दुनिया का हर पांचवां तेल का जहाज एक ऐसी संकरी खाड़ी से गुजरता है जिस पर अब ईरान का दांव लग चुका है। वह है हार्मुज स्ट्रेट, यहां से रोज करीब दो करोड़ बैरल कच्चा तेल और गैस गुजरती है, अब सिर्फ एक रास्ता नहीं रहा। ईरान इसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बना चुका है और अब वो इस पर ‘टोल’ वसूलने की तैयारी में है।
हर जहाज पर 20 लाख डॉलर की मांग
हाल ही में एक ईरानी नेता ने अमेरिका और इजराइल के साथ चल रही जंग को खत्म करने की शर्तों की फेहरिस्त में एक नई बात जोड़ी जो पहले कभी नहीं थी, हार्मुज पर ईरान की संप्रभुता की मान्यता। यानी ईरान अब चाहता है कि दुनिया मान ले कि यह रास्ता उसका है।
इतना ही नहीं, ईरान की संसद में एक ऐसा कानून बनाने पर विचार हो रहा है जिसमें इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज से पैसे वसूले जाएं।
शिपिंग इंटेलिजेंस फर्म Lloyd’s List की रिपोर्ट के मुताबिक 20 से ज्यादा जहाज एक नए रास्ते से गए हैं और कम से कम दो जहाजों ने करीब 20 लाख डॉलर प्रति जहाज के हिसाब से भुगतान किया है।
मिस्र की स्वेज नहर से भी बड़ी कमाई का सपना
सीएनएन के आंकड़ों के मुताबिक, अगर ईरान यह टोल सिस्टम लागू कर दे तो सिर्फ तेल के जहाजों से हर महीने करीब 60 करोड़ डॉलर की कमाई हो सकती है। गैस के जहाज जोड़ें तो यह 80 करोड़ डॉलर प्रति महीने तक पहुंच सकती है।
तुलना के लिए, मिस्र अपनी स्वेज नहर से हर महीने करीब 70 से 80 करोड़ डॉलर कमाता था। फर्क यह है कि स्वेज एक बनाई हुई नहर है, हार्मुज एक प्राकृतिक रास्ता है, जिस पर किसी एक देश का मालिकाना हक अंतरराष्ट्रीय कानून में मान्य नहीं है।
अमेरिका और G7 ने कहा, यह गैरकानूनी है
हालांकि, अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव को साफ नकार दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फ्रांस में G7 बैठक के बाद साफ कहा कि यह न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है।
G7 देशों ने भी एक सुर में कहा कि जहाजों का बिना टोल के आना-जाना जरूरी रहना चाहिए। वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के जानकार और US Naval War College के प्रोफेसर James Kraska ने कहा कि हार्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है।
कोई भी तटीय देश यहां टोल नहीं वसूल सकता। यह समुद्री कानून के उस सिद्धांत के खिलाफ है जिसे दुनिया के ज्यादातर देश मानते हैं।
ईरान खुद हैरान है अपनी ताकत से
Bloomberg Economics में मध्य पूर्व की विशेषज्ञ Dina Esfandiary का कहना है कि ईरान खुद थोड़ा चौंका हुआ है कि इस रणनीति ने कितना असर डाला। इतने कम खर्च में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला देना, यह उन्होंने सोचा नहीं था।
उनका कहना है कि ईरान को अब अपनी यह ताकत समझ आई है और वो इसे पैसों में बदलना चाहता है। ईरान पर अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की लंबी मार झेल रहा यह देश रूस के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा प्रतिबंधित देश है। ऐसे में टोल वसूली उसके लिए प्रतिबंधों से हुए नुकसान की भरपाई का एक सस्ता और असरदार तरीका नजर आता है।
19 जहाजों पर हमला, शिपिंग उद्योग ‘ठप’
- युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने कम से कम 19 जहाजों पर हमला किया है। इससे इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है और दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई है।
- हालांकि ईरान ने कहा है कि जो जहाज उसकी मंजूरी लेकर चलें और उसके अधिकारियों से संपर्क करें उन्हें रोका नहीं जाएगा। ईरान की सेना ने मंजूर जहाजों की एक रजिस्ट्री भी बनाई है।
इतिहास में मिसाल नहीं
ऐसा पहले शायद ही कभी हुआ है कि किसी देश ने किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर सफलतापूर्वक टोल वसूला हो। उन्नीसवीं सदी में डेनमार्क ने भी ऐसी कोशिश की थी लेकिन 1857 में कई देशों के विरोध के बाद उसे यह बंद करना पड़ा था। अब सवाल यह है कि क्या ईरान वो कर पाएगा जो डेनमार्क नहीं कर पाया और क्या दुनिया इस बार चुप रहेगी।


