। प्रेम देवी, आरती, तारा, नीलम, बबीता व चंचल ने बताया कि इस अवसर पर महिलाएं और युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में सोलह श्रृंगार कर पर्व की गरिमा को बढ़ाती हैं।

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