RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने पटना का नाम पाटलिपुत्र करने की मांग की तो सदन में सिर्फ एक प्रस्ताव नहीं गूंजा- बल्कि मौर्य साम्राज्य की वैभवशाली राजधानी की वह गूंज फिर से सुनाई दी, जिसने कभी विश्व को चाणक्य, अशोक और बौद्ध-जैन दर्शन दिया था। उन्होंने कहा कि ‘पाटलिपुत्र’ उच्चारण मात्र से सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। उन्होंने यह मांग केवल एक शहर के नाम की नहीं- बिहार के गौरव, इतिहास और आत्मसम्मान को नई ऊर्जा देने की कोशिश के रूप में बताया। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में जानिए, क्या पटना फिर से पाटलिपुत्र बनेगा। शहर के नाम बदलने की प्रक्रिया क्या है? इसमें कितना खर्च होगा। कुशवाहा के पाटलिपुत्र नाम करने के पीछे मंशा क्या है। सवाल-1ः पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की चर्चा कैसे शुरू हुई? जवाबः समय-समय पर पटना का नाम बदलने की मांग होती रही है। ताजा डिमांड राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने की है। 3 फरवरी को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कुशवाहा ने पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग की। सवाल-2ः पटना का नाम बदलने का अधिकार किसके पास है? प्रक्रिया क्या है? जवाबः देश की आजादी के बाद से अब तक 21 राज्यों ने 250 से ज्यादा जगहों के नाम बदले हैं। शहर और राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया अलग-अलग है। पटना का नाम बदलने का अधिकार राज्य की कैबिनेट के पास है। पूरा नियम जानिए… हालांकि, राज्य का नाम बदलने का नियम अलग है… सवाल-3ः अगर पटना का नाम बदलता है तो कितना खर्च होगा? जवाबः कितना खर्च होगा, इसका सही आंकड़ा तो निकालना मुश्किल है। लेकिन अनुमान के मुताबिक, पटना का नाम बदलने पर 300 करोड़ से ज्यादा खर्च होगा। यह अनुमान इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने पर होने वाले खर्च के आधार पर है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने पर 300 करोड़ रुपए खर्च हुआ था। पैसा कहां-कहां खर्च होता है…जानिए सवाल-4ः पाटलिपुत्र नाम करने की डिमांड क्यों होती है? कुशवाहा की मंशा क्या है? जवाबः इसके 2 बड़े कारण हैं… 1. सांस्कृतिक विरासत बचाना पाटलिपुत्र से चलने वाले साम्राज्य में अशोक का साम्राज्य सबसे बड़ा था। उत्तर पश्चिम में तो अशोक ने जिस प्रशासनिक सीमा का निर्धारण किया, उसे मुगल और अंग्रेज भी पार नहीं कर पाए। वह अपनी युगांतकारी सोच के कारण समय से काफी आगे थे। 2. कुशवाहा संस्कृति की आड़ में जाति साध रहे 40 से 45 सीटों पर कुशवाहा अहम बिहार में कोइरी समाज की आबादी 4.2% है। माना जाता है कि मगध, शाहाबाद, सीवान, भागलपुर-बांका, पूर्णिया, बेतिया-मोतिहारी एरिया की 40 से 45 सीटों पर कोइरी समाज अहम फैक्टर है। सवाल-5ः पटना नाम कब और कैसे पड़ा? जवाबः आज के पटना का नाम सदियों पहले पाटलिपुत्र ही था। नाम की दो कहानियां हैं… पहली कहानी- कहा जाता है कि आज से करीब तीन हजार साल पहले यहां बहुत सारे पाटलि वृक्ष थे। इन पाटलि वृक्षों (औषधीय पौधा) के कारण इसे पाटलिग्राम कहा जाता था। बाद में नगर बनने पर पाटलिपुत्र कहा गया। दूसरी कहानी- लोक कथाओं में राजा पत्रक को आधुनिक पटना का जनक कहा जाता है। राजा पत्रक ने अपनी रानी पाटलि के लिए जादू से इस नगर का निर्माण किया था। शेरशाह सूरी के पटन को अंग्रेजों ने बनाया पटना RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने पटना का नाम पाटलिपुत्र करने की मांग की तो सदन में सिर्फ एक प्रस्ताव नहीं गूंजा- बल्कि मौर्य साम्राज्य की वैभवशाली राजधानी की वह गूंज फिर से सुनाई दी, जिसने कभी विश्व को चाणक्य, अशोक और बौद्ध-जैन दर्शन दिया था। उन्होंने कहा कि ‘पाटलिपुत्र’ उच्चारण मात्र से सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। उन्होंने यह मांग केवल एक शहर के नाम की नहीं- बिहार के गौरव, इतिहास और आत्मसम्मान को नई ऊर्जा देने की कोशिश के रूप में बताया। आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में जानिए, क्या पटना फिर से पाटलिपुत्र बनेगा। शहर के नाम बदलने की प्रक्रिया क्या है? इसमें कितना खर्च होगा। कुशवाहा के पाटलिपुत्र नाम करने के पीछे मंशा क्या है। सवाल-1ः पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की चर्चा कैसे शुरू हुई? जवाबः समय-समय पर पटना का नाम बदलने की मांग होती रही है। ताजा डिमांड राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने की है। 3 फरवरी को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कुशवाहा ने पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग की। सवाल-2ः पटना का नाम बदलने का अधिकार किसके पास है? प्रक्रिया क्या है? जवाबः देश की आजादी के बाद से अब तक 21 राज्यों ने 250 से ज्यादा जगहों के नाम बदले हैं। शहर और राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया अलग-अलग है। पटना का नाम बदलने का अधिकार राज्य की कैबिनेट के पास है। पूरा नियम जानिए… हालांकि, राज्य का नाम बदलने का नियम अलग है… सवाल-3ः अगर पटना का नाम बदलता है तो कितना खर्च होगा? जवाबः कितना खर्च होगा, इसका सही आंकड़ा तो निकालना मुश्किल है। लेकिन अनुमान के मुताबिक, पटना का नाम बदलने पर 300 करोड़ से ज्यादा खर्च होगा। यह अनुमान इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने पर होने वाले खर्च के आधार पर है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने पर 300 करोड़ रुपए खर्च हुआ था। पैसा कहां-कहां खर्च होता है…जानिए सवाल-4ः पाटलिपुत्र नाम करने की डिमांड क्यों होती है? कुशवाहा की मंशा क्या है? जवाबः इसके 2 बड़े कारण हैं… 1. सांस्कृतिक विरासत बचाना पाटलिपुत्र से चलने वाले साम्राज्य में अशोक का साम्राज्य सबसे बड़ा था। उत्तर पश्चिम में तो अशोक ने जिस प्रशासनिक सीमा का निर्धारण किया, उसे मुगल और अंग्रेज भी पार नहीं कर पाए। वह अपनी युगांतकारी सोच के कारण समय से काफी आगे थे। 2. कुशवाहा संस्कृति की आड़ में जाति साध रहे 40 से 45 सीटों पर कुशवाहा अहम बिहार में कोइरी समाज की आबादी 4.2% है। माना जाता है कि मगध, शाहाबाद, सीवान, भागलपुर-बांका, पूर्णिया, बेतिया-मोतिहारी एरिया की 40 से 45 सीटों पर कोइरी समाज अहम फैक्टर है। सवाल-5ः पटना नाम कब और कैसे पड़ा? जवाबः आज के पटना का नाम सदियों पहले पाटलिपुत्र ही था। नाम की दो कहानियां हैं… पहली कहानी- कहा जाता है कि आज से करीब तीन हजार साल पहले यहां बहुत सारे पाटलि वृक्ष थे। इन पाटलि वृक्षों (औषधीय पौधा) के कारण इसे पाटलिग्राम कहा जाता था। बाद में नगर बनने पर पाटलिपुत्र कहा गया। दूसरी कहानी- लोक कथाओं में राजा पत्रक को आधुनिक पटना का जनक कहा जाता है। राजा पत्रक ने अपनी रानी पाटलि के लिए जादू से इस नगर का निर्माण किया था। शेरशाह सूरी के पटन को अंग्रेजों ने बनाया पटना


