जब फतवे के शोर पर सलीम खान ने दिया था बेबाक बयान, बोले- ‘अगर फिल्म देखना गुनाह है तो देखने वालों पर भी लगे फतवा’

जब फतवे के शोर पर सलीम खान ने दिया था बेबाक बयान, बोले- ‘अगर फिल्म देखना गुनाह है तो देखने वालों पर भी लगे फतवा’

Salim Khan Opens Up on Fatwa against Bollywood: रमजान का महीना चल रहा है और इसके बाद आने वाली ईद का इंतजार सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री भी बेसब्री से करती है। ईद के मौके पर फिल्में रिलीज करने का ट्रेंड नया नहीं है, बल्कि सालों पुराना है। अगर बात की जाए बॉलीवुड की तो सलमान खान की तो ज्यादातर फिल्में रमजान और ईद के मौके पर रिलीज होती हैं और अच्छा प्रदर्शन करती हैं। सलमान खान की फिल्मों ने ईद के मौके पर बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड बनाए हैं।

मगर रमजान और ईद पर फिल्मों की रिलीज अकसर बहस का मुद्दा भी बन जाती है। कुछ साल पहले ऐसे ही एक मद्दे पर वेटरन स्क्रीनप्ले राइटर सलीम खान ने खुलकर अपनी बात रखते हुए कहा था, ‘इस्लाम इंसानियत और मोहब्बत की बात करता है, न कि सिनेमा देखने पर पाबंदी लगाने की।’ सलीम खान का ये बेबाक बयान आज भी ईद और रमजान के मौकों पर रिलीज होने वाली फिल्मों पर उठने वाली बहस के बीच याद किया जाता है।

Lehren TV को दिए एक पुराने इंटरव्यू में, वेटरन स्क्रीनप्ले राइटर सलीम खान ने फिल्म निर्माताओं और फिल्म जगत के लोगों के खिलाफ फतवा जारी करने की प्रथा के बारे में खुलकर बात की थी। इस इंटरव्यू में उन्होंने फिल्म जगत से जुड़े लोगों को ही टारगेट करने के पीछे के तर्क पर भी सवाल उठाया था।

फिल्म देखने वालों के खिलाफ क्यों नहीं जारी किया जाता फतवा?

सलीम खान ने कहा था, “फतवा सिर्फ फिल्म निर्माताओं या अभिनेताओं के खिलाफ ही क्यों जारी किया जाता है? फिल्म देखने वालों के खिलाफ क्यों नहीं?”

इस मुद्दे पर आगे बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘फिल्म जगत में फिल्म की शुरुआत से ही मेकर्स फिल्मों की रिलीज की एक स्ट्रैटिजी बनाते हैं, खासकर ईद के आसपास। आमतौर पर कहा जाता है कि मुसलमान रमजान के दौरान फिल्में नहीं देखते, लेकिन जब कोई फिल्म ईद पर रिलीज होती है, तो अक्सर उसे जबरदस्त ओपनिंग मिलती है।’

सलीम खान ने आगे कहा, ‘यह सफलता यूं ही नहीं मिलती। कभी-कभी फिल्म एक महीने तक तैयार रहती है और फिर जानबूझकर ईद पर रिलीज की जाती है, चाहे वो 60 करोड़ रुपये की फिल्म हो या 5 करोड़ रुपये की, क्योंकि उस दौरान पहले हफ्ते का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन एक्स्ट्राऑर्डिनरी माना जाता है।’

मुसलामानों के खिलाफ फतवा क्यों न जारी कर दिया जाए?

वहीं, ईद और रमजान के मौके पर होने वाले विवाद और आलोचना पर सवाल उठाते हुए सलीम खान ने कहा, “अगर यह तर्क दिया जा रहा है कि मुसलमान बड़ी संख्या में फिल्में देखते हैं और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, तो फिर फतवा क्यों न जारी कर दिया जाए कि जो भी मुसलमान फिल्में देखता है, वह मुसलमान नहीं है?” सलीम खान ने इस बात पर भी जोर दिया था कि इस्लाम में इंसानियत और मोहब्बत की सीख दी गई है, न कि बदले या नफरत की।” उनके मुताबिक त्योहार खुशी का मौका होता है और सिनेमा भी उसी खुशी का हिस्सा बन जाता है।

लोग हमारी फिल्में देखना बंद कर दें…

उन्होंने मनोरंजन जगत की आर्थिक स्थिति और वास्तविकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर लोग हमारी फिल्में देखना बंद कर दें, तो हमारा काम अपने आप बंद हो जाएगा। हमारे खिलाफ फतवा जारी करने की कोई जरूरत नहीं होगी। जिस दिन दर्शक सिनेमाघरों में आना बंद कर देंगे, हमारा बिजनेस अपने आप ही ठप हो जाएगा।’

अस्पताल में भर्ती है सलीम खान

जानकारी के लिए बता दें कि 90 वर्षीय सलीम खान पिछले कुछ दिनों से माइनर ब्रेन हैमरेज और सांस लेने में तकलीफ के चलते मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं और वेंट्रिलेटर पर हैं। खबरों के मुताबिक, उनकी एक छोटी सी सर्जरी (DSA Procedure) की गई है। हालांकि, अब उनकी हालत में सुधार है। सलीम खान की तबियत बिगड़ने के बाद से ही फिल्म उद्योग की बड़ी-बड़ी हस्तियां उनसे मिलने के लिए हॉस्पिटल पहुंच रहीं हैं, जिनमें उसके परिवार के सदस्यों के साथ-साथ संजय दत्त, शाहरुख़ खान, जावेद अख्तर, मलाइका अरोड़ा आदि के नाम शामिल हैं।

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