-रकबा और उत्पादन घटने से सूखी मिर्च ने दिखाया तीखापन
-खेती घटी, मांग बढ़ी, रिकॉर्ड ऊंचाई पर भाव: कीमतें 78 हजार रुपए प्रति क्विंटल पार
कर्नाटक Karnataka में इस वर्ष सूखी लाल मिर्च dry red chillies की खेती के रकबे में भारी कमी और उत्पादन में आई तेज गिरावट का सीधा असर बाजार पर दिखाई देने लगा है। सीमित आवक और घरेलू तथा निर्यात बाजारों में बनी मजबूत मांग के चलते उच्च गुणवत्ता वाली सूखी लाल मिर्च के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। इस सीजन में बेहतर गुणवत्ता वाली मिर्च की कीमतें 78 हजार रुपए प्रति क्विंटल को पार कर चुकी हैं, जिससे मिर्च बाजार में तीखापन साफ नजर आ रहा है।
मुख्य रूप से ब्याडगी कड्डी किस्म की मिर्च शामिल
ब्याडगी के बाद सूखी मिर्च का प्रमुख व्यापारिक केंद्र मानी जाने वाली हुब्बल्ली कृषि उपज मंडी (एपीएमसी) में दिसंबर से अब तक कुल 55,436 क्विंटल सूखी मिर्च की आवक दर्ज की गई है। इसमें मुख्य रूप से ब्याडगी कड्डी किस्म की मिर्च शामिल है। इस अवधि के दौरान मंडी में मिर्च के भाव न्यूनतम 800 रुपए से लेकर अधिकतम 78,211 रुपए प्रति क्विंटल तक दर्ज किए गए। इसके विपरीत, पिछले वर्ष इसी अवधि में मंडी में 94,720 क्विंटल मिर्च की आवक हुई थी और कीमतें 1,000 से 46,111 रुपए प्रति क्विंटल के बीच रही थीं। आवक में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट ने कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
पांच वर्षों में सबसे कम
कर्नाटक राज्य मसाला विकास बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार राज्य में सूखी लाल मिर्च की खेती का कुल रकबा घटकर लगभग 79,152 हेक्टेयर रह गया है, जबकि अनुमानित उत्पादन 1.58 लाख मीट्रिक टन बताया गया है। यह बीते पांच वर्षों में सबसे कम है। वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच राज्य में मिर्च की खेती का रकबा कभी 1.20 लाख हेक्टेयर से नीचे नहीं गया था और उत्पादन भी 1.70 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहा था।
किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया
राज्य के प्रमुख सूखी मिर्च उत्पादक जिलों में बल्लारी, रायचूर, गदग, धारवाड़ और बागलकोट शामिल हैं। वर्ष 2023-24 के मौसम में राज्य में दो लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मिर्च की खेती हुई थी और उत्पादन तीन लाख मीट्रिक टन से ज्यादा दर्ज किया गया था। उस वर्ष अधिक उत्पादन के कारण बाजार में कीमतें कमजोर रहीं, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
दूसरी फसलों की ओर रुख
कर्नाटक राज्य मसाला विकास बोर्ड के प्रबंध निदेशक बी. आर. गिरीश के अनुसार पिछले मौसम में अधिक उत्पादन और कम कीमतों से हतोत्साहित होकर बड़ी संख्या में किसानों ने इस वर्ष दूसरी फसलों की ओर रुख किया। इसी कारण मिर्च की खेती का रकबा और उत्पादन दोनों घट गए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य के कुल मिर्च क्षेत्र के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से में ब्याडगी किस्म की खेती हो रही है। पारंपरिक ब्याडगी मिर्च की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हावेरी जिले के देवहोसूर स्थित बागवानी अनुसंधान केंद्र में विकसित नई किस्मों के बीज किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर
गिरीश ने बताया कि मसालों के कुल निर्यात में सूखी मिर्च और उससे जुड़े उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए सरकार मिर्च उत्पादक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है। ब्याडगी सहित अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सरकारी गोदाम स्थापित करने और हुब्बल्ली में गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला शुरू करने के प्रयास जारी हैं। इसके अलावा चिकमगलूरु जिले के मुडिगेरे तालुक में 35 करोड़ रुपए की लागत से पीपीपी मॉडल पर एक आधुनिक मसाला पार्क स्थापित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले सीजन में भी खेती का रकबा नहीं बढ़ा तो सूखी मिर्च की कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि, किसानों के लिए यह लाभ का अवसर है, लेकिन उपभोक्ताओं और प्रसंस्करण उद्योग के लिए महंगी मिर्च चिंता का कारण बन सकती है।
राज्य में सूखी लाल मिर्च की खेती
वर्ष – खेती का रकबा (हेक्टेयर) – उत्पादन (मीट्रिक टन)
2021-22 1.50 लाख – 2.13 लाख
2022-23 1.27 लाख – 1.71 लाख
2023-24 2.08 लाख – 3.20 लाख
2024-25 1.24 लाख – 2.19 लाख
2025-26 79,152 लाख – 1.58 लाख
स्रोत: कर्नाटक राज्य मसाला विकास बोर्ड


