कौन था सैफ अल इस्लाम, जिसे 4 हमलावरों ने दिनदहाड़े गोली मार दी

कौन था सैफ अल इस्लाम, जिसे 4 हमलावरों ने दिनदहाड़े गोली मार दी

Zintan: लीबिया की राजनीति में तूफान खड़ा करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे और देश के संभावित भावी नेता माने जाने वाले सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी (Saif al-Islam Gaddafi) की हत्या कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार 3 फरवरी 2026 को पश्चिमी लीबिया के जिंतान (Zintan) शहर में उनके आवास पर अज्ञात हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया।

वारदात की पूरी कहानी: कैसे हुई हत्या ?

घटना के वक्त सैफ अल-इस्लाम अपने सुरक्षित आवास में मौजूद थे। उनके वकील खालिद अल-जैदी (Khaled el-Zaydi) और राजनीतिक सलाहकार अब्दुल्ला उस्मान ने पुष्टि की है कि यह एक सुनियोजित हमला था। रिपोर्ट्स बताती हैं कि चार नकाबपोश हमलावर (masked gunmen) दीवार फांद कर उनके परिसर में दाखिल हुए। हमलावरों ने सबसे पहले वहां लगे सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा अलार्म निष्क्रिय (disable) किए, ताकि उनकी पहचान न हो सके। इसके बाद उन्होंने सैफ को निशाना बना कर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। कुछ चश्मदीदों का कहना है कि हत्यारों ने “कमांडो स्टाइल” में ऑपरेशन को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए।

वकीलों का दावा और फॉरेंसिक रिपोर्ट

सैफ अल-इस्लाम की लीगल टीम ने इसे “राजनीतिक हत्या” और “कायरतापूर्ण कृत्य” करार दिया है। वकील अल-जैदी ने कहा कि सैफ 2026 के चुनावों के लिए तैयारी कर रहे थे और उनकी बढ़ती लोकप्रियता विरोधियों को खटक रही थी। लीबिया के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने भी पुष्टि की है कि सैफ की मौत गोली लगने (gunshot wounds) से हुई है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत इकट्ठे किए हैं, और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

लीबिया में फिर गृहयुद्ध का खतरा ?

इस हत्या ने लीबिया को एक बार फिर अस्थिरता के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। जिंतान वह जगह थी जहां सैफ को 2011 में पकड़ने के बाद रखा गया था, लेकिन बाद में वही रक्षक बन गए थे। उनकी मौत से गद्दाफी समर्थकों (जिन्हें ‘ग्रीन्स’ कहा जाता है) में भारी गुस्सा है। त्रिपोली में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

444 कॉम्बैट ब्रिगेड और विदेशी साजिश

लीबिया के शक्तिशाली मिलिशिया गुट ‘444 ब्रिगेड’ ने तुरंत बयान जारी कर इस हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। गद्दाफी के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर इसे “विदेशी साजिश” बताया है। उनका कहना है कि पश्चिमी ताकतें नहीं चाहती थीं कि गद्दाफी परिवार का कोई सदस्य दोबारा सत्ता में आए।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मांग

मानवाधिकार संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, यह देखते हुए कि सैफ आईसीसी (ICC) के वांटेड लिस्ट में भी थे।

विशेष जांच दल का गठन किया

लीबिया के अटॉर्नी जनरल ने विशेष जांच दल का गठन किया है, जो यह पता लगाएगा कि हमलावरों को सैफ के घर की सुरक्षा खामियों की जानकारी कैसे मिली। क्या घर का कोई भेदी इसमें शामिल था? सैफ के शव को जिंतान में ही एक अज्ञात स्थान पर दफनाए जाने की योजना है ताकि उनकी कब्र को निशाना न बनाया जा सके।

क्या चुनावों पर ग्रहण लगा ?

सैफ अल-इस्लाम एकमात्र ऐसे नेता थे जो पुराने शासन के वफादारों और कुछ नए आदिवासी गुटों को एक साथ ला सकते थे। उनकी मौत से लीबिया के आगामी चुनावों का समीकरण पूरी तरह बिगड़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अब सत्ता की लड़ाई खलीफा हफ्तार और त्रिपोली सरकार के बीच सीधी हो जाएगी, जिससे शांति प्रक्रिया को बड़ा झटका लगेगा।

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