जब परिवार ने जिंदा होने की उम्मीद छोड़ दी, तब SIR बनी संजीवनी…28 साल बाद मिले दो बिछड़े भाई

जब परिवार ने जिंदा होने की उम्मीद छोड़ दी, तब SIR बनी संजीवनी…28 साल बाद मिले दो बिछड़े भाई

महोबा से हैरान करने वाली खबर है, यहां के भंडरा गांव में एक परिवार के साथ ऐसी घटना हुई कि सहसा लोग आंखों पर यकीन नहीं कर पाए लेकिन बाद में एक उम्मीद जिंदा सच साबित हो गई। यहां SIR के कारण 28 साल से बिछड़े दो भाइयों का मिलन हो गया।

28 साल बाद हुआ बिछड़े भाइयों का मिलन

रोजगार की तलाश में घर से निकले आत्मदेव मिश्रा को अपनी पहचान साबित करने के लिए गांव के जानकारी की जरूरत पड़ी, जिसके बाद वह अपने घर लौटे। दरवाजे पर देख पहले तो लोगों को सहसा विश्वास नहीं हुआ फिर परिजनों के खुशी का ठिकाना न रहा।

परिजनों के मुताबिक 28 साल पहले शुरू हुई थी, जब आत्मदेव मिश्रा पुत्र गुनिया अपने साथी विजय के साथ बिना बताए गांव से चले गए थे। परिवार ने सालों तक उनकी तलाश की, लेकिन आत्मदेव का कोई सुराग नहीं मिला, धीरे-धीरे परिवार ने उनके जीवित होने की उम्मीद छोड़ दी थी।

SIR फॉर्म में डाटा भरने आत्मदेव पहुंचे अपने गांव

इस बीच निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे SIR अभियान में लोगों को डाटा की जरूरत पड़ी। राजस्थान के भरतपुर में मजदूरी कर रहे आत्मदेव को जब मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए वर्ष 2003 के रिकॉर्ड और पहचान के डाटा की आवश्यकता पड़ी, तो उनके पास घर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

दरवाजे पर भाई को देखते ही निकले खुशी के आंसू, भाभी ने लगाया तिलक

इन्हीं जानकारियों को भरने के लिए जैसे ही आत्मदेव अपने पैतृक घर भंडरा गांव पहुंचे, उनके भाई संतोष मिश्रा की आंखों से खुशी के आंसू निकलने लगे। 28 साल बाद अपने बिछड़े भाई को देखकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

आत्मदेव के घर आते है उसकी भाभी शांतिदेवी ने माथे में तिलक लगाकर स्वागत किया वहीं गांव और पड़ोस के लोगों ने गुलाल लगाकर आत्मदेव को गले से लगा लिया। इस दौरान आत्मदेव भी काफी भावुक नजर आए।

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