विमान हादसों के बाद क्यों खोजा जाता है ब्लैक बॉक्स? कैसे खुलती है जांच की परतें

विमान हादसों के बाद क्यों खोजा जाता है ब्लैक बॉक्स? कैसे खुलती है जांच की परतें

Black Box of Plane: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार से जुड़ी विमान हादसे की खबरों के सामने आने के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि ऐसे हादसों की असली वजह आखिर कैसे पता लगाई जाती है। हर बड़े विमान दुर्घटना के बाद जांच एजेंसियों की पहली प्राथमिकता ब्लैक बॉक्स को ढूंढना होती है। इसी के जरिए यह समझने की कोशिश की जाती है कि हादसे से ठीक पहले विमान और कॉकपिट के भीतर क्या-क्या हुआ। ऐसे में जानना जरूरी है कि ब्लैक बॉक्स क्या होता है और यह कैसे किसी भी विमान हादसे की जांच की परतें खोलता है।

Black Box of Plane Crash: ब्लैक बॉक्स क्या होता है?

ब्लैक बॉक्स विमान में लगा एक खास रिकॉर्डिंग सिस्टम होता है, जिसमें उड़ान से जुड़ी बेहद अहम जानकारियां सुरक्षित रहती हैं। नाम के उलट इसका रंग काला नहीं, बल्कि चमकीला नारंगी होता है, ताकि दुर्घटना के बाद मलबे में इसे आसानी से खोजा जा सके। इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि आग, पानी, तेज दबाव और जोरदार टक्कर के बावजूद अंदर का डेटा सुरक्षित रहे।

दो हिस्सों में काम करता है ब्लैक बॉक्स

ब्लैक बॉक्स असल में दो अलग-अलग रिकॉर्डर से मिलकर बना होता है।

CVR (Cockpit Voice Recorder): इसमें कॉकपिट के अंदर की आवाजें रिकॉर्ड होती हैं। पायलट और को-पायलट की बातचीत, चेतावनी अलार्म और अन्य आवाजें जांच के लिए अहम संकेत देती हैं। इनसे यह समझने में मदद मिलती है कि किसी आपात स्थिति में कॉकपिट में क्या निर्णय लिए गए।

FDR (Flight Data Recorder): यह विमान के तकनीकी डेटा को रिकॉर्ड करता है जैसे गति, ऊंचाई, दिशा, इंजन की स्थिति, कंट्रोल सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण पैरामीटर। यही डेटा बताता है कि विमान के सिस्टम सामान्य थे या किसी तरह की तकनीकी गड़बड़ी आई थी।

हादसे के बाद ब्लैक बॉक्स क्यों बन जाता है सबसे अहम कड़ी?

विमान दुर्घटना में अक्सर बाहरी सबूत नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में ब्लैक बॉक्स ही वह भरोसेमंद स्रोत होता है, जो यह बताता है कि हादसे से पहले आखिरी कुछ मिनटों में क्या हुआ। CVR और FDR के डेटा को मिलाकर जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम को क्रमवार समझने की कोशिश करती हैं।

क्रैश के बावजूद कैसे सुरक्षित रहता है ब्लैक बॉक्स?

ब्लैक बॉक्स की बनावट बेहद मजबूत होती है। इसे हजारों डिग्री तापमान, समुद्र की गहराई में भारी दबाव और तेज टक्कर सहने लायक बनाया जाता है। इसमें लगे विशेष बीकन सिग्नल हादसे के बाद इसकी लोकेशन बताने में मदद करते हैं, जिससे खोज अभियान आसान हो जाता है।

कैसे खुलती है जांच की परतें?

  • ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद उसे विशेष लैब में ले जाकर डेटा निकाला जाता है।
  • CVR से पायलटों की आखिरी बातचीत और अलार्म की जानकारी मिलती है।
  • FDR से तकनीकी आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है।
  • इन दोनों को मिलाकर यह पता लगाने की कोशिश होती है कि दुर्घटना तकनीकी खराबी, मौसम, या मानवीय चूक के कारण हुई।

यात्रियों की सुरक्षा से क्यों जुड़ा है ब्लैक बॉक्स?

ब्लैक बॉक्स से मिले निष्कर्षों के आधार पर ही एविएशन इंडस्ट्री में समय-समय पर नियम सख्त किए गए हैं। बेहतर ट्रेनिंग, एडवांस तकनीक और सुरक्षा मानकों के पीछे कई हादसों से मिली सीख शामिल होती है।

ब्लैक बॉक्स सिर्फ एक रिकॉर्डिंग डिवाइस नहीं, बल्कि विमान हादसों की जांच की सबसे मजबूत कड़ी है। यह दुर्घटना की वजह समझने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में भी अहम भूमिका निभाता है।

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