ओडिशा, झारखंड के अलग होने के बाद क्या बिहार का एक बार फिर बंटवारा होगा। अमित शाह के दौरे, नए राज्यपाल की नियुक्ति और मुख्यमंत्री बदले जाने की खबर के बीच सीमांचल इलाके में उबाल है। अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने ऐसे किसी भी तरह के प्रस्ताव से इनकार किया है। साथ ही इन चर्चाओं को अफवाह करार दिया है। लेकिन सियासत में कई चालें ऐसी होती हैं, चली पहले जाती है…बताई बाद में जाती हैं। सीमांचल अलग क्यों हो सकता है। नया राज्य बनाने का नियम क्या है। क्या नीतीश कुमार को इसलिए हटाया गया। इन सवालों के जवाब…आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की चर्चा का पूरा मामला क्या है? जवाबः 25 से 27 फरवरी तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीमांचल के दौरे पर थे। उन्होंने बॉर्डर से जुड़ी सुरक्षा की समीक्षा बैठक की। इस दौरे के बाद 28 फरवरी को AIMIM विधायक तौसिफ आलम ने कहा कि केंद्र सरकार सीमांचल और बंगाल के कुछ एरिया को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने जा रही है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। केंद्र सरकार ने इन चर्चाओं पर क्या जवाब दिया सवाल-2ः नया राज्य बनाने का नियम क्या है? जवाबः संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत अलग राज्य के गठन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। वह किसी भी राज्य का क्षेत्र बढ़ा या घटा सकती है, सीमाएं बदल सकती है। वह राज्य का नाम भी बदल सकती है। इसके लिए पहले विधानसभा नए राज्य के गठन का प्रस्ताव पास करती है। फिर इसे राष्ट्रपति को भेजती है। इस पर केंद्र कदम उठा सकता है। गृह मंत्री संसद में नए राज्य के गठन का प्रस्ताव पेश करते हैं। इसमें यह भी तय होता है कि नए राज्य में कितने जिले, विधानसभा और लोकसभा सीटें होंगी। सवाल-3ः क्यों बनाए जाते हैं केंद्र शासित प्रदेश? जवाबः किसी क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के पीछे उन क्षेत्रों का छोटा आकार, कम जनसंख्या, अन्य राज्यों से दूरी, अलग संस्कृति कारण होती है। सवाल-4ः सीमांचल क्या केंद्र शासित प्रदेश बन सकता है? जवाबः बिल्कुल। सीमांचल उन नियमों पर फिट बैठता है, लेकिन केंद्र सरकार ने अलग प्रदेश बनाने के प्रस्ताव की खबरों को अफवाह बताया है। सीमांचल क्यों अलग हो सकता है, इसे ऐसे समझिए… बिहार के नए राज्यपाल बने लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रि) से भास्कर ने कुछ महीने पहले चिकन नेक पर खतरे के संबंध में बात की थी। तब उन्होंने कहा था- चिकन नेक कॉरिडोर पर खतरा बढ़ा है। हालांकि, वे सेना का इस्तेमाल करके कॉरिडोर के इलाके को बढ़ाने की जरूरत से इनकार करते हैं। इसकी बजाय वे कूटनीति और गैर-सैन्य तरीकों से इसकी सुरक्षा पर जोर देते हैं। आर्थिक रूप से भी सीमांचल सबसे पीछे सवाल-5ः सीमांचल केंद्र शासित प्रदेश बना तो क्या बदल जाएगा? जवाबः देश में 3 तरह के राज्य हैं। पूर्ण राज्य, विधानसभा वाले केन्द्र शासित राज्य और बिना विधानसभा वाले केन्द्र शासित राज्य। सीमांचल के अलग होने की बात को ही केंद्र सरकार ने अफवाह बताया है तो अभी कुछ कहा नहीं जा सकता कि सीमांचल किस तरह का राज्य होगा। लेकिन तीनों राज्यों का अंतर ग्राफिक्स के जरिए समझ लीजिए… सवाल-6ः क्या सीमांचल को लेकर कठोर निर्णय लेने के लिए नीतीश कुमार को हटाया जा रहा? जवाबः ऑफिशियल तौर पर नीतीश कुमार ने कहा- मेरी बहुत दिनों से राज्यसभा जाने की इच्छा थी, इसलिए अब राज्यसभा जा रहे हैं। हालांकि, नीतीश कुमार के इस तर्क पर राजनीतिक गलियारे में सवाल उठ रहे हैं। मुख्य तौर पर नीतीश की विदाई के पीछे उनकी स्वाथ्य संबंधी दिक्कतें हैं। बताया जा रहा कि शाह ने सीमांचल दौरे के दौरान बिहार सरकार के कामकाज का फीडबैक लिया था। इसमें यह बात सामने आई कि राज्य सरकार अफसरों की एक लॉबी के सहारे चल रही है। अफसर ही सब निर्णय ले रहे हैं। बंगलादेश और नेपाल में भारत विरोधी ताकतों के मजबूत होने के बाद बिहार की सीमा की सुरक्षा से संबंधित फैसलों को अफसरों के भरोसे छोड़ना ठीक नहीं था। यही कारण है कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मनाया