Political Tsunami : नेपाल प्रतिनिधि सभा चुनाव ( Nepal Election 2026) की मतगणना के जो शुरुआती रुझान सामने आ रहे हैं, उसने एक बड़ी सियासी सुनामी (Political Tsunami) का संकेत दे दिया है। इस 5 मार्च को हुए मतदान के बाद 6 मार्च को 135 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। इस बार के चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP wave Nepal) ने किया है। देश भर में चल रही रास्वपा की आंधी के सामने नेपाली कांग्रेस, एमाले और माओवादी केंद्र जैसी पुरानी और स्थापित पार्टियां बुरी तरह हांफती हुई नजर आ रही हैं। जनता ने स्पष्ट रूप से बदलाव के लिए वोट किया है। रुझानों के अनुसार, रास्वपा 68 से 108 सीटों के बीच मजबूत बढ़त बनाए हुए है और मुस्तांग सीट पर उसने अपना खाता भी खोल लिया है। सबसे चौंकाने वाली खबर झापा-5 से है, जहां बालेन शाह (Balen Shah) ने नेपाल के दिग्गज नेता और पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली (KP Oli trailing) को 9,000 से अधिक वोटों से पीछे छोड़ दिया है। काठमांडू की लगभग सभी प्रमुख सीटों पर रास्वपा के उम्मीदवार, जैसे रंजू दर्शना और शिशिर खनाल, भारी मतों से आगे चल रहे हैं।
पुराने राजनीतिक दलों की खस्ता हालत (Nepal election results)
नेपाली कांग्रेस और नेकपा (एमाले) 10 से 13 सीटों के आसपास सिमटती हुूई दिख रही हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेता शेखर कोइराला पीछे चल रहे हैं, जबकि एमाले के दिग्गज माधव कुमार नेपाल केवल 220 वोटों के साथ पांचवें नंबर पर संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि, माओवादी केंद्र के नेता प्रचंड रुकुम पूर्व से अपनी जीत के करीब हैं, लेकिन कुल मिलाकर पुरानी पार्टियों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने तो रुझानों को देखते हुए अपनी हार लगभग स्वीकार कर ली है।
क्या नेपाल में किसी नए गठबंधन की सरकार बनेगी
नेपाल की जनता और युवाओं ने स्थापित राजनीतिक दलों के खिलाफ अपना गुस्सा वोट के जरिए निकाला है। रास्वपा नेताओं में भारी उत्साह है और उन्होंने ‘जनादेश’ का सम्मान करते हुए 100 दिनों के भीतर नतीजे देने का वादा किया है। पुराने दलों के खेमे में मायूसी छाई हुई है। अब पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नजरें अंतिम नतीजों पर हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रास्वपा अकेले दम पर पूर्ण बहुमत का आंकड़ा पार कर लेगी या नेपाल में किसी नए गठबंधन की सरकार बनेगी।
जो वोटर घरों से निकले, वे सिर्फ बदलाव के मकसद से ही बूथ तक गए थे
चुनाव आयोग जल्द ही अंतिम परिणाम घोषित करेगा। इस चुनाव का एक अहम पहलू यह भी है कि मतदान का प्रतिशत ऐतिहासिक रूप से काफी कम रहा। कम वोटिंग के बावजूद किसी एक नई पार्टी (RSP) के पक्ष में इतनी बड़ी लहर उठना इस बात का प्रमाण है कि जो वोटर घरों से निकले, वे सिर्फ बदलाव के मकसद से ही पोलिंग बूथ तक गए थे।


