Periods: वैसे तो पीरियड्स आना एक सामान्य और अच्छी बात है, लेकिन समय से पहले इनका शुरू होना सही नहीं होता। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खान-पान के चलते कम उम्र की लड़कियों में पीरियड्स शुरू होना (Early Puberty) एक बहुत ही गंभीर समस्या बनती जा रही है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इंस्टाग्राम चैनल drshaifali_gyne पर Dr. Shafali Dadhich Tungaria ने एक वीडियो शेयर कर माता-पिता को आगाह किया है। उन्होंने बताया है कि जो बदलाव प्राकृतिक रूप से 13-14 साल की उम्र में होने चाहिए, वे अब 8-10 साल की उम्र में ही क्यों दिखने लगे हैं। आइए, आज के लेख में Dr. Shafali Dadhich Tungaria के जरिए जानते हैं कि कम उम्र में लड़कियों को पीरियड्स क्यों होते हैं और इन्हें रोकने के लिए क्या करना चाहिए।
समय से पहले पीरियड्स आने के मुख्य कारण
केमिकल का प्रभाव
अक्सर माता-पिता खेल-खेल में छोटी बच्चियों को लिपस्टिक, नेल पेंट, काजल या परफ्यूम लगाने देते हैं। डॉ. शेफाली के अनुसार, इन चीजों में बहुत ज्यादा केमिकल्स होते हैं। जब ये केमिकल बच्ची के शरीर के संपर्क में आते हैं, तो वे असली हार्मोन्स की तरह व्यवहार करने लगते हैं। इससे शरीर का सिस्टम भ्रमित (Confuse) हो जाता है और जो बदलाव 13-14 साल की उम्र में होने चाहिए, वे 5-6 साल की उम्र से ही शुरू हो जाते हैं।
डिजिटल लाइफस्टाइल और मोबाइल का प्रभाव
आजकल बच्चे मोबाइल और गैजेट्स पर बहुत ज्यादा समय बिताते हैं। इंटरनेट पर वे अक्सर ऐसा कंटेंट देख लेते हैं जो उनकी उम्र के हिसाब से सही नहीं होता। इससे उनके मन में समय से पहले बड़े होने वाली भावनाएं जागने लगती हैं। जब दिमाग जल्दी मैच्योर होने के संकेत देता है, तो इसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है और शारीरिक विकास की गति जरूरत से ज्यादा तेज हो जाती है।
प्लास्टिक और गलत खान-पान
आजकल बच्चों की डाइट में चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेट बंद खाना ज्यादा शामिल हो गया है। ये चीजें शरीर के जरूरी पोषक तत्वों को खत्म कर देती हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीना या प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाने से ‘माइक्रो-प्लास्टिक्स’ शरीर के अंदर चले जाते हैं। ये प्लास्टिक शरीर के हार्मोन्स का संतुलन बिगाड़ देते हैं, जिससे पीरियड्स समय से पहले आने की संभावना बढ़ जाती है।
मोटापे और शारीरिक मेहनत की कमी
आजकल बच्चे बाहर मैदान में खेलने के बजाय घर के अंदर बैठना ज्यादा पसंद करते हैं। शारीरिक गतिविधि (Physical Activity) कम होने और वजन बढ़ने की वजह से भी शरीर में हार्मोनल बदलाव बहुत जल्दी आने लगते हैं। यह मोटापा इस पूरी समस्या को और भी ज्यादा गंभीर बना देता है।
बचाव के लिए क्या करें?
डॉ. शेफाली के अनुसार, अगर आप चाहते हैं कि आपकी बेटी को समय से पहले पीरियड्स न आएं, तो माता-पिता को कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। सबसे पहले बच्चों के खाने-पीने की आदतों को सुधारें, उनकी डाइट में प्रोटीन वाली चीजें बढ़ाएं और उन्हें जंक फूड व कोल्ड ड्रिंक्स से पूरी तरह दूर रखें। इसके साथ ही, बच्चों का बाहर मैदान में खेलना और पसीना बहाना बहुत जरूरी है, क्योंकि शारीरिक मेहनत से उनके हार्मोन्स संतुलित रहते हैं। छोटी बच्चियों को खेल-खेल में भी मेकअप, लिपस्टिक या परफ्यूम जैसी केमिकल वाली चीजों का इस्तेमाल न करने दें।
इसके साथ ही ध्यान दें अगर 8 साल से कम उम्र में बच्ची के शरीर में कोई भी बदलाव (जैसे ब्रेस्ट का बढ़ना) नजर आए, तो इसे मामूली समझकर छोड़ें नहीं, बल्कि तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लें। याद रखें, सही समय पर सावधानी बरतकर और रहन-सहन में छोटे-छोटे बदलाव करके ही हम अपनी बच्चियों को स्वस्थ रख सकते हैं।


