मेरठ के दलित महिला की हत्या करने वाले आरोपी पारस सोम की याचिका पर कोर्ट आज सुनवाई करेगी। याचिका में पारस सोम को नाबालिग बताते हुए केस को जेजे बोर्ड ट्रांसफर करने की मांग की गई है। तीन अधिवक्ताओं के पैनल ने यह याचिका दायर की है। पारस की उम्र को लेकर शुरु से ही सवाल उठाए जा रहे थे। कागज सामने आए तो उसकी उम्र लगभग साढ़े 17 वर्ष निकली। इसी बीच तीन अधिवक्ताओं बलराम सोम, संजीव राणा और विजय शर्मा ने पारस के परिजनों से संपर्क किया और उसका केस लड़ने का ऐलान कर दिया। उनके द्वारा एससी-एसटी कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर आज सुनवाई होगी। पहले दो तस्वीरें देखिए… पहले एक नजर कपसाड़ कांड पर 8 जनवरी की सुबह सरधना के कपसाड़ गांव का पारस सोम इसी गांव की रहने वाली अनुसूचित जाति की रूबी को अगवा करके ले गया। जाते समय उसने रूबी की मां सुनीता पर बलकटी से वार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके बाद गांव में तनाव बढ़ता चला गया। 10 जनवरी को हुई रूबी बरामद सुनीता की मौत से गांव में तनाव फैल गया। पुलिस की 10 टीमें आरोपी की गिरफ्तारी व रूबी की बरामदगी के लिए लगाई गईं। 10 जनवरी की रात पुलिस को दोनों की सहारनपुर में मौजूद होने की सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस ने पारस सोम को गिरफ्तार करते हुए रूबी को सकुशल बरामद कर लिया। पारस जेल, रुबी को आशा ज्योति केंद्र भेजा 11 जनवरी को पुलिस ने पारस को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। रूबी के बयान दर्ज होने के बाद उसे आशा ज्योति केंद्र भेजा गया। 12 जनवरी को आशा ज्योति केंद्र में काउंसलिंग के बाद रूबी परिजनों की सुपुर्दगी में घर भेज दी गई। 11 से जेल में बंद है पारस सोम अपहरण व हत्या के आरोप में पारस सोम 11 जनवरी से जेल की सलाखों के पीछे बंद है। उसे शुरुआत के दस दिन 19 नंबर बैरक जोकि मुलाहिजा बैरक है, उसमें रखा गया। अब वह दूसरी बैरक में शिफ्ट हो गया है और आम बंदियों की तरह रह रहा है। तनाव के कारण कई दिन तक परिवार का कोई व्यक्ति उससे मिलने जेल नहीं पहुंचा। हमारे पास साक्ष्य मजबूत : संजीव राणा याचिका डालने वाले पैनल में शामिल अधिवक्ता संजीव राणा ने बताया कि उनके पास अपनी बात को पुष्ट करने का मजबूत साक्ष्य है। वह यह साक्ष्य कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। उम्मीद है कि कोर्ट इनका संज्ञान लेते हुए केस को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (किशोर न्याय बोर्ड) में ट्रांसफर करेगी।