गया। ओडिशा, झारखंड के अलग होने के बाद क्या बिहार का एक बार फिर बंटवारा होगा। अमित शाह के दौरे, नए राज्यपाल की नियुक्ति और मुख्यमंत्री बदले जाने की खबर के बीच सीमांचल इलाके में उबाल है। अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने ऐसे किसी भी तरह के प्रस्ताव से इनकार किया है। साथ ही इन चर्चाओं को अफवाह करार दिया है। लेकिन सियासत में कई चालें ऐसी होती हैं, चली पहले जाती है…बताई बाद में जाती हैं। सीमांचल अलग क्यों हो सकता है। नया राज्य बनाने का नियम क्या है। क्या नीतीश कुमार को इसलिए हटाया गया। इन सवालों के जवाब…आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की चर्चा का पूरा मामला क्या है? जवाबः 25 से 27 फरवरी तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीमांचल के दौरे पर थे। उन्होंने बॉर्डर से जुड़ी सुरक्षा की समीक्षा बैठक की। इस दौरे के बाद 28 फरवरी को AIMIM विधायक तौसिफ आलम ने कहा कि केंद्र सरकार सीमांचल और बंगाल के कुछ एरिया को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने जा रही है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। केंद्र सरकार ने इन चर्चाओं पर क्या जवाब दिया सवाल-2ः नया राज्य बनाने का नियम क्या है? जवाबः संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत अलग राज्य के गठन का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। वह किसी भी राज्य का क्षेत्र बढ़ा या घटा सकती है, सीमाएं बदल सकती है। वह राज्य का नाम भी बदल सकती है। इसके लिए पहले विधानसभा नए राज्य के गठन का प्रस्ताव पास करती है। फिर इसे राष्ट्रपति को भेजती है। इस पर केंद्र कदम उठा सकता है। गृह मंत्री संसद में नए राज्य के गठन का प्रस्ताव पेश करते हैं। इसमें यह भी तय होता है कि नए राज्य में कितने जिले, विधानसभा और लोकसभा सीटें होंगी। सवाल-3ः क्यों बनाए जाते हैं केंद्र शासित प्रदेश? जवाबः किसी क्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के पीछे उन क्षेत्रों का छोटा आकार, कम जनसंख्या, अन्य राज्यों से दूरी, अलग संस्कृति कारण होती है। सवाल-4ः सीमांचल क्या केंद्र शासित प्रदेश बन सकता है? जवाबः बिल्कुल। सीमांचल उन नियमों पर फिट बैठता है, लेकिन केंद्र सरकार ने अलग प्रदेश बनाने के प्रस्ताव की खबरों को अफवाह बताया है। सीमांचल क्यों अलग हो सकता है, इसे ऐसे समझिए… बिहार के नए राज्यपाल बने लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (रि) से भास्कर ने कुछ महीने पहले चिकन नेक पर खतरे के संबंध में बात की थी। तब उन्होंने कहा था- चिकन नेक कॉरिडोर पर खतरा बढ़ा है। हालांकि, वे सेना का इस्तेमाल करके कॉरिडोर के इलाके को बढ़ाने की जरूरत से इनकार करते हैं। इसकी बजाय वे कूटनीति और गैर-सैन्य तरीकों से इसकी सुरक्षा पर जोर देते हैं। आर्थिक रूप से भी सीमांचल सबसे पीछे सवाल-5ः सीमांचल केंद्र शासित प्रदेश बना तो क्या बदल जाएगा? जवाबः देश में 3 तरह के राज्य हैं। पूर्ण राज्य, विधानसभा वाले केन्द्र शासित राज्य और बिना विधानसभा वाले केन्द्र शासित राज्य। सीमांचल के अलग होने की बात को ही केंद्र सरकार ने अफवाह बताया है तो अभी कुछ कहा नहीं जा सकता कि सीमांचल किस तरह का राज्य होगा। लेकिन तीनों राज्यों का अंतर ग्राफिक्स के जरिए समझ लीजिए… सवाल-6ः क्या सीमांचल को लेकर कठोर निर्णय लेने के लिए नीतीश कुमार को हटाया जा रहा? जवाबः ऑफिशियल तौर पर नीतीश कुमार ने कहा- मेरी बहुत दिनों से राज्यसभा जाने की इच्छा थी, इसलिए अब राज्यसभा जा रहे हैं। हालांकि, नीतीश कुमार के इस तर्क पर राजनीतिक गलियारे में सवाल उठ रहे हैं। मुख्य तौर पर नीतीश की विदाई के पीछे उनकी स्वाथ्य संबंधी दिक्कतें हैं। बताया जा रहा कि शाह ने सीमांचल दौरे के दौरान बिहार सरकार के कामकाज का फीडबैक लिया था। इसमें यह बात सामने आई कि राज्य सरकार अफसरों की एक लॉबी के सहारे चल रही है। अफसर ही सब निर्णय ले रहे हैं। बंगलादेश और नेपाल में भारत विरोधी ताकतों के मजबूत होने के बाद बिहार की सीमा की सुरक्षा से संबंधित फैसलों को अफसरों के भरोसे छोड़ना ठीक नहीं था। यही कारण है कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मनाया गया।


