Zayed Khan Breaks Silence on Hindu cremation of his mother: बॉलीवुड के गलियारों में पिछले साल एक ऐसी खबर आई जिसने हर किसी को गमगीन कर दिया था। दिग्गज अभिनेता संजय खान की पत्नी और जायद खान की मां जरीन खान का 81 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हुआ था। लेकिन उनकी अंतिम विदाई ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी थी। जब जरीन खान को उनके बेटे जायद खान ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विदा किया थी। जिसके वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने धर्म और परंपराओं को लेकर जायद खान पर कई सवाल उठाए थे। अब जायद खान ने उन तमाम बातों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और इसका बड़ा कारण भी लोगों को बताया है।
जायद ने बताया क्यों हुआ मां का ऐसा अंतिम संस्कार (Zayed Khan on Why Hindu cremation of his mother)
जायद खान ने जूम को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि मेरी मां जो अपनी मां पारसी मूल की थीं उन्होंने एक मुस्लिम परिवार में शादी की थी, लेकिन उनके विचार हमेशा से बहुत खुले और आध्यात्मिक थे। जायद ने खुलासा किया कि उनकी मां की आखिरी ख्वाहिश थी कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से हो और उनकी अस्थियों को एक पवित्र नदी में प्रवाहित किया जाए ताकि उन्हें ‘मुक्ति’ मिल सके। जायद ने कहा, “एक बेटे के तौर पर मेरा सबसे बड़ा धर्म अपनी मां की आखिरी इच्छा को पूरा करना था, न कि समाज के डर से किसी रस्म को निभाना।”

इंसानियत को धर्म से ऊपर रखने वाला परिवार (Zayed Khan defends mother’s Hindu funeral)
धर्म को लेकर सोशल मीडिया पर हुई ट्रोलिंग और तीखे सवालों पर जायद ने बहुत ही परिपक्वता से जवाब दिया। उन्होंने कहा, “हमारे घर में कभी किसी एक धर्म को श्रेष्ठ नहीं माना गया। हमारे यहां इंसानियत को सबसे ऊपर रखा जाता है। मेरे घर में अलग-अलग बैकग्राउंड और मजहब के लोग काम करते हैं और हम सबके साथ समान व्यवहार करते हैं। धर्म एक बेहद निजी मामला है और इस पर सड़क पर बहस करना सही नहीं है।”
यादों में जरीन खान का फिल्मी सफर (Zayed Khan mother Zarine Khan)
जरीन खान का फिल्मी दुनिया से गहरा नाता रहा। उन्होंने साल 1963 में देव आनंद की मशहूर फिल्म ‘तेरे घर के सामने’ में काम किया था। बाद में उन्होंने संजय खान से शादी की और ग्लैमर की दुनिया से दूर रहकर अपने परिवार को संभाला। उनके परिवार में बेटा जायद और तीन बेटियां- सुजैन, फराह और सिमोन शामिल हैं। 7 नवंबर को उम्र संबंधी दिक्कतों की वजह से उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

जायद खान के इस कदम ने यह साबित कर दिया है कि रिश्तों की पवित्रता और मां के प्रति प्यार किसी भी मजहबी दीवार से कहीं ऊंचा होता है। आज जब दुनिया छोटी-छोटी बातों पर बंट रही है, खान परिवार का यह फैसला सद्भाव की एक नई कहानी लिखता है।


