सऊदी प्रिंस को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की विवादित टिप्पणी, क्या टूट जाएगी अमेरिका-सऊदी की दोस्ती?

सऊदी प्रिंस को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की विवादित टिप्पणी, क्या टूट जाएगी अमेरिका-सऊदी की दोस्ती?

Donald Trump Saudi Remark: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) को लेकर एक विवादित और अश्लील टिप्पणी कर दी है। सऊदी अरब के पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड से जुड़े फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव इंस्टीट्यूट के समिट में बोलते हुए ट्रंप ने कहा, ‘वो नहीं सोचता था कि ऐसा होगा। वो नहीं सोचता था कि मेरी चापलूसी करनी पड़ेगी… वो सोचता था कि मैं बस एक और अमेरिकी राष्ट्रपति हूं जिसका देश नीचे जा रहा है। लेकिन अब उसे मेरे साथ अच्छा व्यवहार करना पड़ेगा।’

ट्रंप के बयान से मचा हड़कंप

ट्रंप ने आगे कहा, ‘आप उसे बताएं कि वो मेरे साथ अच्छा बर्ताव करे… उसे अच्छा होना चाहिए।’ बाद में उन्होंने अपना लहजा नरम करते हुए एमबीएस को ‘स्मार्ट और बहुत नॉर्मल तरह का आदमी’ बताया और कहा कि एक साल पहले सऊदी नेता अमेरिका को मृत देश मानते थे, लेकिन अब अमेरिका दुनिया का सबसे हॉट देश बन गया है। यह टिप्पणी ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी अभियान के बीच आई है।

ट्रंप का बयान बदल सकता है खाड़ी देशों का समीकरण

ट्रंप ने समिट में कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व को ईरानी आतंकवाद, आक्रामकता और न्यूक्लियर ब्लैकमेल से मुक्त करने के करीब है। उन्होंने दावा किया, ’47 साल से ईरान मध्य पूर्व का बुली था, लेकिन अब वो भाग रहा है।’ ईरान ने हाल ही में सऊदी ऊर्जा सुविधाओं पर हमले किए हैं, जिसमें रास तनुरा रिफाइनरी और शायबह ऑयल फील्ड शामिल हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब अमेरिका से ईरान पर लगातार हमले जारी रखने की अपील कर रहा है और इसे क्षेत्र को नया आकार देने का ऐतिहासिक अवसर मान रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजराइल पर हमले शुरू कर दिए हैं।

6 अप्रैल तक टला हमला

ट्रंप ने ईरान से बातचीत की डेडलाइन बढ़ा दी है और 6 अप्रैल तक उसके पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला टाल दिया है। इस बीच सऊदी अरब अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी बना हुआ है। ट्रंप ने कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिका की धारणा में सुधार हुआ है।

क्या रिश्ते पर असर पड़ेगा?

ट्रंप की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है। हालांकि, अमेरिका और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी तेल, सुरक्षा, ईरान विरोध और निवेश पर आधारित है। दोनों देश लंबे समय से करीबी सहयोगी रहे हैं। ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी एमबीएस के साथ उनके अच्छे संबंध रहे थे।

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