राजस्थान में पंचायत चुनाव कब होंगे? गांवों में दावेदार बैठाने लगे समीकरण, तैयारियां हर स्तर पर जारी

राजस्थान में पंचायत चुनाव कब होंगे? गांवों में दावेदार बैठाने लगे समीकरण, तैयारियां हर स्तर पर जारी

श्रीगंगानगर। पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से ‘गांव की सरकार’ के गठन को लेकर पिछले कई महीनों से चल रही असमंजस की स्थिति अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद भी बनी हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर प्रशासन चुनावों से जुड़े कार्यों को लगातार कर रहा है। चुनावों को लेकर सरपंच से लेकर जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदार जीत के समीकरण बैठाने में लगे हैं। एक ओर जहां प्रशासन चुनावी प्रक्रिया में लगा हुआ है, वहीं दूसरी ओर चुनाव की तारीखों की घोषणा करने में हो रही देरी ने उम्मीदवारी जताने वालों के साथ-साथ मतदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।

राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. मंजू 25 फरवरी को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में पंचायती राज आम चुनाव- 2026 के लिए मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर चुकी है। इसके बाद ईवीएम मशीनों की सार संभाल भी शुरू हो चुकी है। चुनाव कार्य से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हालांकि चुनाव की तिथियां घोषित नहीं हुई है, लेकिन चुनाव को लेकर जो तैयारियां करनी है, वह की जा रही है।

असमंजस की वजह

-राज्य की अधिकांश ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 2025 में ही समाप्त हो चुका है, जबकि लगभग 12 जिला परिषदों और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल सितंबर से दिसंबर 2026 तक है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि चुनाव एक साथ होंगे या चरणों में।

-सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सीमांकन विवाद पर फैसला सुनाते हुए 15 अप्रेल तक चुनाव संपन्न कराने की डेडलाइन तय की है। इस समय सीमा के बावजूद आधिकारिक अधिसूचना जारी न होने से संशय बरकरार है।

-सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गठित ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और नए सिरे से होने वाले आरक्षण रोटेशन को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

गांवों में माहौल चुनावी

भले ही पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन गांवों में चौपालें सजने लगी हैं। संभावित उम्मीदवार सोशल मीडिया और व्यक्तिगत जनसंपर्क के माध्यम से अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति के चलते विपक्ष इसे सरकार का ‘चुनावी डर’ बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि वे संवैधानिक प्रक्रियाओं और परिसीमन के कार्यों को पारदर्शी तरीके से पूरा कर रहे हैं।

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